अगर आप अमेरिका की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक ज़रूरी खबर है। विभाग के ‘ग्लोबल वीज़ा वेट टाइम्स’ के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारतीय यात्रियों को विज़िटर वीज़ा के लिए लंबा और असमान इंतज़ार करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हैं कि कुछ शहरों में तो वीज़ा की कतार नौ महीने तक लंबी हो गई है।
इस मामले में सबसे अधिक देरी मुंबई में देखने को मिल रही है। यहाँ B1/B2 वीज़ा इंटरव्यू के लिए औसत प्रतीक्षा समय और अगला उपलब्ध स्लॉट दोनों ही नौ महीने की दूरी पर हैं। वहीं, नई दिल्ली में आवेदन करने वालों के लिए स्थिति थोड़ी बेहतर है, लेकिन यहाँ भी अगली अपॉइंटमेंट के लिए सात महीने का लंबा इंतज़ार करना होगा।
अन्य प्रमुख शहरों के आंकड़ों पर नज़र डालें तो, हैदराबाद में औसत प्रतीक्षा समय साढ़े छह महीने है, जबकि अगली अपॉइंटमेंट आठ महीने बाद की मिल रही है। कोलकाता में वीज़ा का अगला स्लॉट साढ़े छह महीने बाद उपलब्ध है। इसके विपरीत, चेन्नई के आवेदकों को थोड़ी राहत है क्योंकि वहाँ प्रतीक्षा समय अपेक्षाकृत कम, यानी लगभग तीन महीने है।
शहरों के बीच इस बड़े अंतर को देखते हुए एक अहम बात सामने आती है। आवेदक चाहें तो अपनी सुविधानुसार किसी अन्य वाणिज्य दूतावास (Consulate) का विकल्प चुनकर पहले की इंटरव्यू डेट हासिल कर सकते हैं। हालांकि, यह पूरी तरह से उस शहर में स्लॉट की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
विज़िटर वीज़ा के भारी इंतज़ार के उलट, छात्र वीज़ा (F, M और J श्रेणियों) की प्रक्रिया काफी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। नई दिल्ली में इसके लिए आधे महीने से भी कम समय में स्लॉट उपलब्ध है। मुंबई में छात्रों के लिए दो महीने और हैदराबाद में लगभग ढाई महीने का वेटिंग पीरियड चल रहा है।
काम के सिलसिले में अमेरिका जाने वालों (H, L, O, P और Q वीज़ा श्रेणियों) के लिए भी इंतज़ार का समय कम है। नई दिल्ली और मुंबई में इसके लिए लगभग एक महीने में अपॉइंटमेंट मिल रही है।
हैदराबाद में यह समय तीन महीने और कोलकाता में डेढ़ महीने है। वहीं, क्रू और ट्रांजिट वीज़ा की प्रक्रिया सबसे तेज़ है, जिनके लिए ज़्यादातर शहरों में एक महीने या उससे भी कम समय में अपॉइंटमेंट मिल जा रही है।
अमेरिकी विदेश विभाग (Department of State) ने स्पष्ट किया है कि ये समय-सीमाएं केवल सांकेतिक हैं और पिछले महीने के आंकड़ों पर आधारित हैं। दूतावास और वाणिज्य दूतावास लगातार नए अपॉइंटमेंट स्लॉट जारी करते रहते हैं। यदि पहले की तारीखें उपलब्ध होती हैं, तो आवेदक अपने इंटरव्यू को आसानी से रीशेड्यूल कर सकते हैं।
विभाग का स्पष्ट रूप से कहना है कि उनके द्वारा बताया गया औसत प्रतीक्षा समय इस बात की गारंटी नहीं देता कि किसी आवेदक को उस विशिष्ट समय के भीतर अपॉइंटमेंट मिल ही जाएगी।
ये ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि छात्र और रोज़गार वीज़ा में तेज़ी के बावजूद, भारतीय शहरों में विज़िटर वीज़ा की मांग लगातार और मजबूती से बनी हुई है। आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे ताज़ा अपडेट्स के लिए नियमित रूप से आधिकारिक बुकिंग सिस्टम को चेक करते रहें।
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