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‘विटामिन C’ के नाम पर अमेरिका भेजता था ‘मौत का सामान’, फेंटानाइल ड्रग तस्करी में सूरत का व्यापारी दोषी

| Updated: April 8, 2026 14:14

अमेरिका में 50 पाउंड फेंटानाइल रसायनों की तस्करी के मामले में गुजरात के व्यापारी भावेश लाठिया ने कबूला जुर्म, हो सकती है 40 साल तक की कैद।

अमेरिका में फेंटानाइल ड्रग बनाने वाले रसायनों की तस्करी के मामले में पहली बार किसी भारतीय सप्लायर को दोषी ठहराया गया है। गुजरात के सूरत स्थित रेक्सूटर केमिकल्स (Raxuter Chemicals) के संस्थापक और प्रमोटर 37 वर्षीय भावेश लाठिया ने अमेरिका में 50 पाउंड फेंटानाइल प्रीकर्सर केमिकल की सप्लाई करने का अपना जुर्म कबूल कर लिया है। इस गंभीर अपराध के लिए उन्हें 40 साल तक की जेल हो सकती है।

भावेश लाठिया को फेंटानाइल रसायनों के आयात और वितरण की आपराधिक साजिश रचने के आरोप में 4 जनवरी को न्यूयॉर्क शहर से गिरफ्तार किया गया था। न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट के अमेरिकी अटॉर्नी जोसेफ नोसेला जूनियर के कार्यालय ने बताया कि 3 अप्रैल को अमेरिकी जिला न्यायाधीश पामेला चेन के समक्ष हुई सुनवाई में लाठिया ने अपना दोष स्वीकार कर लिया।

अमेरिकी अटॉर्नी नोसेला और होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (HSI) के न्यूयॉर्क स्थित कार्यवाहक स्पेशल एजेंट इन चार्ज माइकल अल्फोंसो ने इस फैसले की जानकारी दी। नोसेला ने कहा कि आरोपी को अच्छी तरह पता था कि उसके द्वारा भेजे जा रहे रसायनों का इस्तेमाल फेंटानाइल बनाने में होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका कार्यालय इस ड्रग सप्लाई चेन की हर कड़ी को तोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

नोसेला के बयान के अनुसार, फेंटानाइल वर्तमान में अमेरिका के लिए सबसे बड़ा और जानलेवा ड्रग खतरा है। लाठिया की कंपनी जैसी जगहें सीधे तौर पर मैक्सिकन ड्रग तस्करी संगठनों को ये रसायन बेच रही थीं। अमेरिका में 18 से 45 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों की मौत का सबसे प्रमुख कारण फेंटानाइल ही है, और प्रशासन इस जहर को फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रहा है।

इस मामले को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए माइकल अल्फोंसो ने कहा कि इस ड्रग ने अनगिनत परिवारों को तबाह कर दिया है और उनकी एजेंसी तस्करों के नेटवर्क को खत्म करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक, फेंटानाइल हेरोइन से 50 गुना और मॉर्फिन से 100 गुना अधिक शक्तिशाली एक बेहद नशीला सिंथेटिक ओपिओइड है, जिसे अमेरिका में ‘शेड्यूल II’ श्रेणी में रखा गया है।

अदालती दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि लाठिया अमेरिका और मैक्सिको में अंतरराष्ट्रीय डाक और पैकेज कैरियर्स के जरिए रसायनों की खेप भेजता था। सीमाओं पर चेकिंग से बचने और जांच एजेंसियों को चकमा देने के लिए वह पैकेट्स पर गलत लेबल लगाने और कस्टम फॉर्म में फर्जीवाड़ा करने जैसी धोखाधड़ी का सहारा लेता था।

इसका एक स्पष्ट उदाहरण 29 जून 2024 को सामने आया था। रेक्सूटर केमिकल्स द्वारा न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में एक पार्सल भेजा गया था। इस पैकेट पर ‘विटामिन सी’ का झूठा लेबल लगा था, लेकिन असल में इसके अंदर ‘1-boc-4-piperidone’ नामक प्रतिबंधित रसायन था, जो फेंटानाइल बनाने के काम आता है।

इसके बाद 2 और 15 अक्टूबर 2024 को लाठिया ने एक अंडरकवर HSI अधिकारी के साथ वीडियो कॉल पर रसायनों की बिक्री पर चर्चा की। अधिकारी ने लाठिया को यह कहकर झांसा दिया कि मैक्सिको में उनके ग्राहक माल की गुणवत्ता और फाइनल प्रोडक्ट से बहुत खुश हैं। इस बातचीत के बाद लाठिया 20 किलोग्राम ‘1-boc-4-piperidone’ रसायन बेचने के लिए तैयार हो गया।

इस खेप को मैक्सिको भेजने की चर्चा के दौरान लाठिया ने पकड़े जाने से बचने के लिए रसायन को ‘एंटासिड’ (Antacid) के रूप में लेबल करने का सुझाव दिया। अंततः 23 नवंबर 2024 के आसपास, रेक्सूटर केमिकल्स ने एंटासिड के फर्जी लेबल के साथ न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट में 20 किलोग्राम रसायन की डिलीवरी की।

अधिकारियों के मुताबिक, लाठिया द्वारा सप्लाई किए गए इन रसायनों में फेंटानाइल बनाने के लिए जरूरी सभी सामग्री मौजूद थी।

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