अमेरिका में हुए हालिया मध्यावधि चुनाव में भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने सफलता का एक नया मुकाम हासिल किया है। गुरुवार दोपहर तक आए चुनाव परिणामों के अनुसार, सात भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों ने अपनी-अपनी सीटों पर जीत दर्ज की है। इस ऐतिहासिक कामयाबी में सबसे ज्यादा चर्चा दो दूसरी पीढ़ी के गुजराती अमेरिकियों की हो रही है।
कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार अमी बेरा और एरिजोना से डेमोक्रेट अमिश शाह ने इन चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया है। इन दोनों नेताओं के बीच सिर्फ गुजराती विरासत ही समान नहीं है, बल्कि पेशे से दोनों ही डॉक्टर भी हैं। इन जीतों के साथ ही अमेरिका की राजनीति में भारतीय मूल के लोगों का प्रभाव और भी मजबूत हो गया है।
अमी बेरा, जिनका मूल नाम अमरीश है, ने कैलिफोर्निया के छठे कांग्रेस डिस्ट्रिक्ट से बुधवार को अपनी जीत पक्की की। वहीं, स्थानीय समय के अनुसार गुरुवार तड़के एरिजोना के पहले कांग्रेस डिस्ट्रिक्ट से अमिश शाह को विजेता घोषित किया गया। अमेरिकी राजनीति पर नजर रखने वाले भारतीय समुदाय के विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों परिणामों का अपना एक अलग ऐतिहासिक रिकॉर्ड है।
इस जीत के साथ अमी बेरा भारतीय मूल के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले अमेरिकी कांग्रेसी (सांसद) बन गए हैं। दूसरी तरफ, अमिश शाह एरिजोना से कांग्रेस के लिए चुने जाने वाले भारतीय मूल के पहले व्यक्ति बन गए हैं। अमी बेरा की जड़ें गुजरात के राजकोट से जुड़ी हैं। उनके पिता अमेरिका चले गए थे और बाद में उनकी मां भी वहीं बस गईं। बेरा का जन्म लॉस एंजिल्स में हुआ और उनका पालन-पोषण ऑरेंज काउंटी में हुआ।
राजनीति में आने से पहले बेरा ने चिकित्सा के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और वह सैक्रामेंटो काउंटी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में भी काम कर चुके हैं। इस मध्यावधि चुनाव में उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को 57 प्रतिशत वोटों के साथ हराया। बेरा के चुनाव प्रचार के मुख्य मुद्दों में स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और सामाजिक सुरक्षा शामिल थे।
अमिश शाह की बात करें तो उनके माता-पिता 1960 के दशक में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए भारत से अमेरिका गए थे। शिकागो में जन्मे और पले-बढ़े शाह एक आपातकालीन चिकित्सा विशेषज्ञ (इमरजेंसी मेडिसिन स्पेशलिस्ट) हैं। उन्हें एरिजोना वेजिटेरियन फूड फेस्टिवल के संस्थापक के रूप में भी जाना जाता है। भाषाओं के मामले में वे खुद को धाराप्रवाह गुजराती और संवादी (कन्वर्सेशनल) स्पेनिश बोलने वाला बताते हैं।
शाह का चुनाव बेहद दिलचस्प रहा क्योंकि उनका मुकाबला पूर्व एनएफएल खिलाड़ी थॉमस फीली से था। शाह ने 52 प्रतिशत वोट हासिल कर जीत दर्ज की और एरिजोना में भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार के तौर पर एक नया इतिहास रच दिया। उनके प्रचार में मुख्य रूप से किफायती जीवनशैली, सामाजिक सुरक्षा, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे अहम मुद्दे शामिल थे।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (FIA), यूएसए के बोर्ड अध्यक्ष अंकुर वैद्य का कहना है कि ये नतीजे सिर्फ दो सीटों की जीत से कहीं आगे के मायने रखते हैं। उन्होंने कहा कि अतीत में भी राज्य और शहर के स्तर पर ऐसे प्रतिनिधि रहे हैं जिनकी जड़ें गुजरात से जुड़ी थीं।
वैद्य ने आगे बताया कि पहले समुदाय केवल राजनीतिक दलों का समर्थन करता था और चंदा जुटाता था, लेकिन अब खुद उम्मीदवारों का चुनाव लड़ना और जीतना एक नया व सकारात्मक बदलाव है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बढ़ते प्रतिनिधित्व से भारतीय समुदाय को प्रभावित करने वाले अहम मुद्दों को सर्वोच्च राजनीतिक स्तर तक पहुंचाने में काफी मदद मिलेगी।
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