अहमदाबाद: गुजरात के द्वारका से एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सड़क हादसे में अपने जवान बेटे को खोने वाले पिता को न्याय के लिए गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा है।
पिता का आरोप है कि पुलिस ने आरोपी कार चालक के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, उनके मृतक बेटे पर ही एफआईआर दर्ज कर ली। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
याचिकाकर्ता साबिर कुंदिया ने अदालत को बताया कि बीते 27 जनवरी को एक कार ने उनके बेटे अली असगर की मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी थी। इस भीषण हादसे में अली असगर को गंभीर चोटें आईं, जिसके चलते उसकी जान चली गई।
घटना के बाद, साबिर ने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए कार चालक जितेंद्र दवे को अपने बेटे की मौत का जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने पुलिस से कार चालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की गुहार लगाई थी।
हालांकि, द्वारका पुलिस का रवैया इस मामले में बिल्कुल अलग रहा। पुलिस ने पीड़ित पिता की शिकायत पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके उलट, घटना के तीन दिन बाद यानी 30 जनवरी को पुलिस ने कार चालक जितेंद्र दवे की शिकायत के आधार पर मृतक अली असगर के खिलाफ ही मामला दर्ज कर लिया।
कार चालक जितेंद्र दवे ने अपनी एफआईआर में दावा किया है कि वह 27 जनवरी की शाम अपनी कार चला रहा था। दवे के मुताबिक तभी अली असगर कथित तौर पर गलत दिशा से आया और उसकी कार से टकराकर गिर पड़ा।
दवे ने पुलिस को बताया कि इस घटना के बाद उसके सीने में दर्द होने लगा, जिसके बाद स्थानीय लोग उसे उसके घर ले गए। दवे के अनुसार उसे बाद में पता चला कि गंभीर रूप से घायल मोटरसाइकिल सवार को राजकोट सिविल अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
दवे का कहना है कि हादसे के सदमे से उबरने के बाद वह पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कराने पहुंचा। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और मोटर वाहन अधिनियम के तहत मृतक युवक पर ही लापरवाही से गाड़ी चलाने का केस दर्ज कर लिया।
इस अन्याय के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील ने जोरदार दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि पीड़ित पिता की शिकायत के बावजूद पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की और आरोपी दवे की शिकायत पर कार्रवाई करने के लिए तीन दिन तक इंतजार किया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से अपील की कि वह पुलिस को कार चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का सख्त निर्देश दे। मामले की विस्तार से सुनवाई करने के बाद, जस्टिस एमआर मेंगड़े ने याचिकाकर्ता को एक अहम कानूनी सुझाव दिया।
जस्टिस मेंगड़े ने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया के अनुसार इस शिकायत को अधिकार क्षेत्र वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष उठाया जाना चाहिए। अदालत के इस सुझाव को स्वीकार करते हुए, याचिकाकर्ता के वकील ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी।
इसके बाद अदालत ने याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में दर्ज किया कि वैकल्पिक कानूनी उपाय का सहारा लेने के उद्देश्य से याचिकाकर्ता के वकील ने इस मौजूदा अर्जी को वापस लेने की मांग की है, जिसे मंजूर किया जाता है।
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