अमेरिका में अवैध रूप से रह रहे 10 भारतीय नागरिकों पर बोस्टन की एक संघीय ग्रैंड जूरी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इन लोगों पर ‘यू वीजा’ धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए सुविधा स्टोरों में हथियारों के बल पर फर्जी डकैती की साजिश रचने का आरोप है।
इस मामले में इन व्यक्तियों के खिलाफ मार्च में एक आपराधिक शिकायत दर्ज की गई थी। अब ग्रैंड जूरी ने इन सभी पर साजिश के तहत वीजा धोखाधड़ी का आरोप तय किया है। यह पूरी योजना इसलिए बनाई गई थी ताकि स्टोर के कर्मचारी आव्रजन (इमिग्रेशन) आवेदनों पर खुद को अपराध का शिकार बता सकें।
आरोपितों की पहचान 39 वर्षीय जितेन्द्रकुमार पटेल, 36 वर्षीय महेशकुमार पटेल, 45 वर्षीय संजयकुमार पटेल और 40 वर्षीय दीपिकाबेन पटेल के रूप में हुई है। दीपिकाबेन को मैसाचुसेट्स में अवैध रूप से रहने के कारण पहले ही भारत निर्वासित किया जा चुका है।
इनके अलावा 52 वर्षीय रमेशभाई पटेल, 43 वर्षीय अमिताबेन पटेल, 28 वर्षीय रौनककुमार पटेल, 36 वर्षीय संगीताबेन पटेल, 42 वर्षीय मिंकेश पटेल और 42 वर्षीय सोनल पटेल भी आरोपियों की सूची में शामिल हैं।
इन सभी 10 आरोपियों को पहले आपराधिक शिकायत के जरिए चार्ज करके कुछ शर्तों के साथ रिहा कर दिया गया था। हालांकि, अब इनमें से रमेशभाई पटेल और रौनककुमार पटेल को अप्रवासन हिरासत में ले लिया गया है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने गुरुवार को जानकारी दी कि अगर इन आरोपियों पर कोई सजा तय होती है, तो उस सजा की अवधि को पूरा करने के तुरंत बाद इन्हें अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा।
यह मामला इस पूरे नेटवर्क के मुख्य साजिशकर्ता रामभाई पटेल और घटना के बाद भागने में मदद करने वाले उनके ड्राइवर बलविंदर सिंह की जांच से निकला है। इन दोनों को दिसंबर 2023 में आरोपित किया गया था और बाद में मई 2025 में अदालत ने इन्हें दोषी करार दिया।
जांच से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, मार्च 2023 में रामभाई पटेल और उनके साथियों ने एक सुनियोजित योजना के तहत कई स्थानों पर फर्जी डकैती का नाटक रचा था। उन्होंने मैसाचुसेट्स और अन्य जगहों पर कम से कम छह सुविधा स्टोरों, शराब की दुकानों और फास्ट फूड रेस्तरां को अपना निशाना बनाया।
इस फर्जी डकैती का मुख्य उद्देश्य वहां काम करने वाले क्लर्कों को ‘यू वीजा’ आवेदन पर खुद को एक हिंसक अपराध का शिकार साबित करने का मौका देना था। इस नाटक के दौरान एक व्यक्ति “लुटेरे” के रूप में स्टोर के कर्मचारियों या मालिकों को बंदूक जैसे दिखने वाले हथियार से डराता था और गल्ले से नकदी लेकर फरार हो जाता था।
यह पूरी घटना जानबूझकर स्टोर के सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड करवाई जाती थी ताकि अपराध के पुख्ता सबूत पेश किए जा सकें। डकैती के इस नाटक के बाद, स्टोर के क्लर्क या मालिक लुटेरे के भागने के पांच मिनट या उससे अधिक समय तक जानबूझकर इंतजार करते थे और उसके बाद पुलिस को घटना की सूचना देते थे।
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