comScore वडोदरा में 14 साल तक 'लक्ष्मण' बनने वाले आबिद को धर्म के कारण रामलीला से निकाला - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

वडोदरा में 14 साल तक ‘लक्ष्मण’ बनने वाले आबिद को धर्म के कारण रामलीला से निकाला

| Updated: October 22, 2026 14:15

14 साल तक लक्ष्मण का जीवंत किरदार निभाने वाले मुस्लिम कलाकार आबिद शेख को वडोदरा रामलीला से हटाया गया, पढ़ें इस घटना की पूरी सच्चाई।

दशहरे के मौके पर आदिवासी बहुल इलाके छोटा उदेपुर में जब आबिद शेख रामलीला के मंच पर केवट और मेघनाद के किरदार में उतरे, तो दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका स्वागत किया।

लेकिन 39 वर्षीय इस बेहतरीन कलाकार के लिए उनका अपना शहर वडोदरा एक कड़वा अनुभव लेकर आया। जिस रामलीला से वह पिछले 14 सालों से जुड़े थे, वहां दक्षिणपंथी समूहों ने उनके धर्म को लेकर आपत्ति जताई और उन्हें मंच से दूर कर दिया गया।

विज्ञान से स्नातक आबिद शेख बचपन से ही रामायण से गहरे प्रभावित रहे हैं। सालों की इस रामलीला परंपरा से अचानक मिले इस तिरस्कार ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है। वडोदरा के पोलो ग्राउंड में उत्तर भारतीय सांस्कृतिक संघ (NICA) द्वारा आयोजित रामलीला में उन्होंने वर्षों तक लक्ष्मण और भरत जैसे अहम किरदार निभाए हैं। उनके अभिनय और समर्पण का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रिहर्सल शुरू होने से लेकर दशहरे के समापन तक उनका पूरा परिवार मांसाहारी भोजन त्याग देता था।

सालों तक मंच पर दर्शकों का प्यार बटोरने वाले आबिद के लिए हालात पिछले साल अचानक बदल गए। रिहर्सल के दौरान कुछ कार्यकर्ता वहां पहुंचे और उनके मुस्लिम होने का हवाला देते हुए उनके काम करने पर ऐतराज जताया। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए आबिद बताते हैं कि 14 साल तक दर्शकों का बेशुमार प्यार मिलने के बाद इस तरह का अचानक हुआ विरोध उनके लिए एक गहरा सदमा था, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी।

कार्यकर्ताओं ने आयोजकों पर आबिद को हटाने का भारी दबाव बनाया। नतीजा यह हुआ कि इस साल वडोदरा की रामलीला में उन्हें बुलाया ही नहीं गया। आबिद भारी मन से कहते हैं कि रामलीला उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी थी, लेकिन अब उन्हें मंच के आसपास भी नहीं जाने दिया जा रहा।

महाकाव्य रामायण के साथ आबिद का यह जुड़ाव बचपन में ही शुरू हो गया था। टीवी पर रामायण पर आधारित एक कार्टून देखने के बाद उनके मन में लक्ष्मण के किरदार के प्रति एक खास आकर्षण पैदा हुआ। स्कूल में आयोजित रामलीला ने उन्हें पहली बार अभिनय का स्वाद चखाया और फिर रामायण के विभिन्न पात्रों को जीने का उनका यह सफर सालों तक अनवरत चलता रहा।

उत्तर भारतीय सांस्कृतिक संघ के निदेशक शशिकांत दास ने मीडिया से बातचीत में इस पूरी घटना पर गहरा अफसोस जताया है। उन्होंने बताया कि आबिद एक बेहतरीन अभिनेता होने के साथ-साथ रामायण के बहुत बड़े भक्त हैं और हनुमान चालीसा का पाठ भी करते हैं। दास के मुताबिक, पिछले साल बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आकर आबिद के रोल का भारी विरोध किया था। उन्होंने आबिद का बचाव करते हुए काफी बहस भी की, लेकिन अंततः प्रबंधन को दबाव के आगे झुकना पड़ा।

शशिकांत दास ने इसे एक अच्छे कलाकार का नुकसान बताया है। इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी विडंबना की ओर भी इशारा किया कि पोलो ग्राउंड में रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण के जो विशाल पुतले तैयार किए जा रहे हैं, उन्हें बनाने वाले कलाकार भी उत्तर प्रदेश से आए मुस्लिम ही हैं।

यह भी पढ़ें-

गुजरात: स्कूलों में बाहरी लोगों की ‘नो एंट्री’, वीडियोग्राफी और लाइव स्ट्रीमिंग पर लगा सख्त बैन

‘शार्क टैंक यूएसए’ में चमके भारतीय आविष्कारक राहुल अग्रवाल, एक अनोखे चम्मच से हासिल की ₹3.33 करोड़ की डील

Your email address will not be published. Required fields are marked *