विपुल चौधरी को पकड़ने में नाकाम रही एसीबी और आखिरकार क्राइम ब्रांच को करनी पड़ी कार्रवाई

| Updated: September 15, 2022 8:10 pm

शंकर सिंह वाघेला सरकार में गृहमंत्री Home Ministerरहे और 2005 से 2016 तक मेहसाणा जिला दुग्ध उत्पादन संघ लिमिटेड Mehsana District Milk Production Association Limited के अध्यक्ष विपुल मानजसंगभाई चौधरी Vipul Manjsangbhai Chowdhary ने अपनी पत्नी, बेटे और सीए के नाम पर कंपनियां बनाकर अपने अधिकार का दुरुपयोग किया और 750 करोड़ का गबन किया। हालांकि भ्रष्टाचार की शिकायत एसीबी ACB में दर्ज की गई थी लेकिन एसीबी विपुल चौधरी को गिरफ्तार करने में विफल रही, जिसके कारण अहमदाबाद अपराध शाखा को आरोपी की गिरफ्तारी की जिम्मेदारी सौंपी गयी । एसीबी विभाग और क्राइम ब्रांच अलग-अलग एजेंसियां हैं, केस एसीबी में दर्ज हुआ था लेकिन क्राइम ब्रांच Crime Branch ने ऑपरेशन को अंजाम दिया जिससे एसीबी असमंजस में पड़ गई। यह मामला पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बना हुआ है । एसीबी ने अब विपुल चौधरी और उसके सीए को गिरफ्तार कर आगे की जांच कर रही है।

एसीबी के संयुक्त निदेशक मकरंद चौहान ACB Joint Director Makrand Chauhan ने बताया कि विपुल चौधरी का कार्यकाल 2005 से 2016 तक था. इस कार्यकाल के दौरान विपुल चौधरी ने 750 करोड़ से अधिक के विभिन्न घोटाले किए हैं। उन्होंने सरकारी दिशा-निर्देशों और निविदाओं का उल्लंघन कर खरीदी में कदाचार किया . 485 करोड़ का निर्माण कार्य कराया । इस निर्माण के लिए एसओपी का भी पालन नहीं किया गया था। उपसचिव के खिलाफ पुनरीक्षण याचिका दायर की गई जिसके लिए वकील के खर्चे का भुगतान दुग्ध उत्पादक संघ से किया गया . बोरा खरीदने के लिए भले ही कम कीमत की एजेंसी थी, लेकिन उसने अधिक कीमत पर खरीद कर 13 लाख का घोटाला किया । जिस एजेंसी को प्रचार प्रसार के लिए काम सौंपा जाना चाहिए था, उसे सौंपने के बजाय,दूसरी एजेंसी को ऊंचे भाव में देकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया।

इसके अलावा घोटाले से जुटाई गई राशि से 31 कंपनियों का गठन किया गया था। इन 31 कंपनियों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पंजीकृत किया गया था। उनकी पत्नी और बेटा भी इस कंपनी में निदेशक थे। इस पूरे मामले में जिला रजिस्ट्रार को हाईकोर्ट का आदेश मिला, जिसके बाद जांच के लिए दो टीमों का गठन किया गया.इस जांच में दोनों टीमों ने 14 मामले दर्ज किए. इन 14 मुद्दों को सतर्कता अधिकारी को सौंपा गया। विजिलेंस अधिकारी ने 10 बिंदुओं की जांच के बाद अनियमितताएं पाईं। एसीबी ने पूरे मामले की जांच की।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इस घोटाले को जब अंजाम दिया गया तो सबसे पहले इसकी जांच सीआईडी क्राइम ने की। इस बीच, एसीबी ने काफी समय तक जांच की लेकिन जब यह स्पष्ट हो गया कि वे जड़ तक नहीं पहुंच पाए हैं, तो आखिरकार जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। विपुल को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया और उसे एसीबी के हवाले करने के बजाय क्राइम ब्रांच ने अपने पास रखा । अहम बात यह है कि गृह विभाग के जांच के आदेश देने के बावजूद जब एसीबी फेल हुई तो क्राइम ब्रांच ने आखिरकार आरोपी को गिरफ्तार कर ऑपरेशन को अंजाम दिया.

आम आरोपी को शाहीबाग में ,विपुल को क्राइम ब्रांच में रखा जाएगा

आमतौर पर जब एसीबी भ्रष्टाचार के आरोपियों को गिरफ्तार करती है तो उन्हें शाहीबाग थाने में रखा जाता है, लेकिन विपुल चौधरी को क्राइम ब्रांच में रखा जायेगा। गृह विभाग को एसीबी पर भरोसा नहीं रहा ऐसी चर्चा चल रही है।

शाहीबाग थाने में आरोपी को वीआईपी सुविधा मिलने के लग चुके हैं आरोप

इससे पहले की जांच में सामने आया था कि आरोपियों को शाहीबाग थाने में वीवीआईपी सुविधाएं मिल रही थीं। जिसके चलते विपुल चौधरी को शाहीबाग थाने में नहीं रखा गया. इससे पहले, एक पीआई ने 13 लाख रिश्वत के आरोपी की मदद की और एसीबी ने इसकी सूचना शहर के पुलिस आयुक्त को दी, लेकिन उस पीआई के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।

गृह विभाग को एसीबी पर शक, गोपनीय नहीं रहेगा ऑपरेशन

पुलिस महकमे में चर्चा है कि गृह विभाग घोटालेबाज विपुल चौधरी को गिरफ्तार करने के लिए मन बना चुका था इसलिए एसीबी ऑपरेशन से दूर रखा गया क्योकि गृह विभाग को शंका थी कि एसीबी से ऑपरेशन लीक हो जायेगा पूर्व गृहमंत्री विपुल चौधरी को बचने का मौका मिल जायेगा। पुलिस महकमे में चर्चा है कि उसे दूर रखने के लिए एक प्राइवेट ऑपरेशन के तहत क्राइम ब्रांच की मदद ली गई है.

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