आज़ादी के अमृत काल में हुयी चीतों की ” घर वापसी “, पीएम मोदी के जन्म दिन पर देश को तोहफा

| Updated: September 17, 2022 12:28 pm

भारत के लिए एक सपना सच हो गया क्योंकि प्रधान मंत्री मोदी ( PM Modi )ने मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क (Kuno National Park in Madhya Pradesh )में नामीबिया से लाए गए चीतों को देश के वन्य जीवन और आवास को पुनर्जीवित करने और विविधता लाने के अपने प्रयासों के तहत मुक्त ।

वह चीते उतरे हैं मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कुनो नेशनल पार्क में । आठ चीते, जिसमे पांच मादा और तीन नर चीतों का समावेश है . चीतों के आगमन पर ढोल नगाड़ों के साथ चीता – चीता की गूंज से इन नए मेहमानों का स्वागत किया गया , लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ ने उचित नहीं मानते , उनके मुताबिक इस शोर से नए मेहमानों को तकलीफ होगी ।

इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ना केवल चीता वापस आयें हैं बल्कि पर्यावरण के प्रति चेतना भी लौटी है । प्रधानमंत्री ने मित्र देश नामीबिया का भी चीता देने के लिए आभार जताया । अपने जन्मदिवस पर देश को विशिष्ठ भेंट देने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि 1952 मे हमने भारत को चीता विहीन क्षेत्र घोषित कर दिया लेकिन चीता आने मे 75 साल लग गए ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भरोसा जताया कि कुनो राष्ट्रीय उद्यान मे चीता आने के बाद यंहा के पर्यावरण के संरक्षण के साथ ही पर्यटन से विकास के नए अवसर खुलेंगे । उन्होंने पर्यटकों से कुछ महीने इंतजार करने का आग्रह किया ताकि इस दौरान नए माहौल मे चीता घुलमिल सकें । भारतीय संस्कृति मे छोटे से छोटे जीव की रक्षा का संस्कार हमे मिले हैं । आने वाले वर्षों मे चीता के जरिए जंगल और जीवन का बड़ा शून्य भर रहा है । पर्यावरण के रक्षा के साथ ही देश की प्रगति होती है यह भारत ने कर दिखाया है ।

गुजरात के अपने अनुभव को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि टाइगर की संख्या दोगुनी के लक्ष्य को समय से पहे पूराकर लिया गया है । हाथी की संख्या भी बढ़ी है . वैश्विक चुनौतियों को प्रधानमंत्री ने व्यतिगत समस्या देने का आह्वान किया ।

काँग्रेस नेता ने जयराम रमेश ने इसे ” तमाशा “करार देते हुए ट्वीट किया

” प्रधान मंत्री शायद ही कभी शासन में निरंतरता को स्वीकार करते हैं। 25.04.2010 को केपटाउन की मेरी यात्रा पर वापस जाने वाली चीता परियोजना इसका ताजा उदाहरण है। आज पीएम द्वारा किया गया तमाशा अनुचित है और राष्ट्रीय मुद्दों और #BharatJodoYatra को दबाने से एक और मोड़ है।

2009-11 के दौरान जब बाघों को पहली बार पन्ना और सरिस्का में स्थानांतरित किया गया था, तब कयामत के कई भविष्यवक्ता थे। वे गलत साबित हुए। चीता परियोजना पर भी इसी तरह की भविष्यवाणियां की जा रही हैं। इसमें शामिल पेशेवर प्रथम श्रेणी के हैं और मैं इस परियोजना के लिए शुभकामनाएं देता हूं!”


आज पीएम मोदी का 72वां जन्मदिन (PM Modi’s 72nd birthday )है. यह कुनो के आसपास के निवासियों के लिए एक त्योहार बन गया जो दो चीजों के लिए उत्साहित थे। एक चीता जो भारत में वापस आ रहे हैं , 1947 में आखिरी तीन की गोली मारकर हत्या करने के 75 साल बाद भारत (India) आ रहे थे और वह भी मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh )में और दूसरा कि पीएम मोदी अपने जन्मदिन पर वहां थे।


लंबी उड़ान के बाद चीते थोड़े बेचैन थे। जयपुर (Jaipur )में उतरने के बाद, उन्हें हेलीकॉप्टर से कुनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park )के लिए रवाना किया गया। कुनो नेशनल पार्क में एक विशेष हेलीपैड का निर्माण किया गया था। लंबी उड़ान और नए माहौल में पहुंचे चीते बेचैन नजर आए। क्रेन में कैमरे लगे थे।

भारत आने तक चीतों ने नामीबिया में जिस इम्पाला का शिकार किया था, उसके विपरीत अब चीतों को चिंकारा का शिकार करना होगा। सभी चीतों को रेडियो कॉलर (Radio Collar )किया गया है। यह उनके हलन चलन और खासकर उनके स्वास्थ्य को ट्रैक करने के लिए है।

एक महीने के लिए यहां कई विशेषज्ञों को चीता के स्थानान्तरण के पायलट प्रोजेक्ट का अध्ययन करने के लिए लगाया जाएगा। गौरतलब है कि गुजरात के जामनगर में प्रस्तावित रिलायंस चिड़ियाघर को भी अफ्रीका से 40 चीते मिलने वाले हैं। रिलायंस ने यह प्रक्रिया करीब 100 दिन पहले ही शुरू कर दी है।

कुनो नेशनल पार्क 748.8 किलोमीटर भूमि में फैला हुआ है और 1981 में स्थापित किया गया था। पार्क को 2018 में राष्ट्रीय दर्जा मिला। चीता ट्रांसलोकेशन दुनिया में अपनी तरह का पहला ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट है।

इंदिरा गांधी ने 1970 में चीतों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन 2022 में उन्हें भारत वापस लाना पीएम नरेंद्र मोदी की नियति में था। कुछ इतिहासकारों का दावा है कि चीता नाम की उत्पत्ति संस्कृत में चित्रा शब्द से हुई है। हालांकि, वाइब्स ऑफ इंडिया इन दावों की पुष्टि नहीं कर सका।

एक अंतर-महाद्वीपीय स्थानान्तरण परियोजना ( Inter-Continental Transfer Project )के हिस्से के रूप में आठ चीतों, जिसमे पांच मादा और तीन नर को मालवाहक विमान से पहले राजस्थान के जयपुर लाया गया।

चीता को 1952 में भारत में विलुप्त (Extinct )घोषित किया गया था । चीता नामीबिया( Namibia )से हैं और इस साल की शुरुआत में हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन के तहत लाए गए हैं।

चीतों को रिहा करने के बाद, पीएम मोदी अभी कराहल, श्योपुर में महिला एसएचजी सदस्यों / सामुदायिक संसाधन व्यक्तियों के साथ एक स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सम्मेलन में भाग ले रहे हैं।

भारत में चीतों का पुन: आगमन “प्रोजेक्ट चीता” के तहत किया जा रहा है, जो दुनिया की पहली अंतर-महाद्वीपीय बड़े जंगली मांसाहारी पुनर्स्थापन परियोजना है।
चीता भारत में खुले जंगल और घास के मैदान के पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली में मदद करेगा।

भविष्य में अफ्रीका से मप्र में 25 से अधिक चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान में लाया जाएगा

भविष्य में अफ्रीका से मप्र में 25 से अधिक चीतों को कुनो राष्ट्रीय उद्यान ( Kuno National Park )में लाया जाएगा,यह जैव विविधता के संरक्षण में मदद करेगा और जल सुरक्षा Water Security, कार्बन पृथक्करण Carbon Sequestration और मिट्टी की नमी संरक्षण Soil Moisture Conservation जैसी पारिस्थितिकी तंत्र Ecosystem सेवाओं को बढ़ाने में मदद करेगा, जिससे बड़े पैमाने पर समाज को लाभ होगा।

पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संरक्षण ( Environmental Protection and Wildlife Conservation )के प्रति प्रधान मंत्री की प्रतिबद्धता के अनुरूप यह प्रयास, पर्यावरण-विकास और पर्यावरण-पर्यटन (Eco-Tourism )गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय समुदाय के लिए आजीविका के अवसरों में वृद्धि करेगा।

बाद में प्रधान मंत्री मोदी पीएम कौशल विकास योजना के तहत चार विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के (पीवीटीजी) कौशल केंद्रों का भी उद्घाटन करेंगे।

बयान में कहा गया है कि डीएवाई-एनआरएलएम का लक्ष्य ग्रामीण गरीब परिवारों को चरणबद्ध तरीके से स्वयं सहायता समूहों में शामिल करना और उनकी आजीविका में विविधता लाने, उनकी आय और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए दीर्घकालिक सहायता प्रदान करना है।

मिशन घरेलू हिंसा, महिला शिक्षा और अन्य लिंग संबंधी चिंताओं, पोषण, स्वच्छता, स्वास्थ्य आदि जैसे मुद्दों पर जागरूकता पैदा करने और व्यवहार परिवर्तन संचार के माध्यम से महिला एसएचजी सदस्यों को सशक्त बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।

चीतों को भारत लाने वाले विमान के मुख्य केबिन में पिंजरों को सुरक्षित करने की अनुमति देने के लिए संशोधित किया गया था, लेकिन उड़ान के दौरान पशु चिकित्सकों को चीते तक पूरी पहुंच की अनुमति दी गई थी।
विमान ने ध्यान आकर्षित किया क्योंकि इसे एक बाघ की छवि के साथ चित्रित किया गया था। विमान एक अल्ट्रा-लॉन्ग रेंज जेट है जो 16 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम है। विमान ने बिना रुके नामीबिया से सीधे भारत के लिए उड़ान भरी, जो चीतों की भलाई के लिए एक महत्वपूर्ण विचार था।

हवा में रहने के दौरान डॉक्टरों की सलाह के अनुसार चीतों को कोई खाना नहीं दिया गया। उल्टी से बचने के लिए यह सावधानी जरूरी थी।
चीतों की उत्पत्ति अफ्रीका और ईरान में हुई थी। वे सभी बिल्लियों में सबसे तेज़ जानवर हैं।

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