शिवलिंग को लेकर एआईएमआईएम नेता दानिश कुरैशी ने सोशल मीडिया पर की अभद्र टिप्पणी

| Updated: May 18, 2022 1:32 pm

आज एआईएमआईएम नेता दानिश कुरैशी भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक विवादित पोस्ट किया है , पवित्र शिवलिंग को लेकर इतनी ख़राब भाषा का इस्तेमाल किया गया है की उसका उल्लेख भी नहीं किया जा सकता। इस पोस्ट में उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. इस समय अभद्र पोस्ट को लेकर हिंदू समुदाय में खासा गुस्सा है. और पुलिस शिकायत दर्ज कराने की मांग की जा रही है।

  • हिन्दू समाज की धार्मिक भावना आहात ,पुलिस शिकायत की मांग

ज्ञानवापी मुद्दे पर एआईएमआईएम नेता दानिश कुरैशी की अभद्र टिप्पणी से हिंदू समुदाय में आक्रोश फैल गया है। दानिश ने सोशल मीडिया पर शिवलिंग को लेकर अभद्र पोस्ट किया। इसको लेकर काफी विवाद है। साफ है कि यह टिप्पणी हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने की कोशिश है।

देश में मंदिरों और मस्जिदों को लेकर विवाद हमेशा से चलता रहा है, जो हमेशा देश की एकता और अखंडता के लिए खतरा साबित हुआ है। ऐसा ही एक विवाद हाल ही में सामने आया है। वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग होने का दावा किया जा रहा है इस मस्जिद के परिसर में वीडियोग्राफी का काम पूरा कर लिया गया है।

वीडियोग्राफी और सर्वे के दौरान मस्जिद के अंदर एक शिवलिंग मिला है। जिससे जिस इलाके से शिवलिंग मिला है उसे सील कर दिया गया है। ताकि कोई इस जगह पर न जा सके। हालांकि, शिवलिंग पाए जाने के दावे को मुस्लिम पक्ष ने खारिज कर दिया और तर्क दिया जा रहा है कि यह एक फव्वारा है। फिलहाल अदालत ने शिवलिंग को सुरक्षित रखने और मस्जिद में नमाज जारी रखने की इजाजत दी है।

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर चल रहा है विवाद

आज एआईएमआईएम नेता दानिश कुरैशी भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक विवादित पोस्ट किया है , पवित्र शिवलिंग को लेकर इतनी ख़राब भाषा का इस्तेमाल किया गया है की उसका उल्लेख भी नहीं किया जा सकता। इस पोस्ट में उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. इस समय अभद्र पोस्ट को लेकर हिंदू समुदाय में खासा गुस्सा है. और पुलिस शिकायत दर्ज कराने की मांग की जा रही है।

गौरतलब है कि ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर विवाद उतना ही पुराना है जितना कि बाबरी मस्जिद। पूजा की अनुमति के लिए पहली बार 1991 में अदालत में एक अपील दायर की गई थी। बाद में, 1993 में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यथास्थिति को बरकरार रखा। 2018 में, सुप्रीम कोर्ट ने स्टे ऑर्डर के लिए छह महीने की समय सीमा निर्धारित की। मामले को 2019 में वाराणसी की एक अदालत में फिर से खोला गया। 2021 में मस्जिद की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी का ऑर्डर दिया गया था। यद्यपि वीडियोग्राफी का मुस्लिम पक्ष द्वारा विरोध किया गया था, अदालत ने फिर से वीडियोग्राफी का आदेश दिया और इसका संचालन पूरा हो गया है।

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