फटाफट नूडल्स के इस दौर में लोगों को फटाफट न्याय की भी उम्मीद : सीजेआई एनवी रमण

| Updated: April 23, 2022 7:24 pm

हम तीन घंटे लंबी फिल्मों की तुलना में कम अवधि के मनोरंजन को प्राथमिकता देने लगे हैं। फिल्टर कॉफी से हम इंस्टेंट कॉफी पर चले आए हैं। इंस्टेंट नूडल्स के इस युग में, लोग अब तत्काल न्याय की भी उम्मीद करते हैं। लेकिन लोगों को यह एहसास नहीं है कि अगर हम फटाफट न्याय के लिए जोर देते हैं, तो वास्तविक न्याय को ठेस लग सकती है।" सीजेआई मद्रास हाई कोर्ट के प्रशासनिक ब्लॉक के शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे।

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) एनवी रमण ने शनिवार को कहा कि लोग आज तत्काल न्याय की उम्मीद करते हैं। लेकिन फटाफट न्याय की तलाश में वास्तविक न्याय को ठेस लग सकती है। उन्होंने कहा, न्यायाधीशों को अपने विचारों और धारणा को तेज करना होगा, अपने ज्ञान का विस्तार करना होगा। साथ ही, प्रौद्योगिकी को भी सक्षम बनाना होगा।
उन्होंने कहा, “टेस्ट मैच से हम 20-20 प्रारूप में चले गए हैं।

इंस्टेंट नूडल्स के इस युग में, लोग अब तत्काल न्याय की भी उम्मीद करते हैं।

हम तीन घंटे लंबी फिल्मों की तुलना में कम अवधि के मनोरंजन को प्राथमिकता देने लगे हैं। फिल्टर कॉफी से हम इंस्टेंट कॉफी पर चले आए हैं। इंस्टेंट नूडल्स के इस युग में, लोग अब तत्काल न्याय की भी उम्मीद करते हैं। लेकिन लोगों को यह एहसास नहीं है कि अगर हम फटाफट न्याय के लिए जोर देते हैं, तो वास्तविक न्याय को ठेस लग सकती है।”
सीजेआई मद्रास हाई कोर्ट के प्रशासनिक ब्लॉक के शिलान्यास समारोह में बोल रहे थे।

इसी दौरान उन्होंने नमक्कल और विल्लुपुरम जिलों में स्थित अदालत भवनों का उद्घाटन भी किया।
उन्होंने कहा कि लोग संकट के समय न्यायपालिका की ओर देखते हैं। इसलिए कि वे दृढ़ता से मानते हैं कि अदालतों द्वारा उनके अधिकारों की रक्षा की जाएगी।
सीजेआई ने कहा, “यह विचार करना महत्वपूर्ण है कि न्यायपालिका के कामकाज में सुधार कैसे किया जाए और न्याय की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों तक कैसे पहुंचा जाए।”

वह न्यायपालिका के भारतीयकरण के समर्थक हैं


इस संबंध में उन्होंने दोहराया कि वह न्यायपालिका के भारतीयकरण के समर्थक हैं। उन्होंने कहा, “यह एक बहुआयामी अवधारणा है। यह समावेशिता, कार्यवाही में भाग लेने के लिए लोगों तक पहुंच प्रदान करने, भाषा की बाधा को हटाने, व्यवहार में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास, रिक्तियों को भरने, न्यायपालिका की ताकत बढ़ाने आदि की मांग करता है।”
उन्होंने अदालत के बुनियादी ढांचे में सुधार के महत्व पर भी प्रकाश डाला। कहा, “बढ़ती अर्थव्यवस्था और जनसंख्या में वृद्धि के साथ बुनियादी ढांचे का विकास मुख्य विचारों में से एक है। जनसंख्या खतरनाक रूप से बढ़ रही है। लेकिन मौजूदा बुनियादी ढांचे और लोगों की अनुमानित न्याय जरूरतों के बीच एक गंभीर अंतर है।”


उन्होंने कहा कि जब से मैंने पद संभाला है, न्यायिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करना मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा किए गए कार्यों की सराहना भी की


उन्होंने इस संबंध में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन द्वारा किए गए कार्यों की सराहना भी की। सीजेआई ने कहा,”तमिलनाडु न्यायिक बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए काम कर रहा है। मैंने तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के प्रयासों की तहे दिल से सराहना की।

यही कारण है कि मैं राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर राष्ट्रीय न्यायिक अवसंरचना प्राधिकरण का समर्थन कर रहा हूं, जो राष्ट्रीय अदालत विकास परियोजना को लागू करेगा। मैंने इस संबंध में भारत सरकार को पहले ही एक प्रस्ताव भेज चुका हूं।”

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