मुंबई के जुहू इलाके में बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले की गुत्थी सुलझती नजर आ रही है। इस मामले में गिरफ्तार किए गए तीन आरोपियों में से एक 22 वर्षीय ऋतिक महतो (उर्फ रोशन) है। पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, ऋतिक लगभग एक साल पहले कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग में शामिल हुआ था।
रविवार को वारदात को अंजाम देने से पहले तक ऋतिक रैपिडो के लिए बाइक चलाने का काम करता था। हमले वाले दिन उसने उन दो मुख्य शूटरों की मदद की, जिन्होंने अभिनेता पर पांच राउंड फायरिंग की थी।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि 18 अक्टूबर (रविवार) की शाम हुए इस हमले में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल ऋतिक ही चला रहा था। वारदात के बाद वह फरार हो गया, लेकिन सोमवार सुबह उसे राजस्थान के कोटा से दो अन्य शूटरों— 18 वर्षीय फूल सिंह और 18 वर्षीय रेहान रहीसुद्दीन— के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।
इस घटना के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका में बैठे गैंगस्टर अनिल पंडित ने एक ऑडियो क्लिप जारी कर हमले की जिम्मेदारी ली थी। उस क्लिप में भी इस पूरी साजिश के तार लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने का इशारा किया गया था।
अंधेरी में किराए के मकान में अकेला रहने वाला ऋतिक महतो वैसे तो रैपिडो राइडर था, लेकिन उसके पास आय का कोई स्थायी साधन नहीं था। पुलिस के मुताबिक, मुंबई में वारदात से कुछ दिन पहले आए दोनों शूटरों को ऋतिक ने ही लॉजिस्टिक सपोर्ट और पनाह दी थी।
जांच में यह भी सामने आया है कि इन शूटरों को गैंग का कोई अन्य सदस्य निर्देश दे रहा था। जब टाइगर श्रॉफ को टारगेट के रूप में पक्का कर लिया गया, उसके बाद ही शूटरों को मुंबई में ऋतिक से मिलवाया गया था। हमले से पहले के कुछ दिन इन तीनों ने एक साथ ही बिताए थे।
हमले के लिए ऋतिक ने 12 सितंबर को अपने एक परिचित से 24,500 रुपये में एक बाइक खरीदी थी। बाइक का पुराना मालिक अंधेरी वेस्ट की जुहू गली में रहता है। ऋतिक ने उसे भरोसा दिया था कि वह जल्द ही गाड़ी अपने नाम पर ट्रांसफर करवा लेगा, लेकिन उसने जानबूझकर अपनी तस्वीर और जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए।
पुलिस को शक है कि ऋतिक ने पहचान छिपाने के लिए अपना हुलिया भी बदला था। जब वह मुंबई आया था तो उसके बाल काफी लंबे थे, लेकिन फायरिंग की घटना से महज 10 दिन पहले ही उसने अपने बाल कटवा लिए थे।
अधिकारी अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि ऋतिक बिश्नोई गैंग के लिए और कितने समय से काम कर रहा था और क्या उसने पहले भी किसी अपराध में मदद की थी। शुरुआत में वह अंधेरी वेस्ट में गिल्बर्ट हिल के पास जुहू गली में एक किराए के कमरे में रहता था।
इसी दौरान उसने कथित तौर पर उसी इलाके की नूरानी चॉल के पते पर अपना आधार कार्ड भी बनवा लिया था। हालांकि, करीब चार महीने पहले उसने अपनी जगह बदल ली और मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास सहार इलाके में किराए के कमरे में रहने लगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ऋतिक के कॉल रिकॉर्ड्स से खुलासा हुआ है कि वह लंबे समय से दिल्ली में बैठे किसी व्यक्ति के संपर्क में था। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या वह दिल्ली वाला हैंडलर बिश्नोई गैंग का ही कोई सदस्य है। इसके अलावा, बाइक खरीदने के लिए पैसे कहां से आए, यह जानने के लिए उसके बैंक खातों की भी बारीकी से जांच की जा रही है।
अपराध में इस्तेमाल की गई 220cc की बजाज पल्सर मोटरसाइकिल ऋतिक तक पहुंचने से पहले तीन अलग-अलग लोगों के पास रह चुकी थी। इसे सबसे पहले साल 2014 में जोगेश्वरी के मेघवाड़ी इलाके के एक निवासी ने खरीदा था। इसके बाद 2022 में इसे मलाड के डिंडोशी में रहने वाले एक शख्स को बेच दिया गया।
दूसरे मालिक ने यह बाइक जुहू गली निवासी इस्माइल नाम के तीसरे व्यक्ति को बेची थी। घटना के बाद पुलिस को यह लावारिस मोटरसाइकिल अंधेरी रेलवे स्टेशन के बाहर खड़ी मिली।
रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए जांचकर्ता पहले मालिक तक पहुंचे, जिसने दूसरे मालिक की जानकारी दी। कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस इस्माइल तक पहुंची और उससे हुई पूछताछ व तकनीकी सबूतों के आधार पर यह साबित हो गया कि वारदात के समय बाइक ऋतिक के ही पास थी।
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