गुजरात के एक उभरते हुए डीप-टेक स्टार्टअप ‘इनसाइडएफपीवी’ (InsideFPV) ने भारत के रक्षा निर्माण क्षेत्र में अपनी एक मजबूत पहचान बना ली है। इस कंपनी ने रक्षा मंत्रालय के 10 करोड़ रुपये के आपातकालीन खरीद अनुबंध के तहत भारतीय सेना को सैकड़ों ‘कामिकाजे’ (लॉइटरिंग म्यूनिशन) ड्रोन सफलतापूर्वक सौंपे हैं।
सूरत स्थित इस कंपनी की शुरुआत साल 2020 में हुई थी। इसके नेतृत्व की कमान सीईओ अर्थ चौधरी और उनके सह-संस्थापक देव्यांत भारद्वाज और ओशी कुमारी के हाथों में है।
इस स्टार्टअप का जन्म देश के सामने बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच हुआ। इसके संस्थापकों ने महसूस किया कि भारत के पास भरोसेमंद और स्वदेशी युद्ध-तैयार ड्रोन प्रणालियों की भारी कमी है, जिसे पूरा करना बेहद जरूरी है।
शुरुआत में इस कंपनी का पूरा ध्यान फर्स्ट पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन पर था, जो मुख्य रूप से रेसिंग और शौकिया तौर पर इस्तेमाल किए जाते थे। लेकिन जल्द ही ‘इनसाइडएफपीवी’ ने रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को समझते हुए अपना रुख बदल लिया।
कंपनी ने ऐसी मानव रहित हवाई प्रणालियां विकसित करने में महारत हासिल की जो बिना जीपीएस वाले वातावरण में भी सटीक काम कर सकती हैं। आधुनिक युद्ध में जहां सिग्नल जैमिंग और इलेक्ट्रॉनिक बाधाएं आम हैं, वहां यह तकनीक सेना के लिए बेहद अहम है।
समय के साथ कंपनी ने सिर्फ प्रोटोटाइप बनाने से आगे बढ़कर पूरी तरह से एकीकृत ड्रोन सिस्टम का विकास किया। आज इनके पोर्टफोलियो में सटीक हमले करने वाले कामिकाजे ड्रोन के साथ-साथ निगरानी और सामरिक यूएवी प्लेटफॉर्म भी मौजूद हैं।
इन ड्रोन्स को बेहद मुश्किल हालात में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों और माइनस 35 डिग्री सेल्सियस (-35°C) जैसे जमा देने वाले तापमान में भी बेहतरीन प्रदर्शन कर सकते हैं।
कंपनी के अनुसार, सेना को दिए गए इन ड्रोन्स में कई अत्याधुनिक खूबियां हैं। इनमें वेपॉइंट-आधारित ऑटोनॉमस नेविगेशन, रियल-टाइम एफपीवी कंट्रोल, कई परतों वाली सुरक्षा प्रणाली और नियंत्रित विस्फोट तंत्र (कंट्रोल्ड डिटोनेशन ट्रिगर्स) शामिल हैं। ये सभी खूबियां इन ड्रोन्स को लक्षित लड़ाकू अभियानों के लिए एकदम उपयुक्त बनाती हैं।
इस आपातकालीन खरीद अनुबंध पर पिछले साल दिसंबर में हस्ताक्षर किए गए थे। कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता का लोहा मनवाते हुए महज दो महीने की बेहद कम समय-सीमा के भीतर इस ऑर्डर को पूरा कर दिया।
ये आधुनिक ड्रोन सेना की उत्तरी कमान (नॉर्दर्न कमांड) को सौंपे गए हैं। हालांकि, सैन्य अभियानों की संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों से इनकी सटीक संख्या का खुलासा नहीं किया गया है।
इस बड़ी सफलता के बाद ‘इनसाइडएफपीवी’ ने शुरुआती निवेशकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।
कंपनी अपनी रिसर्च एंड डेवलपमेंट और निर्माण क्षमताओं को बड़े पैमाने पर बढ़ाने के लिए घरेलू वेंचर नेटवर्क से फंड भी जुटा रही है। सेना के इतने बड़े ऑर्डर को इतने कम समय में सफलतापूर्वक पूरा करना उनकी उन्नत तकनीक और उत्पादन तैयारियों का सबसे बड़ा प्रमाण माना जा रहा है।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्टार्टअप की सफलता भारत के रक्षा तंत्र में आ रहे एक व्यापक बदलाव का हिस्सा है। सैन्य उपकरणों के स्वदेशीकरण पर बढ़ते जोर के साथ, सरकार अब घरेलू स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को प्राथमिकता दे रही है जो तय समय पर अत्याधुनिक तकनीक देने में सक्षम हैं।
शौकिया एफपीवी ड्रोन की दुनिया से निकलकर एक कॉम्बैट-रेडी सिस्टम सप्लायर बनने तक का ‘इनसाइडएफपीवी’ का सफर भारतीय रक्षा स्टार्टअप्स की एक नई पीढ़ी का शानदार उदाहरण है।
यह स्टार्टअप इस बात का सबूत है कि नए और छोटे उद्यमी भी महत्वपूर्ण सैन्य प्रौद्योगिकियों में भारत के आत्मनिर्भर बनने के अभियान में मजबूती से कदम मिला रहे हैं।
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