अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाले समुद्री यातायात में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान की ये हरकतें उस समझौते के विपरीत हैं जो दोनों पक्षों के बीच हुआ था। इस कड़े बयान ने पहले से ही नाजुक बने हुए संघर्ष विराम के ढांचे में नई दरारें उजागर कर दी हैं।
ट्रंप की यह टिप्पणी समझौते की अलग-अलग व्याख्याओं से जुड़ी उन रिपोर्टों के बीच आई है, जिनमें इस बात पर विवाद है कि क्या इस रणनीतिक जलमार्ग पर प्रतिबंध या नियंत्रण कभी इस सहमति का हिस्सा थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान को इस मार्ग से गुजरने वाले टैंकरों पर शुल्क लगाने के किसी भी प्रयास के खिलाफ भी सचेत किया है। गौरतलब है कि दुनिया भर की लगभग 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति इसी रास्ते से होकर गुजरती है।
यह तनाव ऐसे समय में सामने आया है जब एक अन्य मोर्चे पर स्थितियां तेजी से बिगड़ी हैं। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हिजबुल्लाह को निहत्था करने और संबंधों को सामान्य बनाने के रास्ते तलाशने पर जोर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने लेबनान के साथ सीधी बातचीत शुरू करने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद जमीनी हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं। इजरायल ने लेबनान में ताबड़तोड़ हवाई हमलों की झड़ी लगा दी है। चंद मिनटों के भीतर 100 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया गया है और हिजबुल्लाह के लॉन्च साइट्स के खिलाफ सैन्य अभियान लगातार जारी है।
नेतन्याहू ने यह स्पष्ट किया है कि लेबनान में कोई संघर्ष विराम लागू नहीं है, जो कूटनीतिक बयानों और सैन्य कार्रवाइयों के बीच के भारी अंतर को रेखांकित करता है।
हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने यह संकेत जरूर दिया है कि कूटनीतिक बातचीत का समर्थन करने के लिए इजरायल अपने सैन्य अभियानों को थोड़ा कम कर सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि नेतन्याहू से सीधे बात करने के बाद उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री से इस मामले को शांति से निपटाने का आग्रह किया है।
इन हवाई हमलों के बेहद गंभीर मानवीय परिणाम देखने को मिल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस के अनुसार, बेरूत के दक्षिणी उपनगरों को खाली करने की चेतावनियों ने वहां के प्रमुख अस्पतालों को खतरे में डाल दिया है। इसके चलते इंटेंसिव केयर में भर्ती मरीजों सहित सैकड़ों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना असंभव हो गया है।
संघर्ष विराम के दायरे को लेकर बनी भ्रम की स्थिति ने मामलों को और ज्यादा उलझा दिया है। ईरानी अधिकारियों और कुछ मध्यस्थों ने दावा किया था कि लेबनान इस व्यवस्था में शामिल है, लेकिन अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने इसका खंडन कर अविश्वास को और गहरा कर दिया है।
लगातार हो रहे इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने इजरायल पर युद्धविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है और फिर से होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए जहाजों की आवाजाही बाधित करने की धमकी दी है।
जमीनी स्तर पर लेबनान अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने सुरक्षा बलों को आदेश दिया है कि बेरूत में हथियारों को केवल सरकारी संस्थानों तक ही सीमित रखा जाए। वहीं, राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इस बात को दोहराया है कि संघर्ष विराम ही आगे बढ़ने का एकमात्र व्यवहार्य विकल्प है।
इन सब के बावजूद यह सवाल बरकरार है कि लेबनानी सरकार हिजबुल्लाह पर कितना अधिकार जता सकती है। हिजबुल्लाह ईरान द्वारा समर्थित एक बेहद शक्तिशाली बल है, जो अपनी राजनीतिक उपस्थिति के बावजूद लेबनान में पूरी तरह से स्वतंत्र होकर काम करता है।
जैसे-जैसे कूटनीति आगे बढ़ रही है, हालात अभी भी बेहद अनिश्चित बने हुए हैं। पूरी स्थिति विवादित संघर्ष विराम की शर्तों, जारी सैन्य कार्रवाइयों और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण को लेकर अनसुलझे सवालों के बीच फंसी हुई है।











