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गुजरात में विवाह पंजीकरण के लिए माता-पिता की सहमति होगी अनिवार्य, ‘लव जिहाद’ के खिलाफ सरकार का सख्त कदम

| Updated: February 21, 2026 19:11

गुजरात सरकार ने विवाह पंजीकरण नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। 'लव जिहाद' और धोखाधड़ी के मामलों पर लगाम लगाने के लिए अब शादी के रजिस्ट्रेशन में माता-पिता की सहमति और 30 दिन का समय अनिवार्य होगा।

“राज्य में लव जिहाद के नाम पर एक बड़ा खेल खेला जा रहा है” और “युवा लड़कियों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच की आवश्यकता है”— इन कड़े शब्दों के साथ गुजरात सरकार ने शुक्रवार को गुजरात विवाह पंजीकरण अधिनियम, 2006 (Gujarat Registration of Marriages Act, 2006) में अहम संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इस नए प्रस्ताव का सबसे प्रमुख पहलू यह है कि अब राज्य में विवाह के पंजीकरण (Marriage Registration) के लिए माता-पिता की सहमति को अनिवार्य बनाया जा रहा है।

विधानसभा नियम 44 के तहत इस प्रस्ताव को सदन में पेश करते हुए, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पंचमहाल जिले का एक चौंकाने वाला उदाहरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उस इलाके में “एक भी मुस्लिम आबादी या मस्जिद नहीं थी, फिर भी वहां से सैकड़ों निकाह प्रमाण पत्र जारी किए गए।” इसके अलावा, उन्होंने बनासकांठा, नवसारी और मेहसाणा जिलों में सामने आए इसी तरह के मामलों का भी प्रमुखता से जिक्र किया।

‘सार्वजनिक महत्व’ और सनातन धर्म की रक्षा

इस पूरे मुद्दे को “सार्वजनिक महत्व” का विषय करार देते हुए उपमुख्यमंत्री संघवी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार किसी भी तरह से “प्रेम विवाह (Love Marriages) के खिलाफ नहीं है।” बल्कि, यह संशोधन विशेष रूप से “लड़कियों की गरिमा और सनातन धर्म की रक्षा” के उद्देश्य से लाया जा रहा है।

प्रस्ताव के अनुसार, विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में अब माता-पिता की रजामंदी अनिवार्य होगी। जैसे ही कोई जोड़ा विवाह पंजीकरण के लिए आवेदन करेगा, उनके माता-पिता को आधिकारिक तौर पर एक व्हाट्सएप (WhatsApp) संदेश के माध्यम से सूचित किया जाएगा। प्रस्ताव में यह स्पष्ट किया गया है कि सहायक रजिस्ट्रार (Assistant Registrar) की पुष्टि होने के 10 कार्य दिवसों के भीतर दूल्हा और दुल्हन दोनों के माता-पिता को यह जानकारी दे दी जाएगी। यह सूचना सरकारी नियमों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक (physical) रूप से भेजी जा सकती है।

सुझावों के लिए 30 दिन का समय

सरकार ने प्रस्तावित बदलावों पर आम जनता से सुझाव और सिफारिशें मांगने के लिए 30 दिन की अवधि तय की है। कानून में अंतिम बदलाव करने से पहले इन सभी सुझावों की समीक्षा के लिए एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा। इसके अलावा, शादियों के सुचारू रजिस्ट्रेशन के लिए एक समर्पित ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया जाएगा। नई व्यवस्था के लागू होने पर विवाह पंजीकरण की पूरी प्रक्रिया में कम से कम 30 दिन का समय लगेगा।

आपको बता दें कि यह कदम अचानक नहीं उठाया गया है। दिसंबर 2025 में, पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) के पूर्व सदस्यों ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को एक ज्ञापन सौंपकर विवाह पंजीकरण के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने की पुरजोर मांग की थी।

धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त चेतावनी

उपमुख्यमंत्री संघवी ने बताया, “पिछले तीन महीनों के दौरान, कानून और न्याय राज्य मंत्री कौशिक वेकारिया ने इन सुधारों का मसौदा तैयार करने से पहले विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ करीब 30 बैठकें की हैं, जिनमें कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले।”

उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “लव जिहाद की आड़ में जो खेल चल रहा है, उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोई ‘सलीम’ अपनी असली पहचान छिपाकर ‘सुरेश’ बनता है और मासूम लड़कियों को अपने जाल में फंसाता है, तो उसे जिंदगी भर याद रहने वाला सबक सिखाया जाएगा।”

बाद में मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने दोहराया कि अगर कोई शख्स अपनी पहचान छिपाकर राज्य की किसी भी बेटी को धोखा देता है, तो सरकार ऐसी कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी कि भविष्य में कोई भी बुरी नीयत से बेटियों की तरफ देखने की जुर्रत नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, “आज का समय युवा लड़कियों के लिए एक मजबूत कवच बनाने की मांग करता है। यह सरकार हर बेटी की गरिमा और हमारी सनातन परंपरा की रक्षक है।”

कैसी होगी नई प्रस्तावित पंजीकरण प्रणाली?

नए संशोधनों के बाद मैरिज रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार होगी:

  • आवेदन और पहचान पत्र: विवाह पंजीकरण आवेदन पर दूल्हा-दुल्हन और दो गवाहों के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है। यह आवेदन कानूनी रूप से नोटरीकृत (notarised) होना चाहिए। इसके साथ केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी कोई वैध पहचान पत्र (जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या फोटो आईडी कार्ड) लगाना होगा।
  • जरूरी दस्तावेज: हर आवेदन संबंधित क्षेत्र के सहायक रजिस्ट्रार को सौंपा जाएगा। इसके साथ दूल्हा और दुल्हन की पूरी जानकारी और दस्तावेज देने होंगे। इनमें आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, शादी का कार्ड, दो पासपोर्ट साइज फोटो, शादी की एक तस्वीर, गवाहों की तस्वीरें और एक घोषणा पत्र शामिल है (जिसमें यह बताना होगा कि उन्होंने अपने माता-पिता को शादी की जानकारी दी है या नहीं)। दोनों पक्षों के माता-पिता के भी इसी तरह के दस्तावेज जमा करने होंगे।
  • माता-पिता को सूचना: सहायक रजिस्ट्रार द्वारा आवेदन की पुष्टि/संतुष्टि होने के 10 कार्य दिवसों के भीतर दूल्हा-दुल्हन के माता-पिता को सूचित किया जाएगा। यह सूचना इलेक्ट्रॉनिक या भौतिक माध्यम से भेजी जाएगी।
  • रजिस्ट्रार की मंजूरी: आवेदन प्राप्त होने के बाद सहायक रजिस्ट्रार इसे संबंधित जिले या तालुका के मुख्य रजिस्ट्रार को भेज देगा। जब रजिस्ट्रार यह सुनिश्चित कर लेगा कि उप-नियमों (1 से 7) में बताई गई सभी शर्तें पूरी हो गई हैं, उसके 30 दिन बाद विवाह का पंजीकरण किया जाएगा।
  • ऑनलाइन पोर्टल और सर्टिफिकेट: रजिस्ट्रार सारी जानकारी सरकार द्वारा बनाए गए नए ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करेगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद, रजिस्ट्रार फॉर्म-2 (Form-2) के अनुसार विवाह पंजीकरण प्रमाण पत्र (Marriage Certificate) तैयार करेगा, जिसे संबंधित पक्षों को व्यक्तिगत रूप से या डाक के जरिए सौंप दिया जाएगा।

नए प्रस्ताव पर उठी बहस: किसी ने बताया असंवैधानिक, तो किसी ने किया समर्थन

सरकार के इस कदम पर समाज और राजनीति के अलग-अलग हलकों से मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक तरफ जहां विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने इसका समर्थन किया है, वहीं समाजशास्त्रियों ने इसे अधिकारों का हनन बताया है।

‘हम वापस सामंती व्यवस्था की ओर लौट रहे हैं’

जाने-माने समाजशास्त्री घनश्याम शाह ने

वाइब्स ऑफ इंडिया से बातचीत में इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे पूरी तरह से संविधान के खिलाफ करार देते हुए कहा कि बालिग (वयस्क) नागरिकों को अपने जीवन के फैसले लेने का पूरा अधिकार है। शाह ने चिंता जताते हुए कहा, “हम वापस उसी सामंती व्यवस्था (feudal society) की ओर लौट रहे हैं।”

उन्होंने तंज कसते हुए यह भी कहा कि ज्यादातर विधायकों की उम्र 40 या 50 साल से ऊपर है, जिसका सीधा मतलब है कि उनकी सोच इस तरह के रूढ़िवादी कदमों से मेल खाती है। पंचमहाल जिले के उदाहरणों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा जो कुछ भी किया जा रहा है, वह मुस्लिम विरोधी भावनाओं को भी बढ़ावा देता है।

शाह ने ‘लव-जिहाद’ को एक गढ़ा हुआ (coined) शब्द बताते हुए स्पष्ट किया कि वह खुद ऐसे कई अंतर-धार्मिक (inter-religion) विवाहों के उदाहरण दे सकते हैं, जहां शादी के बाद भी जोड़ों ने अपना धर्म नहीं बदला है।

आप (AAP) और कांग्रेस नेताओं ने किया स्वागत

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी (AAP) की गुजरात इकाई के अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने इस प्रस्ताव का खुला समर्थन किया है। उन्होंने वाइब्स ऑफ इंडिया को बताया कि वह इस नियम को लाने के लिए राज्य सरकार के आभारी हैं। गढ़वी के मुताबिक, यह मुद्दा असल में उनकी पार्टी के विधायक हेमंत खावा ने उठाया था। गढ़वी ने बताया कि उन्हें और खावा को समाज के विभिन्न वर्गों से इस संबंध में कई ज्ञापन (representations) मिले थे।

गढ़वी ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे कई मामले सामने आते हैं, जहां लड़के शादी के कुछ महीनों के भीतर ही लड़कियों को धोखा दे देते हैं। उनका मानना है कि 18 साल की उम्र पार कर चुकी एक युवा लड़की से भी फैसले लेने में गलती हो सकती है। जब उनसे यह सवाल किया गया कि क्या यह नियम संविधान के खिलाफ नहीं है? तो उन्होंने जवाब दिया, “यह तो कानून तय करेगा, लेकिन समाज की रक्षा करना हमारा प्राथमिक कर्तव्य है।”

वहीं, कांग्रेस सांसद गेनीबेन ठाकोर ने भी इस प्रस्तावित संशोधन को ‘समय की मांग’ बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला समाज की भावनाओं को ध्यान में रखकर लिया गया है। ठाकोर ने इस बात पर जोर दिया कि समाज में कुछ ऐसे तत्व मौजूद हैं जो किसी न किसी तरह लड़कियों को प्रेम विवाह के लिए फुसला लेते हैं, जिसके परिणाम अक्सर दर्दनाक होते हैं।

कांग्रेस सांसद ने बताया कि ग्रामीण स्तर से विवाह पंजीकरण में माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने की लगातार मांग उठ रही थी। उन्होंने साफ किया कि वह खुद प्रेम विवाह (लव मैरिज) के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन इस पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता होना बहुत जरूरी था।

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