जीन के नए वर्जन से राजस्थान के बाहर भी बढ़ाई जा सकती है सारंग यानी बस्टर्ड की आबादी

| Updated: November 25, 2022 3:31 pm

वन्यजीव (Wildlife) वैज्ञानिकों ने राजस्थान के बाहर अंतिम जीवित ग्रेट इंडियन वस्टर्ड (great Indian bustards) यानी सारंग की आबादी बढ़ाने वाले जीन (genes) के अनूठे वर्जन की खोज की है। इसकी मदद से इस पक्षी को विलुप्त (extinction) होने से बचाया जा सकता है। इसलिए वैज्ञानिकों बस्टर्ड प्रजनन (breeding) कार्यक्रम में इसे शामिल करने की सिफारिश की है।

बस्टर्ड के आनुवंशिक (genetic) अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने कहा कि अनोखा जीन सीक्वेंस  राजस्थान के जैसलमेर में चल रहे कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रयासों के लिए उपलब्ध जीन पूल को समृद्ध (enrich) करेगा। साथ ही इस संभावना को बढ़ाएगा कि कैद कर रखे गए पक्षी जंगल में छोड़े जाने के बाद अच्छा प्रदर्शन करेंगे।

अध्ययन से पता चला है कि राजस्थान में लगभग 100 से 140 बस्टर्ड में हाई जेनेटिक डायवर्सिटी है, जो अन्य राज्यों में नहीं है। गुजरात में छह से कम बस्टर्ड हैं, जबकि महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में  10 से कम बस्टर्ड हैं। यह जानकारी अध्ययन का नेतृत्व करने वाले देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिक यादवेंद्रदेव झाला ने दी है। उन्होंने बताया, “राजस्थान के बाहर की सारंग की आबादी विलुप्त (extinction) होने के लिए अभिशप्त है।” उन्होंने कहा, “लेकिन उनके पास कुछ जीनों के अनूठे वर्जन हैं, जिन्हें प्रजनन कार्यक्रम में शामिल कर बस्टर्ड को बचाया जा सकता है।”

कंजर्वेशन ब्रीडिंग प्रोग्राम लगभग पांच साल पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय, डब्ल्यूआईआई और राजस्थान वन विभाग द्वारा हाउबारा (Houbara) संरक्षण के लिए अंतर्राष्ट्रीय फंड से तकनीकी सहायता के साथ शुरू किया गया था। इसमें जंगली बस्टर्ड के अंडे जुटाना और कैद कर रखे पक्षियों को पालना शामिल है।

बता दें कि सारंग यानी बस्टर्ड उड़ने वाले पक्षियों में सबसे भारी होता है। बस्टर्ड विशेषज्ञ और डब्ल्यूआईआई टीम के सदस्य सुतीर्थ दत्ता ने कहा, “राजस्थान में पाए जाने वाले बस्टर्ड देश में बस्टर्ड आबादी की पूर्ण अनुवांशिक विविधता का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।” अन्य राज्यों की आबादी में अतिरिक्त अनुवांशिक लक्षण हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि बस्टर्ड आबादी के प्राकृतिक रूप से बढ़ने की संभावना नहीं है। गुजरात में अनुमानित छह से कम पक्षियों में से कोई भी प्रजनन करने वाला नर (breeding male) नहीं है।

दत्ता ने कहा, “संरक्षण प्रयासों में अनोखे जीनों को शामिल करने का प्रस्ताव इनकी आबादी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक हो सकता है।”

वैज्ञानिकों ने एक विकल्प सुझाया है कि दूसरे राज्यों से कुछ मादा बस्टर्ड को इस उम्मीद में राजस्थान में लाया जाए कि वे ब्रीडिंग करेंगी। हालांकि ऐसा करना काफी चुनौतीपूर्ण होगा।

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