अहमदाबाद के जुहापुरा स्थित वेजलपुर पुलिस स्टेशन के बाहर पिछले तीन दिनों से 15-20 लोग धरने पर बैठे हैं। वे सभी एक बड़े गुजराती बैनर के आस-पास जमा हैं, जिस पर लिखा है कि बेटे ने पुलिस की बर्बरता का वीडियो बनाया और इसका नतीजा पिता की मौत के रूप में सामने आया।
इस बैनर में जिस ‘पिता’ का जिक्र है, वह 70 वर्षीय जहीरुद्दीन उर्फ डब्बो गयासुद्दीन शेख हैं। पुलिस ने उन्हें गोहत्या के एक मामले में आरोपी बनाया था। बैनर पर उनकी तस्वीर छपी है, जबकि उनका शव करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित एसवीपी अस्पताल के मुर्दाघर में रखा हुआ है।
वेजलपुर पुलिस की हिरासत में बुधवार (20 मई) की सुबह जहीरुद्दीन की मौत हो गई। उनके परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पुलिस ने उनके साथ बेरहमी से मारपीट की और उन्हें कुछ गोलियां खिला दीं, जिससे उनकी जान चली गई।
नाराज परिजनों ने शव लेने से साफ इनकार कर दिया है। उनकी मांग है कि जब तक मारपीट में कथित रूप से शामिल तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की जाती, तब तक वे शव स्वीकार नहीं करेंगे।
परिवार के वकील ने बताया कि जहीरुद्दीन गंभीर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों से पीड़ित थे। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि फोरेंसिक जांच के शुरुआती नतीजों से पता चलता है कि मौत ज्यादा मात्रा में मेडिकल दवाइयां खाने (ओवरडोज) के कारण हुई है।
बीती 5 मई को वेजलपुर पुलिस ने 520 किलोग्राम कथित गोमांस और एक जिंदा सफेद बछड़ा बरामद किया था। इसके बाद 16 मई को जहीरुद्दीन को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में कुल नौ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, और पुलिस ने जहीरुद्दीन को इस कथित अवैध गोहत्या गिरोह का सरगना बताया था।
सभी नौ आरोपियों और हिरासत में मौत के मामले में जहीरुद्दीन के बेटे तौफीक का पक्ष रख रहे वकील नौमान घांची ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 5 मई को वेजलपुर थाने में मामला दर्ज हुआ था और तब जहीरुद्दीन फरार चल रहे थे।
घांची के अनुसार, 16 मई की सुबह करीब 10.30 बजे जब जहीरुद्दीन अस्पताल जा रहे थे, तभी सरखेज पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। जब वकील अहमदाबाद के सरखेज पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो उन्हें बताया गया कि वेजलपुर पुलिस जल्द ही जहीरुद्दीन को अपनी हिरासत में ले लेगी।
कुछ घंटों बाद उन्हें पता चला कि सरखेज थाने में आरोपी की तबीयत बिगड़ गई है। स्थिति को देखते हुए उन्हें एम्बुलेंस के जरिए वहां से करीब 12 किलोमीटर दूर जीएमईआरएस सोला सिविल अस्पताल ले जाया गया।
वकील ने आगे बताया कि 18 मई को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वेजलपुर पुलिस ने जहीरुद्दीन को अपनी हिरासत में ले लिया। उनका आरोप है कि पुलिस ने परिवार या उनके वकील शहजाद अंसारी को उनसे मिलने तक नहीं दिया, यहां तक कि उनकी जरूरी दवाइयां देने की भी इजाजत नहीं दी गई।
घांची के दावे के मुताबिक, 19 मई की रात डेढ़ से दो बजे के बीच जहीरुद्दीन की तबीयत अचानक ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद पुलिस उन्हें असरवा स्थित अहमदाबाद सिविल अस्पताल ले गई। सुबह करीब 7 बजे हालत और गंभीर होने पर परिवार ने उन्हें एसवीपी अस्पताल ले जाने की मांग रखी।
एसवीपी अस्पताल में जहीरुद्दीन को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद 20 मई की सुबह करीब 8 बजे उन्होंने दम तोड़ दिया।
पुलिस प्रशासन ने जानकारी दी है कि वेजलपुर पुलिस स्टेशन में एक्सीडेंटल डेथ (एडी) रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। जहीरुद्दीन के बेटे तौफीक शेख के पुलिस बर्बरता वाले आरोपों की जांच अहमदाबाद पुलिस के ‘एन’ डिवीजन के एसीपी एस एम पटेल कर रहे हैं।
अहमदाबाद पुलिस के ‘एम डिवीजन’ के एसीपी ए बी वलंद ने मीडिया को बताया कि याचिकाकर्ता का मुख्य आरोप पुलिस द्वारा मारपीट करने और कुछ गोलियां खिलाने का है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शव का इन्क्वेस्ट पंचनामा एक सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) की मौजूदगी में वीडियोग्राफी के साथ किया गया है, जिसमें मृतक के शरीर पर चोट का एक भी निशान नहीं मिला है।
एसीपी वलंद ने एक और अहम जानकारी देते हुए कहा कि उनके पास अस्पताल की रिपोर्ट भी मौजूद है। इस रिपोर्ट के अनुसार, जब डॉक्टर ने जहीरुद्दीन शेख से उनकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पूछा था, तो उन्होंने खुद कुबूल किया था कि उन्होंने अपनी मर्जी से 90 गोलियां खाई थीं।
इस बीच, बेटे तौफीक द्वारा कथित रूप से बनाया गया 14 सेकंड का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में स्ट्रेचर पर लेटे जहीरुद्दीन को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि पुलिस हिरासत के दौरान उनकी दाढ़ी खींची गई और उनके निजी अंगों पर लात मारी गई।
इस कथित वीडियो को लेकर वलंद ने कहा कि उन्होंने याचिकाकर्ता तौफीक से दवाइयों के खाली पत्ते और वह स्ट्रेचर वाला वीडियो मांगा है, लेकिन उन्हें अब तक यह साक्ष्य नहीं सौंपे गए हैं।
अधिकारी ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद फोरेंसिक साइंस लैब ने मौत का शुरुआती कारण मेडिकल दवाओं का ओवरडोज बताया है। हालांकि, पुलिस को अभी तक पूरी फोरेंसिक रिपोर्ट मिलने का इंतजार है।
जहीरुद्दीन और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के अनुसार, सर्विलांस स्क्वॉड (‘डी’ स्टाफ) को सोनल सिनेमा के पास यासमीन सोसाइटी के करीब एक खुले मैदान में जानवरों को काटे जाने की गुप्त सूचना मिली थी।
जब पुलिस वहां पहुंची, तो कथित तौर पर एक जानवर को काटा जा रहा था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मौके से मुश्ताक ताहिर मलारीवाला (28), रईस इनायत हुसैन शेख (23) और मुनाफ उर्फ कालू उर्फ हक्को मोहम्मद मीर (32) को पकड़ लिया।
पुलिस ने घटनास्थल से 1,56,000 रुपये कीमत का 520 किलोग्राम गोमांस (गौवंश मांस) जब्त किया। इसके साथ ही वहां से 10,000 रुपये की कीमत का एक जिंदा सफेद बछड़ा भी मिला, जिसे बेहद क्रूरता के साथ मौके पर बांधकर रखा गया था।
सभी आरोपियों के खिलाफ राज्य के गोहत्या विरोधी कानून, गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम 1954 और बॉम्बे प्रांतीय नगर निगम अधिनियम 1949 के तहत मामला दर्ज किया गया। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 325 भी लगाई गई है, जो जानवरों को मारने या अपाहिज करने की शरारत से संबंधित है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि जहीरुद्दीन की मौत से पहले इस मामले के एक अन्य आरोपी से जुड़ा ऐसा ही विवाद सामने आया था। बीती 6 मई को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें कथित गोहत्या वाली जगह से पकड़े गए रईस इनायत हुसैन शेख नामक व्यक्ति को पुलिस वाहन के बोनट पर मुंह के बल लिटाकर डंडों से पीटा जा रहा था।
उस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए एसीपी वलंद ने कहा कि अभी तक यह साबित नहीं हुआ है कि वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी वेजलपुर थाने के ही हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस को इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है और ऐसे वीडियो पूरे भारत में वायरल होते रहते हैं, इसलिए यह कहीं का भी हो सकता है।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि महिंद्रा बोलेरो हर जगह पुलिस की गाड़ी के रूप में इस्तेमाल होती है, और इस वीडियो को बनाने में एआई (AI) के इस्तेमाल की संभावना से भी पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
परिजनों ने एक और गंभीर आरोप लगाया है कि जहीरुद्दीन के साथ जिन तीन पुलिसकर्मियों ने मारपीट की, ये वही अफसर हैं जिन्होंने दो साल पहले भी उनके साथ ऐसी ही ज्यादती की थी।
वकील घांची ने बताया कि जहीरुद्दीन शेख ने अहमदाबाद ग्रामीण के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। उस शिकायत में कहा गया था कि दो साल पहले पशु क्रूरता के एक मामले में उन्हें गिरफ्तार करने वाले इन्हीं तीन पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ मारपीट की थी।
घांची ने कहा कि वह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है। उनका मानना है कि पुलिस अधिकारियों ने अपनी पुरानी रंजिश निकालने के लिए फिर से जहीरुद्दीन के साथ मारपीट की, क्योंकि उन तीन अधिकारियों के खिलाफ न तब कोई कार्रवाई हुई थी और न अब हुई है।
इन तमाम आरोपों पर एसीपी वलंद ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कोई भी आरोपी आरोप लगा सकता है, लेकिन अदालत मामले की बारीकी से जांच करने के बाद ही कोई कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि पुराने आरोप अभी भी अदालत में विचाराधीन हैं।
एसीपी ने यह भी कहा कि इस व्यक्ति की यह आदत रही है कि वह जिस भी थाने में गिरफ्तार होता है, वहां के स्टाफ पर ऐसे ही आरोप मढ़ देता है।
आपराधिक इतिहास की जानकारी देते हुए एसीपी वलंद ने बताया कि जहीरुद्दीन शेख के खिलाफ 2002 से लेकर अब तक 16 मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें से आठ मामले तो अकेले वेजलपुर पुलिस स्टेशन में ही दर्ज हैं।
इसके अलावा, साल 2002 से 2020 के बीच उसे प्रिवेंशन ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज एक्ट 1985 (PASA एक्ट) के तहत पांच बार हिरासत में भी लिया जा चुका था।
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