नई दिल्ली: नई दिल्ली स्थित पब्लिक पॉलिसी थिंक टैंक ‘चिंतन रिसर्च फाउंडेशन’ (CRF) द्वारा आयोजित ‘सशक्त नारी, विकसित भारत’ सम्मेलन में अडानी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदानी ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को विकसित भारत 2047 के विजन के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने आह्वान किया कि महिलाओं को भारत की विकास यात्रा के ‘केंद्रीय वास्तुकार’ के रूप में पहचाना जाना चाहिए।
नीतिगत गति और जमीनी हकीकत
सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी का स्वागत करते हुए डॉ. अडानी ने महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में बढ़ती नीतिगत गति की सराहना की।
उन्होंने जोर देकर कहा कि अब समय केवल इरादों तक सीमित रहने का नहीं, बल्कि महिलाओं की निरंतर आर्थिक भागीदारी सुनिश्चित करने का है। उन्होंने कहा कि सशक्तिकरण का अर्थ दान नहीं, बल्कि कौशल, वित्त, बाजार और नेतृत्व के अवसरों तक पहुंच बढ़ाना है।
कृषि और डेयरी क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव
डॉ. अडानी ने अडानी फाउंडेशन द्वारा कृषि और डेयरी क्षेत्र में किए गए कार्यों के आंकड़े साझा किए:
डिजिटल कृषि: ग्रामीण क्षेत्रों की महिला किसानों को मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से सिंचाई, उर्वरक उपयोग, बीज चयन और मंडी भाव की सटीक जानकारी दी जा रही है, जिससे उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि हुई है।
डेयरी सहकारी समितियां: स्वयं सहायता समूहों (SHG) द्वारा संचालित दूध संग्रह केंद्रों से अब 3,500 से अधिक महिलाएं जुड़ी हैं। ये महिलाएं सामूहिक रूप से सालाना 75 लाख लीटर से अधिक दूध का प्रबंधन कर रही हैं, जिससे उनकी सौदेबाजी की शक्ति और आय में स्थिरता आई है।

स्वास्थ्य और उद्यमिता के बढ़ते कदम
फाउंडेशन की अन्य प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए डॉ. अडानी ने बताया कि, इस स्वास्थ्य पहल के माध्यम से प्रशिक्षित स्थानीय स्वयंसेवकों ने प्रजनन आयु वर्ग की 3.25 लाख से अधिक महिलाओं के स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में मदद की है।
इस कार्यक्रम के तहत 300 उद्यम स्वयं सहायता समूहों की 4,500 से अधिक महिलाओं को स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है।
भविष्य की राह और नीतिगत तालमेल
डॉ. अडानी ने हालिया केंद्रीय बजट की ‘सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर्स’ (Self-Help Entrepreneurs) पहल की सराहना करते हुए इसे महिलाओं को सूक्ष्म-ऋण से उद्यमिता की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने इसे फाउंडेशन के ‘सपोर्टिंग हर एक्सपोनेंशियल एम्पावरमेंट’ (SHE) ढांचे के अनुरूप बताया।
अपने संबोधन के समापन पर उन्होंने संस्थानों से संरचनात्मक बाधाओं को दूर करने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत के विकास का अगला चरण कक्षाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और डिजिटल बाजारों में उन महिलाओं द्वारा आकार लेगा जो आत्मविश्वास से भरी होंगी। उनके समापन शब्द थे: “उसे करने दें, और वह कर दिखाएगी” (Let her. And she will)।
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