कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) और बबेसिओसिस के कारण आठ या उससे अधिक शेरों की मौत की खबरों के बीच, राज्यसभा सांसद और रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के निदेशक (कॉर्पोरेट अफेयर्स) परिमल नाथवानी ने एशियाई शेरों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है।
जाने-माने शेर प्रेमी नाथवानी ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया को पत्र लिखकर इस विषय पर तत्काल ध्यान देने का आग्रह किया है।
अपने पत्र में श्री नाथवानी ने वायरस से प्रभावित शेरों को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपील की है। उन्होंने किसी भी वायरस को आगे फैलने से रोकने के लिए तत्काल और सख्त कदम उठाने का भी आग्रह किया है।
उन्होंने इस घटना को बेहद परेशान करने वाला बताया है। हालांकि, श्री नाथवानी ने गिर राष्ट्रीय उद्यान प्रबंधन और राज्य सरकार के वन विभाग की क्षमताओं पर पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि विभाग संक्रामक वायरस को फैलने से रोकने, बीमार शेरों के इलाज और आगे होने वाली मौतों को नियंत्रित करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहा होगा।
सांसद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि गिर और ग्रेटर गिर क्षेत्रों में एशियाई शेरों की आबादी बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ रहे हैं। CDV और बबेसिओसिस जैसी संक्रामक बीमारियां शेरों की आबादी के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि शुरुआती पहचान और त्वरित कार्रवाई के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी और रिपोर्टिंग सिस्टम को अधिक प्रभावी व मजबूत बनाना बेहद जरूरी है। इसके लिए उन्होंने ट्रैकर्स, बीट गार्ड, राउंड स्टाफ और पशु चिकित्सा टीमों के लिए ‘फील्ड ऑब्जर्वेशन प्रोटोकॉल’ लागू करने की अपील की है।
श्री नाथवानी ने मंत्री को सुझाव दिया कि शेरों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए। फील्ड स्टाफ को शेरों के असामान्य व्यवहार, शारीरिक थकान, सांस लेने में तकलीफ, टिक (पिस्सू) के खतरे या चलने में लड़खड़ाहट जैसी स्थिति की तत्काल रिपोर्ट करनी चाहिए।
सांसद ने अनुरोध किया है कि यदि एक से अधिक शेरों में समान लक्षण दिखते हैं, तो इसे ‘हाई अलर्ट’ की स्थिति माना जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिना किसी देरी के वरिष्ठ अधिकारियों और पशु चिकित्सा रैपिड रिस्पांस टीम को सूचित किया जाना चाहिए।
हर संदिग्ध मामले में तारीख, समय, स्थान, जीपीएस लोकेशन, शेरों की संख्या, उम्र, व्यवहार और तस्वीरों का रिकॉर्ड अनिवार्य रूप से रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीमार या मृत जानवरों को अनधिकृत रूप से छूने से बचना चाहिए और स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग सिस्टम (SOP) का सख्ती से पालन होना चाहिए।
कुत्तों के माध्यम से शेरों के CDV से संक्रमित होने की आशंका को देखते हुए, श्री नाथवानी ने दीर्घकालिक कार्य योजनाओं पर भी जोर दिया है। उन्होंने सड़क के कुत्तों के टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, तेज लैब डायग्नोस्टिक सिस्टम और फील्ड स्टाफ के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है।
अंत में उन्होंने बताया कि बबेसिओसिस जैसी बीमारियां शेरों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करती हैं, जिससे उनके CDV से संक्रमित होने की संभावना अधिक हो जाती है। इसलिए, दोनों बीमारियों के जोखिम का संयुक्त रूप से आकलन किया जाना चाहिए।
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