Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

मोदी सरकार ने कहा ,कोविड से जान गंवाने वालों का पारसी तौर तरीके से अंतिम संस्कार संभव नहीं

| Updated: January 17, 2022 10:10 pm

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने कोविड-19 से जान गंवाने वाले पारसियों के अंतिम संस्कार के लिए अपने मौजूदा दिशानिर्देशों को संशोधित करने से इन्कार कर दिया है। पारसी समुदाय ने ऐसे परिजनों का अंतिम संस्कार अपने धर्म के रस्मों के हिसाब से करने के लिए सरकार से इजाजत मांगी थी। बता दें कि हिन्दू और सिख धर्म में जहां शव का दाह-संस्कार किया जाता है, वहीं इस्लाम और ईसाई धर्म के लोग शव को दफनाते हैं, जबकि पारसी धर्म में शवों को आकाश के सुपुर्द किया जाता है। यानी उन्हें ‘टावर ऑफ साइलेंस’ जिसे दखमा भी कहा जाता है, में ले जाकर छोड़ दिया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक हलफनामे में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार, कोविड से जान गंवाने वालों के शवों को या तो दफनाना चाहिए या उनका अग्नि संस्कार करना चाहिए, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। दरअसल गुजरात स्थित सूरत पारसी पंचायत बोर्ड द्वारा पिछले महीने इस याचिका के जवाब में सरकारी दस्तावेज दायर किया गया था, जिसमें समुदाय की परंपराओं के अनुरूप अंतिम संस्कार की अनुमति देने के लिए शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 जनवरी को मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सहायता मांगी थी। तब याचिकाकर्ता के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा पर केंद्र सरकार की चिंताओं को पूरा करने के लिए दिशानिर्देश प्रस्तावित किए थे, जिनसे पारसियों द्वारा ‘टावर ऑफ साइलेंस’ की पवित्रता को बनाए रखा जा सके। नरीमन ने तर्क दिया था कि “अंतिम संस्कार के लिए निर्धारित तौर-तरीकों” के संबंध में केंद्र द्वारा जारी प्रोटोकॉल पारसी समुदाय की चिंताओं को ध्यान में नहीं रखता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन

सोमवार को सुनवाई के दौरान नरीमन ने पीठ को बताया कि याचिका प्रतिकूल नहीं थी। यह भी कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए सुझाव में पारसी समुदाय के नियमों का उल्लेख किया गया है और केंद्र उसी को ध्यान में रखते हुए अंतिम संस्कार की अनुमति देने के लिए फैसला करना चाहिए।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने तब केंद्र की ओर से पेश हुए मेहता को सलाह दी कि वह याचिकाकर्ता के साथ एक उपयुक्त प्रोटोकॉल पर चर्चा करने के लिए बैठक बुलाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस पेचीदा मामले में पारसियों की धार्मिक संवेदनाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच संतुलन बनाए रखना ही इस गंभीर समस्या का समाधान है। इस पर दोनों पक्ष सहमत हो गए। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 21 जनवरी के लिए निर्धारित की है।

बता दें कि केंद्र ने अपने हलफनामे में नरीमन के सुझावों को खारिज कर दिया है। अधिवक्ता रजत नायर द्वारा तैयार किए गए हलफनामे में कहा गया है कि पारसी समुदाय में अंतिम संस्कार समारोह में शव को आकाश के नीचे खुले में रखना शामिल है, जिसमें कोरोनो वायरस के सक्रिय निशान हो सकते हैं। सरकार ने कहा कि कोविड से हुई मौत के बाद शवों का अंतिम संस्कार यानी उन्हें सही तरीके से दफनाना या जलाना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर कोविड संक्रमित रोगियों के शव के पर्यावरण, मांसाहारी जानवरों और पक्षियों के संपर्क में आने की पूरी आशंका बनी रहती है। शव को दफन या दाह किए बिना खुले आसमान के नीचे (बिना ढके) खुला रखना कोविड पॉजेटिव रोगियों के शवों के निपटान का एक स्वीकार्य तरीका नहीं है।

विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के शोध का हवाला देते हुए केंद्र ने कहा कि संदिग्ध और पुष्टि किए गए कोविड रोगियों को वन्यजीवों सहित जानवरों के साथ सीधे संपर्क को कम करने की सलाह दी जाती है। “यह भी देखा गया है कि कई जानवरों की प्रजातियों ने प्रायोगिक संक्रमण के माध्यम से और संक्रमित मनुष्यों के संपर्क में आने पर प्राकृतिक सेटिंग्स में वायरस के प्रति संवेदनशीलता का प्रदर्शन किया है। हालांकि ये संक्रमण वर्तमान कोविड -19 महामारी के चालक नहीं हैं, जो मानव-से-मानव संचरण है। इस बात के भी सबूत हैं कि संक्रमित जानवर संपर्क के माध्यम से प्राकृतिक सेटिंग्स में अन्य जानवरों को वायरस संचारित कर सकते हैं।

Your email address will not be published. Required fields are marked *