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कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक का बड़ा दावा, इंस्टाग्राम अकाउंट हैक होने की जताई आशंका

| Updated: May 23, 2026 13:51

रातों-रात इंटरनेट सेंसेशन बनी 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) को बड़ा झटका, संस्थापक अभिजीत दिपके का दावा— साजिशन हैक किया गया निजी इंस्टाग्राम अकाउंट।

हाल ही में ऑनलाइन तहलका मचाने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने सोशल मीडिया खातों को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया है। उनका कहना है कि उनका निजी इंस्टाग्राम अकाउंट कथित तौर पर हैक कर लिया गया है, जिसके चलते वे अब इसका इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं।

अभिजीत दिपके की यह घोषणा उस समय सामने आई है जब उनकी पार्टी युवाओं के बीच इंटरनेट पर लगातार सुर्खियां बटोर रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनकी मजबूत सोशल मीडिया उपस्थिति को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। इसके अलावा, CJP के बैकअप इंस्टाग्राम खाते को भी कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था।

हालांकि, भारी ऑनलाइन दबाव और तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बीच उसे कुछ घंटों बाद बहाल कर दिया गया।

संस्थापक ने मेटा (Meta) की आधिकारिक रिकवरी प्रक्रिया के जरिए कई बार अपने अकाउंट को वापस पाने की कोशिश की। उनके द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट्स के अनुसार, उनकी हर कोशिश नाकाम साबित हुई। जैसे ही वे ‘इसे अभी रिकवर करें’ (recover it now) विकल्प पर क्लिक करते, प्लेटफॉर्म पर एक स्वचालित संदेश दिखाई देता था कि सुरक्षा कारणों से उनके खाते को लॉक कर दिया गया है।

इस संदेश में आगे स्पष्ट किया गया था कि खाते को वापस पाने के लिए उन्हें अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी और एक नया पासवर्ड बनाना होगा। दिपके का कहना है कि लगातार रिकवरी के प्रयासों के बावजूद स्क्रीन पर वही पुराना जवाब मिलता रहा। इस तकनीकी बाधा ने उन्हें अपने खाते पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने से रोक दिया है।

इस घटनाक्रम से सोशल मीडिया पर चल रहे इस युवा-केंद्रित व्यंग्यात्मक आंदोलन के समर्थकों में गहरी चिंता पैदा हो गई है। दिपके ने एक्स (X) प्लेटफॉर्म पर जानकारी देते हुए लिखा कि CJP का बैकअप इंस्टाग्राम खाता भी बंद कर दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल उनकी टीम के पास अपने किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का एक्सेस मौजूद नहीं है।

उन्होंने अपने समर्थकों और जनता को सचेत करते हुए यह भी कहा कि इसके बाद किए गए किसी भी पोस्ट को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का आधिकारिक बयान या रुख न माना जाए।

एक्स (X) हैंडल का निलंबन और वापसी की कहानी

इससे पहले इसी सप्ताह पार्टी को एक और बड़े झटके का सामना करना पड़ा था, जब भारत में CJP के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल को रोक दिया गया था। मौजूदा विवाद उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि, इस समूह ने हार नहीं मानी और ‘कॉकरोच इज बैक’ नाम से एक नए खाते के साथ प्लेटफॉर्म पर तेजी से वापसी की। इस नए खाते के माध्यम से उन्होंने अपने आलोचकों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने यह संकेत भी दिया कि उनकी लगातार बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर इस आंदोलन की आवाज को दबाने की कोशिशें की जा रही हैं।

पार्टी द्वारा साझा किए गए एक पोस्ट में चुटकी लेते हुए लिखा गया था, “क्या आपको लगा कि आप हमसे छुटकारा पा सकते हैं? लोल।” वहीं, एक अन्य पोस्ट में यह दावा किया गया कि खाते पर यह दंडात्मक कार्रवाई तब की गई जब CJP ने इंस्टाग्राम पर देश के प्रमुख राजनीतिक दलों को पीछे छोड़ दिया।

तेजी से बढ़ती CJP की लोकप्रियता

कुछ ही दिन पहले महज एक इंटरनेट व्यंग्य अभियान के रूप में शुरू हुआ यह कदम अब देश के सबसे तेजी से बढ़ते डिजिटल राजनीतिक आंदोलनों में से एक बन चुका है। इस अभियान ने कम समय में ही युवाओं का ध्यान अपनी ओर मजबूती से खींचा है।

हाल ही के आंकड़ों के अनुसार, CJP ने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स के मामले में सत्ताधारी बीजेपी को पछाड़ दिया है। इसके तुरंत बाद इसने 141 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया। लॉन्च होने के कुछ ही दिनों के भीतर यह इंटरनेट पर सबसे ज्यादा फॉलो किया जाने वाला राजनीतिक संगठन बन गया।

इस अभूतपूर्व वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से जेन ज़ेड (Gen Z) यूजर्स, वायरल मीम्स और आक्रामक ऑनलाइन सक्रियता का हाथ है। इसके साथ ही बेरोजगारी, परीक्षा के पेपर लीक और राजनीतिक जवाबदेही की कमी को लेकर युवाओं में व्याप्त गहरी हताशा ने इस आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी है।

CJP के खिलाफ उठते गंभीर आरोप

इस अनोखे आंदोलन ने ऑनलाइन दुनिया में एक तीव्र राजनीतिक बहस भी छेड़ दी है। सत्तारूढ़ बीजेपी के कई समर्थकों ने इस संगठन को “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा” करार दिया है। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने तो इसमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के तार जुड़े होने और विपक्षी दलों द्वारा गुप्त समर्थन देने का भी गंभीर आरोप लगाया है।

दूसरी तरफ, कई विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और प्रमुख सार्वजनिक हस्तियों ने खुले तौर पर इस आंदोलन के साथ जुड़ने की इच्छा जताई है या इसका पुरजोर समर्थन किया है। इससे इस पूरी परिघटना के इर्द-गिर्द बहस और भी तेज हो गई है। CJP के इस अचानक उभार ने बीजेपी पर होने वाले राजनीतिक हमलों को भी काफी तेज कर दिया है।

कैसे हुई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की शुरुआत?

कॉकरोच जनता पार्टी की स्थापना बोस्टन में रहने वाले अभिजीत दिपके द्वारा की गई थी। वे एक पूर्व सोशल मीडिया अभियान कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए काम किया था।

यह पूरा आंदोलन भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत द्वारा कथित तौर पर की गई कुछ विवादित टिप्पणियों के बाद अस्तित्व में आया। ऑनलाइन मीडिया में यह आरोप लगाया गया था कि उन्होंने बेरोजगार युवाओं और कार्यकर्ताओं की तुलना “कॉकरोच” और “परजीवी” से की थी।

यद्यपि मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्टीकरण दिया कि उनकी टिप्पणियों को पूरी तरह से गलत तरीके से पेश किया गया था, लेकिन इस मुद्दे पर हुई तीखी प्रतिक्रिया ने जल्द ही एक विशाल ऑनलाइन अभियान का रूप ले लिया।

“धर्मनिरपेक्ष, समाजवादी, लोकतांत्रिक, आलसी” के अनोखे नारे के तहत काम करने वाली CJP खुद को “युवाओं का, युवाओं द्वारा, युवाओं के लिए एक राजनीतिक मोर्चा” बताती है।

इसका घोषणापत्र राजनीतिक व्यंग्य के साथ-साथ अत्यंत गंभीर मांगों का एक अनूठा मिश्रण है। इसमें पारदर्शी चुनावी सुधार, अधिक संस्थागत जवाबदेही, महिला आरक्षण और नीट (NEET) विवाद जैसी परीक्षाओं से जुड़ी अनियमितताओं के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग प्रमुखता से शामिल है।

आगे का रास्ता क्या होगा?

भले ही इसके आधिकारिक सोशल मीडिया खातों को बार-बार तरह-तरह के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसके चाहने वालों का आधार लगातार बढ़ता जा रहा है। CJP ने खुद को भारत के डिजिटल राजनीतिक विमर्श के बिल्कुल केंद्र में मजबूती से स्थापित कर लिया है।

यह आंदोलन भविष्य में एक औपचारिक राजनीतिक संगठन के रूप में विकसित होता है या फिर इंटरनेट द्वारा संचालित एक विरोध अभियान ही बना रहता है, यह बात आने वाला समय ही तय करेगा। लेकिन इसके तेजी से हुए उभार और बड़ी टेक कंपनियों के प्लेटफॉर्म्स के साथ चल रहे लगातार टकरावों को देखते हुए, यह तय है कि आने वाले कई दिनों तक यह मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में छाया रहेगा।

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