देश में पिछले दस सालों में अर्द्धसैनिक बलों के 1,205 कर्मियों ने ख़ुदकुशी की

| Updated: March 31, 2022 2:38 pm

आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक दशक में किसी भी वर्ष की तुलना में 2020 और 2021 में कहीं अधिक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) के जवानों ने आत्महत्या के चलते जान गंवाई. इसके साथ ही पिछले 10 वर्षों में 1,200 से अधिक कर्मियों की मौत हुई.

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने मंगलवार को लोकसभा में बताया कि पिछले 10 साल में अर्द्धसैनिक बलों के 1,205 जवानों ने खुदकुशी की है जिनमें सर्वाधिक मामले वर्ष 2021 में आए.

सीएपीएफ में सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी, बीएसएफ, एनएसजी और असम राइफल्स (एआर) जैसे बल शामिल हैं. कुल मिलाकर उनके पास नौ लाख कर्मी हैं.

राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि 2020 में 143 जवानों ने खुदकुशी की. इससे पहले 2019 में 129 मामले, 2018 में 96 मामले, 2017 में 125 मामले, 2016 में 92 मामले, 2015 में 108 मामले , 2014 में 125 मामले, 2013 में 113 मामले और 2012 में 118 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे.

वर्ष 2021 में ऐसे 156 मामले दर्ज किए गए . उन्होंने कहा कि घरेलू समस्याएं, बीमारी और आर्थिक समस्याएं आत्महत्या के कुछ प्रमुख कारण हैं.

यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब हाल की घटनाओं की पृष्ठभूमि में बीएसएफ जवानों में तनाव का मुद्दा चर्चा में रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस महीने फ्रेट्रीसाइड (किसी साथी पर हमला करना) [fratricide] की घटनाओं में बीएसएफ के सात जवान मारे गए हैं. 2019 से अब तक बलों में ऐसी 25 से अधिक घटनाएं हुई हैं.

सूत्रों का कहना है कि ये घटनाएं मुख्य रूप से कड़ी कामकाजी परिस्थितियों, पारिवारिक मुद्दों और जरूरत होने पर छुट्टी न मिल पाने के कारण हुई हैं.

साल 2019 में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीएपीएफ कर्मियों के लिए उपलब्ध अवकाश मौजूदा 75 दिनों से बढ़ाकर 100 दिन किए जाएंगे, हालांकि इस पर अब तक अमल होना बाकी है.

सीएपीएफ द्वारा रक्षाकर्मियों की तर्ज पर इसके कर्मियों के आकस्मिक अवकाश को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव भी गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है.

राय ने सदन को बताया कि प्रासंगिक जोखिम कारकों के साथ-साथ प्रासंगिक जोखिम समूहों की पहचान करने और सीएपीएफ और असम राइफल्स (एआर) कर्मियों में आत्महत्या की रोकथाम के लिए उपचारात्मक उपायों का सुझाव देने के लिए अक्टूबर 2021 में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘अन्य कारणों के साथ घरेलू समस्याएं, बीमारी और वित्तीय समस्याएं आत्महत्या की घटनाओं के पीछे का कारण हैं. सीएपीएफ, असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कर्मियों की कामकाजी परिस्थितियों में सुधार एक निरंतर प्रयास है.’

राय ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि 2020 में 143 जवानों ने खुदकुशी की. इससे पहले 2019 में 129 मामले, 2018 में 96 मामले, 2017 में 125 मामले, 2016 में 92 मामले, 2015 में 108 मामले , 2014 में 125 मामले, 2013 में 113 मामले और 2012 में 118 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे.

वर्ष 2021 में ऐसे 156 मामले दर्ज किए गए . उन्होंने कहा कि घरेलू समस्याएं, बीमारी और आर्थिक समस्याएं आत्महत्या के कुछ प्रमुख कारण हैं.

यह आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब हाल की घटनाओं की पृष्ठभूमि में बीएसएफ जवानों में तनाव का मुद्दा चर्चा में रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस महीने फ्रेट्रीसाइड (किसी साथी पर हमला करना) [fratricide] की घटनाओं में बीएसएफ के सात जवान मारे गए हैं. 2019 से अब तक बलों में ऐसी 25 से अधिक घटनाएं हुई हैं.

सूत्रों का कहना है कि ये घटनाएं मुख्य रूप से कड़ी कामकाजी परिस्थितियों, पारिवारिक मुद्दों और जरूरत होने पर छुट्टी न मिल पाने के कारण हुई हैं.

साल 2019 में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि सीएपीएफ कर्मियों के लिए उपलब्ध अवकाश मौजूदा 75 दिनों से बढ़ाकर 100 दिन किए जाएंगे, हालांकि इस पर अब तक अमल होना बाकी है.

सीएपीएफ द्वारा रक्षाकर्मियों की तर्ज पर इसके कर्मियों के आकस्मिक अवकाश को 15 दिन से बढ़ाकर 30 दिन करने का प्रस्ताव भी गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकार नहीं किया गया है.

राय ने सदन को बताया कि प्रासंगिक जोखिम कारकों के साथ-साथ प्रासंगिक जोखिम समूहों की पहचान करने और सीएपीएफ और असम राइफल्स (एआर) कर्मियों में आत्महत्या की रोकथाम के लिए उपचारात्मक उपायों का सुझाव देने के लिए अक्टूबर 2021 में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया था.

उन्होंने कहा, ‘अन्य कारणों के साथ घरेलू समस्याएं, बीमारी और वित्तीय समस्याएं आत्महत्या की घटनाओं के पीछे का कारण हैं. सीएपीएफ, असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के कर्मियों की कामकाजी परिस्थितियों में सुधार एक निरंतर प्रयास है.’

राय ने कहा कि सरकार सीएपीएफ कर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए कई कदम उठा रही है. उन्होंने कहा, ‘“सीएपीएफ के तनाव के स्तर को कम करने के लिए गृह मंत्रालय, सीएपीएफ, असम राइफल्स और एनएसजी द्वारा विभिन्न कदम उठाए गए हैं. इसके तहत सीएपीएफ के लिए ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ कोर्स संचालित किए जा रहे हैं… जो जवानों पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं.’

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने ‘सीएपीएफ के तबादले और छुट्टी से संबंधित पारदर्शी नीतियों’ की शुरुआत की है, और’कठिन क्षेत्र में सेवा देने वाले कर्मियों के लिए इसके बाद जहां तक संभव हो सकता है, उनकी पसंद क पोस्टिंग पर विचार किया जाता है.’

उन्होंने यह भी जोड़ा कि ड्यूटी के दौरान घायल होने के चलते अस्पताल में भर्ती होने की अवधि को ऑन-ड्यूटी माना जाता है, यहां तक कि सैनिकों से उनकी शिकायतें जानने और उनका समाधान करने के लिए अधिकारियों की नियमित बातचीत का आयोजन किया जाता है.राय ने बताया कि मंत्रालय दुर्गम क्षेत्रों में तैनात जवानों को पर्याप्त मुआवजा भी दे रहा है.

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