अहमदाबाद: कुरुक्षेत्र में आयोजित हो रहे ‘वेस्ट जोन इंटर-यूनिवर्सिटी रेसलिंग टूर्नामेंट’ में हिस्सा लेने गई महिला टीम के प्रबंधन को लेकर गुजरात यूनिवर्सिटी (GU) विवादों में घिर गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन पर इस मामले में गंभीर लापरवाही बरतने के आरोप लग रहे हैं।
दरअसल, 17 से 20 मार्च के बीच होने वाले इस टूर्नामेंट के लिए यूनिवर्सिटी ने टीम के साथ कथित तौर पर एक चपरासी को भेज दिया है। छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे पूरी तरह से नियमों के खिलाफ बताया है।
संगठन का तर्क है कि राष्ट्रीय स्तर की ऐसी खेल प्रतियोगिताओं के लिए विश्वविद्यालय के नियमों के तहत, केवल एक योग्य शारीरिक शिक्षा (फिजिकल एजुकेशन) प्रोफेसर को ही टीम के साथ जाना चाहिए।
एनएसयूआई के प्रवक्ता सुभान सैयद ने इस संबंध में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा है। सैयद ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि अनुबंध या अस्थायी आधार पर काम करने वाले एक चपरासी को यह जिम्मेदारी सौंपना प्रबंधन की घोर लापरवाही का सीधा उदाहरण है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के प्रशासनिक फैसले संस्थान के पेशेवर मानकों को कमजोर करते हैं। नियमों के मुताबिक, टीम के कोच और मैनेजर की भूमिका केवल एक शारीरिक शिक्षा प्रोफेसर ही निभा सकता है। लेकिन यूनिवर्सिटी अयोग्य लोगों को भेजकर लगातार इन नियमों की अनदेखी कर रही है।
छात्र-खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ने वाले जोखिमों का जिक्र करते हुए सैयद ने बताया कि खेल के दौरान अक्सर तकनीकी चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे वक्त में तुरंत और सही फैसला लेना कोच और मैनेजर का काम होता है। योग्य मार्गदर्शन के अभाव में इसका सीधा खामियाजा खिलाड़ियों को भुगतना पड़ता है।
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि अयोग्य कर्मचारियों को इस तरह की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से शारीरिक शिक्षा क्षेत्र और गुजरात यूनिवर्सिटी, दोनों की ही गरिमा को ठेस पहुंच रही है।
इस पूरे मामले पर एक वरिष्ठ प्रोफेसर ने भी अपनी राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार टीम के साथ हमेशा एक प्रोफेसर को ही जाना चाहिए। यदि किसी कारण से संबंधित प्रोफेसर उपलब्ध नहीं हैं, तो उनकी जगह अगले सबसे वरिष्ठ प्रोफेसर को टीम के साथ भेजा जाना चाहिए।
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