अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व राज्यसभा सांसद शक्तिसिंह गोहिल ने गुजरात की भाजपा सरकार पर श्रमिकों की घोर अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने खुलासा किया है कि राज्य में हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले मनरेगा मजदूरों को 20 जून 2026 से उनके पसीने की कमाई का एक भी पैसा नहीं दिया गया है।
गोहिल ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास की नींव में श्रमिकों की अथक शक्ति होती है। डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली तत्कालीन यूपीए सरकार ने ग्रामीण मजदूरों की आजीविका सुरक्षित करने के लिए ही ऐतिहासिक मनरेगा कानून बनाया था। इस कानून में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान किया गया है कि मजदूर के काम पूरा करने के महज 15 दिनों के भीतर उसका भुगतान सीधे बैंक खाते में जमा हो जाना चाहिए।
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए गोहिल ने बतौर उदाहरण केवल भावनगर जिले के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि अकेले भावनगर में ही मजदूरों का 2 करोड़ 66 लाख 1 हजार 850 रुपये पिछले कई महीनों से बकाया है। इसी योजना के तहत काम करने वाले मेट (सुपरवाइजर) का भी सिर्फ एक जिले में 1 करोड़ 44 हजार 313 रुपये का भुगतान अटका पड़ा है।
कांग्रेस नेता ने स्पष्ट किया कि यह उनका कोई राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज हकीकत है। उन्होंने 17 सितंबर 2026 को भावनगर जिला ग्राम विकास एजेंसी के निदेशक द्वारा ग्राम विकास आयुक्त को लिखे गए पत्र की प्रति मीडिया को सौंपी। इस पत्र में 15 दिन के नियम का हवाला देते हुए तालुकावार लाखों रुपये के बकाया होने की बात स्वीकारी गई है।
गोहिल ने बताया कि इस आधिकारिक पत्र में खुद अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि भुगतान न मिलने से हताश होकर मजदूर आंदोलन और आत्महत्या करने की धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि नवरात्र और दशहरा जैसे बड़े त्योहार बीत गए, लेकिन इन गरीब मजदूरों को उनका अधिकार नहीं मिला। एक तरफ मजदूर परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ भाजपा के पूर्व मंत्रियों और नेताओं द्वारा मनरेगा में भारी भ्रष्टाचार करने के सिलसिलेवार मामले सामने आ रहे हैं।
कांग्रेस पार्टी की ओर से कड़ी मांग रखते हुए शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि पूरे गुजरात में मनरेगा श्रमिकों का बकाया तुरंत चुकाया जाए और देरी के लिए उन्हें ब्याज भी दिया जाए। उन्होंने 15 दिन के नियम के बावजूद चार-चार महीने तक भुगतान रोकने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग की।
सरकार से जवाबदेही की मांग करते हुए गोहिल ने कहा कि मजदूरों को उनके हक से वंचित रखने के लिए गुजरात सरकार को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। इसके साथ ही, उन्होंने आत्महत्या की चेतावनी देने वाले उन तमाम हताश श्रमिकों से भी भावुक अपील की कि वे ऐसा कोई भी आत्मघाती और अंतिम कदम न उठाएं।
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