अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने रविवार को नवरंगपुरा इलाके के एक रिहायशी फ्लैट में छापा मारकर विदेशी जानवरों और पक्षियों की अवैध ब्रीडिंग तथा बिक्री के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस छापेमारी के दौरान पुलिस ने एक छोटे से घर के अंदर तंग पिंजरों में कैद कई दुर्लभ और कीमती प्रजाति के जीवों को रेस्क्यू किया।
मामले के मुख्य आरोपी की पहचान 41 वर्षीय मनिगनंदन के नादर के रूप में हुई है। आरोप है कि उसने अपने फ्लैट के महज 10×12 फीट के एक कमरे को पिछले छह-सात महीनों से एक अस्थाई ब्रीडिंग यूनिट (प्रजनन केंद्र) में तब्दील कर दिया था।
रेव पार्टी और सांप के जहर से जुड़ा था पहला सुराग
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई एक गुप्त सूचना के आधार पर की गई थी। पुलिस को शुरुआत में यह इनपुट मिला था कि आरोपी रेव पार्टियों के लिए सांप का जहर सप्लाई करता है। इसी लीड की पड़ताल करते हुए जब टीम ने फ्लैट की तलाशी ली, तो वहां विदेशी पालतू जानवरों की बड़े पैमाने पर ब्रीडिंग और खरीद-फरोख्त का यह अवैध कारोबार सामने आया।
छापेमारी में बरामद हुए दुर्लभ जानवर और पक्षी
मौके से पुलिस ने जिन जीवों को सुरक्षित निकाला है, उनकी सूची काफी लंबी और हैरान करने वाली है. जिसमें, एक दुर्लभ रेड-हैंडेड टैमरिन (बंदर की प्रजाति) का बच्चा, 7 पर्शियन बिल्लियां व उनके बच्चे, 14 हैम्स्टर, 15 मिनी लोप खरगोश और 9 नेदरलैंड ड्वार्फ खरगोश शामिल हैं।
वहीं विदेशी पक्षियों में, 6 अफ्रीकी ग्रे तोते, 5 ब्लू एंड गोल्ड मैकाओ, 3 इलेक्टस तोते, 4 सन कॉन्योर, 2 गाला काकाटू और एक सल्फर-क्रेस्टेड काकाटू। इनके अलावा भारी संख्या में लवबर्ड्स, कॉकटेल, बजरीगर और फिंच भी बरामद किए गए।
लाखों में होती थी सौदेबाजी, बीमारियों का था बड़ा खतरा
जांच में पता चला है कि आरोपी इन जानवरों की नस्ल के आधार पर इन्हें 50,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक में बेचता था। इसके मुख्य ग्राहक अहमदाबाद और गांधीनगर के आसपास फार्महाउस रखने वाले रईस लोग थे।
पुलिस का कहना है कि ‘परिवेश’ (PARIVESH) पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेज बेहद अधूरे और संदिग्ध लग रहे हैं। क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चिंता जताते हुए कहा, “बिना किसी ‘बायोसिक्योरिटी’ (जैविक सुरक्षा) उपायों के एक भीड़भाड़ वाले रिहायशी इलाके में इतनी बड़ी संख्या में जंगली और विदेशी जीवों को रखना ‘जूनोटिक’ बीमारियों (जानवरों से इंसानों में फैलने वाली बीमारी) के गंभीर खतरे को न्योता देना है।”
इस मामले में वन विभाग को आधिकारिक तौर पर शिकायतकर्ता बनाया गया है। साथ ही, संभावित अवैध निर्यात की जांच के लिए क्राइम ब्रांच ने कस्टम (सीमा शुल्क) विभाग को भी पत्र लिखा है।
फर्जी परमिट का दावा और कस्टम कनेक्शन
क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, कुछ समय पहले जब इमारत में विदेशी जानवरों के होने पर एक पड़ोसी ने आपत्ति जताई थी, तो आरोपी ने खुद को बचाने के लिए गांधीनगर के एक वन अधिकारी द्वारा जारी ‘अस्थायी परमिट’ होने का दावा किया था।
हालांकि, पुलिस की रेड में कमर्शियल ब्रीडिंग, नियमित स्वास्थ्य प्रमाणपत्र या जानवरों को रखने के लिए जरूरी वैज्ञानिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी कोई वैध परमिशन नहीं मिली।
नियमों के मुताबिक, विदेशी प्रजातियों के मालिकों को इन जीवों की जानकारी देनी होती है, उनके स्वास्थ्य का रिकॉर्ड रखना होता है और सुरक्षा मानदंडों का सख्ती से पालन करना होता है। एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि मौके पर नियमित पशु चिकित्सा जांच या क्वारंटीन सिस्टम का कोई सबूत नहीं मिला।
अंतरराष्ट्रीय तस्करी का शक
पुलिस अब चेन्नई में कस्टम अधिकारियों के साथ आरोपी के कथित संपर्कों की भी गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों को शक है कि कुछ जानवरों को अवैध रूप से देश के बाहर भेजा गया हो या बिना कस्टम डिक्लेरेशन के भारत लाया गया हो। आयात-निर्यात के पूरे ट्रेल और इसमें किसी विभागीय मिलीभगत की जांच के लिए कस्टम विभाग को लिखा गया है।
फिलहाल पुलिस आरोपी के पारिवारिक बैकग्राउंड की भी जांच कर रही है, क्योंकि शुरुआती पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह अवैध व्यवसाय उसे अपने पिता से विरासत में मिला था। अब अहमदाबाद नगर निगम (AMC), वन विभाग और कस्टम विभाग मिलकर दस्तावेजों, आयात की वैधता और स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य को पैदा हुए संभावित खतरों की एक विस्तृत और संयुक्त जांच करेंगे।
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