अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की भव्य तैयारियां जोरों पर चल रही हैं, लेकिन इसी बीच एक बड़ी चिंता भी उभरकर सामने आई है। शहर के दो सबसे प्रमुख खेल आयोजनों वाले स्थानों पर हवा की गुणवत्ता की जांच की गई है। इस जमीनी जांच में पता चला है कि इन प्रस्तावित खेल केंद्रों के आसपास धूल, कोयले का जलना और कचरा जलाया जाना प्रदूषण के सबसे बड़े कारण बने हुए हैं।
पालड़ी स्थित साबरमती रिवरफ्रंट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और मोटेरा के नरेंद्र मोदी स्टेडियम से मिले आंकड़े दोनों जगहों पर प्रदूषण के अलग-अलग स्वरूप की ओर इशारा करते हैं। रिवरफ्रंट के आसपास जहां धूल और कोयले के धुएं का अधिक असर देखा गया है, वहीं मोटेरा स्टेडियम के पास समुद्री उत्सर्जन और कचरा जलाने से होने वाला प्रदूषण कहीं ज्यादा मात्रा में पाया गया है।
यह महत्वपूर्ण जानकारी एक नई रियल-टाइम वायु गुणवत्ता निगरानी पहल के जरिए सामने आई है। राज्य सरकार और अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) ने आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) के विशेष सहयोग से यह अहम कदम उठाया है।
इस प्रोजेक्ट को ‘स्मार्ट-वायु’ (SMART-VAYU) नाम दिया गया है, जिसका पूरा अर्थ ‘सेंसिंग एंड मॉनिटरिंग फॉर एयर-क्वालिटी यूजिंग रियल-टाइम टेक्नोलॉजी-विजन-बेस्ड अहमदाबाद एयर एनालिसिस फॉर अर्बन मैनेजमेंट’ है। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे शहर में डेटा आधारित सिस्टम तैयार करके प्रदूषण के हॉटस्पॉट और उनके मुख्य स्रोतों की सटीक पहचान करना है।
इन दोनों महत्वपूर्ण स्थानों पर हवा के नमूनों की जांच अलग-अलग समय अवधि में की गई थी। साबरमती रिवरफ्रंट पर 4 मई से 24 मई के बीच सैंपलिंग का काम पूरा किया गया। दूसरी तरफ, नरेंद्र मोदी स्टेडियम के पास 25 जून से 8 अगस्त तक हवा की गुणवत्ता की गहन निगरानी की गई।
आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, रिवरफ्रंट पर कुल अनुमानित प्रदूषण में धूल की हिस्सेदारी 36 प्रतिशत रही, जबकि स्टेडियम के पास यह 23 प्रतिशत दर्ज की गई। कोयले के जलने से होने वाले प्रदूषण में सबसे चौंकाने वाला अंतर दिखा, जो रिवरफ्रंट पर 24 प्रतिशत था और मोटेरा में मात्र 1 प्रतिशत रहा।
इसके बिल्कुल उलट, समुद्री उत्सर्जन और कचरा जलाने जैसी संयुक्त श्रेणी का कुल योगदान स्टेडियम के पास 38 प्रतिशत रहा, जो रिवरफ्रंट पर दर्ज 16 प्रतिशत के आंकड़े से दोगुने से भी अधिक है। इसके अलावा, स्टेडियम के आसपास पावर प्लांट से जुड़े स्रोतों का प्रदूषण में 20 प्रतिशत हिस्सा देखा गया।
इस वैज्ञानिक विश्लेषण में ऑर्गेनिक एरोसोल (OA) के अलग-अलग स्रोतों में भी काफी भिन्नता पाई गई। क्षेत्रीय ऑक्सीडाइज्ड ओए का योगदान रिवरफ्रंट पर 41 प्रतिशत और स्टेडियम में 34 प्रतिशत दर्ज किया गया। वहीं, ऑक्सीडाइज्ड सॉलिड फ्यूल कंबस्शन ओए की हिस्सेदारी दोनों जगहों पर क्रमशः 28 प्रतिशत और 10 प्रतिशत रही। हालांकि, अर्बन ऑक्सीडाइज्ड ओए का स्तर रिवरफ्रंट के 13 प्रतिशत के मुकाबले स्टेडियम के पास अधिक यानी 22 प्रतिशत पाया गया।
यातायात से जुड़े ऑर्गेनिक एरोसोल की बात करें तो नरेंद्र मोदी स्टेडियम में इसका प्रभाव 18 प्रतिशत था, जबकि रिवरफ्रंट पर यह 13 प्रतिशत रहा। मोटेरा में सॉलिड फ्यूल कंबस्शन ओए की हिस्सेदारी भी 16 प्रतिशत दर्ज की गई, जो रिवरफ्रंट पर महज 5 प्रतिशत थी।
इसके साथ ही, सॉलिड फ्यूल कंबस्शन के मौलिक स्रोतों ने रिवरफ्रंट पर 14 प्रतिशत और स्टेडियम में 11 प्रतिशत का योगदान दिया। एक चिंताजनक बात यह भी सामने आई कि दोनों ही स्थानों पर ई-कचरा (e-waste) जलने से होने वाले प्रदूषण का स्तर 6 प्रतिशत आंका गया है।
इस खास निगरानी पहल के लिए अहमदाबाद शहर भर में कुल दस स्थानों को सावधानीपूर्वक चुना गया है। इनमें साबरमती रिवरफ्रंट स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नरेंद्र मोदी स्टेडियम के साथ-साथ करई स्थित गुजरात पुलिस अकादमी, संस्कारधाम और वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन खेल केंद्रों के अलावा पीराणा एएमसी कम्युनिटी सर्विस सेंटर, रखियाल एएमसी हेल्थ ऑफिस, वटवा जीआईडीसी का चंद्रकला कॉम्प्लेक्स, बोपल अर्बन हेल्थ सेंटर और थलतेज एएमसी वार्ड ऑफिस को भी शहर की आबोहवा सुधारने के इस प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा बनाया गया है।
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