साल 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों (कॉमनवेल्थ गेम्स) में अभी चार साल का समय है और 2036 ओलंपिक की मेजबानी भी अभी एक बड़ा सपना है। लेकिन अहमदाबाद देश के प्रमुख खेल गंतव्य के रूप में खुद को स्थापित करने के लिए अभी से कमर कस चुका है। यह शहर अपने बुनियादी ढांचे को विश्व स्तरीय बनाने के लिए किसी चीज का इंतजार नहीं कर रहा है।
नरेंद्र मोदी स्टेडियम पहले ही क्रिकेट के सबसे बड़े और शानदार आयोजन स्थल के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुका है। अब अहमदाबाद और गुजरात सरकार ने अपने लिए काफी बड़े लक्ष्य तय कर लिए हैं।
इस योजना के तहत मौजूदा क्रिकेट स्टेडियम से आगे बढ़ते हुए सरदार वल्लभभाई पटेल (SVP) स्पोर्ट्स एन्क्लेव का विस्तार किया जाना है। इसके अलावा गुजरात पुलिस अकादमी को भी आगामी बड़े बहु-खेल आयोजनों के लिए एक संभावित खेल आयोजन स्थल के रूप में तैयार किया जा रहा है।
शहर के खेल ढांचे के विकास में साबरमती रिवरफ्रंट को मुख्य केंद्र के रूप में देखा जा रहा है। कुल 335 एकड़ में फैले एसवीपी स्पोर्ट्स एन्क्लेव के भीतर कई अत्याधुनिक सुविधाएं जोड़ने का प्रस्ताव है।
इसमें 12,000 दर्शकों की क्षमता वाला एक शानदार एक्वेटिक्स सेंटर और 18,000 की क्षमता वाला मल्टीपर्पज इंडोर एरिना शामिल किया जाएगा। इसके अलावा 24 कोर्ट वाला एक विशाल टेनिस सेंटर भी बनेगा, जिसके मुख्य शो कोर्ट में एक साथ 24,000 दर्शक बैठ सकेंगे।
इस एन्क्लेव के अंदर एक रिवरफ्रंट पार्क, बुलेवार्ड और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस बनाने का भी प्रस्ताव है।
दूसरी ओर, करई स्थित गुजरात पुलिस अकादमी (GPA) में 143 एकड़ का एक विशाल प्रोजेक्ट तैयार किया जाएगा। यहाँ 50,000 दर्शकों की क्षमता वाला एक एथलेटिक्स स्टेडियम बनाया जाना है।
इसके साथ ही इनडोर और आउटडोर रेंज वाला एक आधुनिक शूटिंग सेंटर (4,000 क्षमता) भी तैयार होगा। यहां एक हाई-परफॉर्मेंस सेंटर से लैस मल्टीपर्पज एरिना भी इसी अकादमी का हिस्सा होगा।
दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों बड़ी परियोजनाओं पर काम शुरू होना अभी बाकी है। हालांकि, इनके सितंबर 2028 से 2029 के बीच पूरा हो जाने की उम्मीद है।
अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि यह न तो सरकार के ओलंपिक बजट का हिस्सा है और न ही इन्हें खास तौर पर राष्ट्रमंडल खेलों या किसी अन्य इवेंट के लिए विकसित किया जा रहा है।
भारतीय खेल प्राधिकरण (गुजरात) के वरिष्ठ अधिकारी और वीर सावरकर कॉम्प्लेक्स के प्रशासक भौमिक ओझा ने इस दूरगामी सोच को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह सब अहमदाबाद नगर निगम के शहरी विकास लक्ष्यों के तहत शहर के लिए एक बड़ी योजना का हिस्सा है।
भौमिक ओझा के अनुसार, उनका उद्देश्य भविष्य को ध्यान में रखते हुए शहर के लिए विश्व स्तरीय खेल ढांचा तैयार करना है।
भले ही 2030 के लिए अभी प्रतिस्पर्धी खेलों की सूची या अन्य चीजें अंतिम रूप से तय नहीं हुई हैं, लेकिन इन दोनों परियोजनाओं में राष्ट्रमंडल खेलों के ज्यादातर इवेंट आयोजित होने की उम्मीद है।
इस दौड़ में मौजूदा वीर सावरकर कॉम्प्लेक्स भी शामिल रहेगा। यह वही आयोजन स्थल है जहां पिछले महीने राष्ट्रमंडल खेलों के अधिकारियों ने शहर के खेल ढांचे का जायजा लेने के लिए दौरा किया था।
एसएजी अधिकारियों का दावा है कि दौरा करने वाली टीम यहां की सुविधाओं से काफी प्रभावित थी और उसने अहमदाबाद को अभी से आयोजनों के लिए तैयार बताया। अधिकारियों का मानना है कि अगर मौजूदा सुविधाएं इतनी बेहतरीन हैं, तो भविष्य में बनने वाला ढांचा और भी भव्य ही होगा।
खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने भी शहर में एक दीर्घकालिक खेल विरासत और बुनियादी ढांचा तैयार होने पर अपना पूरा भरोसा जताया है।
मांडविया ने यह बात ‘संडेज ऑन साइकिल’ कार्यक्रम के 75वें संस्करण और राष्ट्रमंडल दिवस के अवसर पर कही। उन्होंने उम्मीद जताई कि कड़ी मेहनत करने वाले एथलीट इन आगामी खेलों में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए शानदार परिणाम देंगे और देश के लिए पदक जीतेंगे।
इन सबके अलावा, सरकार आईआईटी गांधीनगर में दो नए हॉकी टर्फ बिछाने की योजना भी बना रही है। वहीं, ‘विजयी भारत फाउंडेशन’ के खेल विंग के तहत काम करने वाला ‘संस्कार धाम’ भी तीरंदाजी, कुश्ती और फेंसिंग जैसे खेलों की मेजबानी मिलने की उम्मीद कर रहा है।
संस्कार धाम को 2022 के राष्ट्रीय खेलों के दौरान अपने बेहतरीन प्रबंधन के लिए काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली थी।
संस्कार धाम के सीओओ आदित्य अवस्थी ने बताया कि उनका फाउंडेशन 10,000 क्षमता वाले एक हॉस्टल का निर्माण भी कर रहा है। जरूरत पड़ने पर वे इस हॉस्टल को ‘गेम्स विलेज’ (खेल गांव) के रूप में पेश करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
इन तमाम बड़े आयोजनों से पहले, 2029 में होने वाले ‘वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स’ को शहर की तैयारियों और इन विशाल खेल सुविधाओं के लिए एक बेहद अहम परीक्षण माना जा रहा है।
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