अहमदाबाद: गुजरात में एक बार फिर दूल्हे के घोड़ी चढ़ने को लेकर जातिगत विवाद सामने आया है। लेकिन इस बार का मामला थोड़ा अलग और हैरान करने वाला है। यह टकराव किसी पारंपरिक सवर्ण और दलित के बीच नहीं, बल्कि दो अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) समुदायों के बीच हुआ है।
पुलिस के मुताबिक, पाटन जिले में 21 वर्षीय दूल्हे को उसकी बारात के दौरान कथित तौर पर घोड़ी से घसीट कर नीचे उतार लिया गया और उसके साथ मारपीट की गई। पीड़ित दूल्हा पाटनी (देवीपूजक) समुदाय से ताल्लुक रखता है, जबकि हमलावर ठाकोर समुदाय के बताए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना इस कड़वे सच को उजागर करती है कि सामाजिक श्रेष्ठता का अहंकार अब केवल सवर्णों तक सीमित नहीं है। यह उन समुदायों के बीच भी हिंसक रूप ले रहा है, जिन्हें संवैधानिक रूप से एक ही श्रेणी (ओबीसी) में रखा गया है।
एफआईआर में दर्ज जानकारी के अनुसार, दूल्हे कौशिक पाटनी ने पहले पाटन शहर में अपनी शादी की एक बारात निकाली थी। इसके बाद वह अपने पैतृक गांव हाजीपुर लौट आया, जहां स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार एक और बारात निकाली जा रही थी।
परिवार वालों ने बताया कि गांव के एक मंदिर के पास दूल्हा परंपरा के तहत घोड़ी से नीचे उतरा था और बारात ठाकोर मोहल्ले से गुजरी। इसके बाद जब बारात सुरक्षित रूप से पाटनी मोहल्ले में पहुंची, तो कौशिक अपनी शादी का जश्न मनाने के लिए दोबारा घोड़ी पर बैठ गया।
पुलिस ने बताया कि यह पूरा विवाद रात करीब 9.30 बजे शुरू हुआ। आरोप है कि रामूजी ठाकोर नाम का व्यक्ति अचानक बारात में घुस आया और उसने दूल्हे को उसके सूट से पकड़कर घोड़ी से नीचे खींच लिया। इस दौरान रामूजी ने दूल्हे के कपड़े भी फाड़ दिए। जब दूल्हे के चाचा प्रकाश पाटनी बीच-बचाव करने आए, तो संजयजी ठाकोर और मेहुलजी ठाकोर ने उनके साथ भी बुरी तरह मारपीट की।
मारपीट बढ़ते देख परिवार की महिलाएं भी बचाव के लिए आगे आईं। लेकिन हमलावरों ने नीता पाटनी और दूल्हे की मां कामू पाटनी को भी नहीं बख्शा और उन पर भी हमला कर दिया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि राहुलजी ठाकोर और कौशिकजी ठाकोर भी इस हमले में शामिल हो गए। इन लोगों ने पाटनी समुदाय के खिलाफ जातिसूचक गालियों का इस्तेमाल किया और अपने इलाके से बारात निकालने पर कड़ी आपत्ति जताई।
हमलावरों ने परिवार को खुलेआम धमकी दी कि अगर उनके समुदाय का कोई भी व्यक्ति भविष्य में दोबारा घोड़ी पर बैठा, तो इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस पूरी हाथापाई के दौरान दूल्हे की एक सोने की चेन भी गायब हो गई। पाटन पुलिस ने शिकायत के आधार पर मारपीट, आपराधिक धमकी, दंगा करने और जातिसूचक अपशब्द कहने की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
इस घटना पर मानवाधिकार कार्यकर्ता कौशिक परमार ने गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि पाटन की यह घटना दो ओबीसी समुदायों के बीच की है, जो यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि सामाजिक दर्जे और वर्चस्व का अहंकार सिर्फ पारंपरिक सवर्ण-दलित विभाजन तक ही सीमित नहीं रह गया है। संवैधानिक समानता के बावजूद ये अनौपचारिक सामाजिक पदानुक्रम समाज में आज भी गहराई तक मौजूद हैं।
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