गुजरात भाजपा चुनाव के पहले चंदा से 200 करोड़ करेगी इकठ्ठा

| Updated: May 24, 2022 12:12 pm

चंदे के मामले में मालामाल गुजरात प्रदेश भाजपा अपने खजाने में और वृद्धि करने जा रही है। प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के दौरान प्रदेश अध्यक्ष सीआर पाटिल ने अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को विधानसभा चुनाव के समय तक कम से कम 200 करोड़ रुपये चंदा से जुटाने का निर्देश दिया है. पाटिल ने सभी कार्यकारिणी सदस्यों से पार्टी के लिए जितना हो सके उतना फंड लाने को कहा ताकि चुनाव के समय पार्टी आत्मनिर्भर बन सके। कार्यकर्ताओं और नेताओं को कम से कम 200 रुपये जमा करने होंगे।

बैठक में, कार्यकारिणी के कई सदस्यों ने कितनी राशि जुटाएंगे यह दर्ज कराया । इस संबंध में प्रदेश महासचिव रजनी पटेल ने कहा कि राज्य स्तर पर चुनाव सहयोग कोष जुटाने को कहा गया है, जिसमें भाजपा कार्यकर्ता यह राशि राज्य इकाई के खाते में चेक के माध्यम से खुद से और दूसरों से लेंगे. फिलहाल ऐसा कोई अनुमान नहीं लगाया गया है, लेकिन एक बड़े अनुमान के मुताबिक हम इस फंड के जरिए 200 करोड़ रुपये जुटाएंगे.

2012 में भी भाजपा ने एकत्रित किया था चंदा

इससे पहले, भाजपा ने 2012 के विधानसभा चुनावों से पहले नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक धन एकत्रित करने वाली योजना की घोषणा की थी, जिसके तहत प्रत्येक कार्यकर्ता को किसी भी नागरिक से भाजपा के लिए पार्टी का धन एकत्र करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि, 10 रुपये की छोटी राशि थी ।

2017 में बीजेपी ने 253 करोड़ रुपये एकत्रित किये, 130 करोड़ रुपये खर्च हुए

2017 के विधानसभा चुनावों के दौरान, भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय ने गुजरात चुनावों के लिए कुल 163.70 करोड़ रुपये एकत्र किए, जबकि राज्य इकाई ने कुल 88.5 करोड़ रुपये, यानि कुल 253 करोड़ रुपये एकत्र किए। चुनाव कोष के लिए राष्ट्रीय कार्यालय को प्राप्त राशि में से 129 करोड़ रुपये डिमांड ड्राफ्ट या चेक के माध्यम से एकत्र किए गए थे, जबकि 3.5 करोड़ रुपये नकद के माध्यम से एकत्र किए गए थे। जबकि भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय ने 23.8 करोड़ रुपये और गुजरात प्रदेश इकाई ने 106.6 करोड़ रुपये खर्च किए। खर्च में से 83 करोड़ रुपये विज्ञापनों और प्रचार पर खर्च किए गए, जबकि 24.30 करोड़ रुपये यात्रा खर्च पर खर्च किए गए।

राजनीतिक चंदा में भाजपा पहले से है मालामाल , कांग्रेस हो रही कंगाल

चुनावी और राजनीतिक सुधार के क्षेत्र में काम करने वाली ग़ैर-सरकारी संस्था एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2019-20 के बीच मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड से कुल छह हज़ार दो सौ करोड़ रुपये से ज़्यादा पैसे मिले जिसमें से पूरी धनराशि का तक़रीबन 68 प्रतिशत भारतीय जनता पार्टी को मिला, जो साढ़े चार हज़ार करोड़ रुपए से भी अधिक है.

चुनाव आयोग के सामने पेश की गई एक वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट में भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में पार्टी को इलेक्टोरल बॉण्ड के ज़रिए तक़रीबन ढाई हज़ार करोड़ रूपए की आमदनी हुई. ये आमदनी वित्तीय वर्ष 2018-19 में पार्टी को इलेक्टोरल बॉन्ड से मिले 1450 करोड़ रूपए से करीब 76 प्रतिशत अधिक है.

कुल राशि का क़रीब 75 प्रतिशत हिस्सा बीजेपी के खाते में आया

उपलब्ध जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2019-20 के दौरान 18 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉण्ड के ज़रिए कुल मिलाकर लगभग तीन हज़ार 441 करोड़ रुपये की राशि चंदे के तौर पर मिली. इस कुल राशि का क़रीब 75 प्रतिशत हिस्सा बीजेपी के खाते में आया.

सिर्फ़ नौ प्रतिशत ही कांग्रेस को मिल पाया

जहां एक तरफ बीजेपी को मिली राशि कई गुना बढ़ी है, वहीं 2019-20 वित्तीय वर्ष में ही कांग्रेस को इलेक्टोरल बॉण्ड के ज़रिए केवल 318 करोड़ रूपए मिले. यह धनराशि उन 383 करोड़ रुपयों से 17 प्रतिशत कम थी जो पार्टी को 2018-19 में मिली थी और 2019-20 में इस माध्यम से जितना राजनीतिक चंदा दिया गया उसका सिर्फ़ नौ प्रतिशत ही कांग्रेस को मिल पाया.

दूसरी विपक्षी पार्टियों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2019-20 में ही बॉन्ड के ज़रिए तृणमूल कांग्रेस को 100 करोड़, डीएमके को 45 करोड़ रूपए, शिवसेना को 41 करोड़ रूपए, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 20 करोड़ रूपए, आम आदमी पार्टी को 17 करोड़ रूपए और राष्ट्रीय जनता दल को 2.5 करोड़ रूपए का चंदा मिला.

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