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भारतीय वायुसेना का बड़ा खुलासा: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पाकिस्तान के 13 विमान किए नष्ट, 11 एयरफील्ड्स पर बोला था सीधा हमला

| Updated: May 7, 2026 18:58

भारतीय सेना के टॉप कमांडरों का बड़ा खुलासा, 'ऑपरेशन सिंदूर' में पाकिस्तान के 13 विमान और 11 एयरबेस हुए खाक; जानें इस शौर्य गाथा की इनसाइड स्टोरी।

भारतीय सेना के शीर्ष कमांडरों ने गुरुवार को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर अब तक की सबसे विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की है। इस उच्च-स्तरीय सैन्य अभियान के दौरान भारतीय सुरक्षा बलों ने पाकिस्तान के 13 विमानों को खाक में मिला दिया और 11 दुश्मन एयरफील्ड्स को अपना निशाना बनाया। इसके अलावा सीमा पार मौजूद कई प्रमुख आतंकी ठिकानों को भी पूरी तरह से तबाह कर दिया गया।

जयपुर में आयोजित एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय वायुसेना, थल सेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस ऐतिहासिक मिशन के बारे में बात की। उनका कहना था कि यह ऑपरेशन सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तानी सैन्य उकसावे के खिलाफ भारत की रणनीतिक स्थिति में एक निर्णायक बदलाव का प्रतीक है।

वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती ने बताया कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सात मई को भारतीय बलों ने नौ आतंकी शिविरों पर अचूक हमले किए। इसके बाद इस अभियान का दायरा बढ़ाते हुए प्रमुख पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को भी कड़े हमलों की जद में लिया गया।

एयर मार्शल भारती ने कड़े शब्दों में कहा कि हमने उनके नौ आतंकी शिविरों पर हमला कर उन्हें पूरी तरह से नेस्तनाबूद कर दिया है और इसके पुख्ता सबूत सबके सामने मौजूद हैं।

उन्होंने आगे बताया कि भारतीय जांबाजों ने 11 पाकिस्तानी एयरफील्ड्स को निशाना बनाया। इस दौरान जमीन या हवा में मौजूद 13 पाकिस्तानी विमानों को नष्ट कर दिया गया। इसमें एक बेहद अहम हवाई संपत्ति भी शामिल थी जिसे 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी से मार गिराया गया।

जब से यह सैन्य अभियान शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक पाकिस्तान को हुए युद्धक्षेत्र के नुकसान के बारे में यह भारत के सबसे कड़े आधिकारिक दावों में से एक है।

इस दौरान एयर मार्शल भारती ने टकराव के दौरान पाकिस्तान द्वारा किए गए सफलता के दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि इस्लामाबाद द्वारा गढ़ी गई कहानी जमीनी हकीकत से बिल्कुल मेल नहीं खाती।

उन्होंने स्पष्ट किया कि दुश्मन हमारे सैन्य या नागरिक बुनियादी ढांचे को कोई बड़ा नुकसान पहुंचाने में पूरी तरह से विफल रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ बयानबाजी और झूठी कहानियों से जीत नहीं मिलती, बल्कि जीत को ठोस तथ्यों के पैमाने पर मापा जाता है।

क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

एक बड़े आतंकी हमले के बाद भारत ने यह अहम सैन्य कदम उठाया था। नई दिल्ली के अनुसार यह हमला सीमा पार से सक्रिय पाकिस्तान समर्थित गुटों ने किया था। भारतीय अधिकारियों ने इस अभियान को पाकिस्तानी क्षेत्र के भीतर आतंकी ठिकानों, लॉन्च पैड और रणनीतिक सहायता सुविधाओं को लक्षित करने वाला एक बेहद संतुलित लेकिन जोरदार सैन्य जवाब बताया है।

यह ऑपरेशन भारत के सैन्य सिद्धांत में एक बड़े विकास को दर्शाता है। इसमें लंबी दूरी के सटीक हमलों, तीनों सेनाओं के एकीकृत समन्वय, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं और जल, थल व नभ में अग्रिम तैनाती का शानदार मिश्रण देखने को मिला।

साल 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक या 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक जैसे पिछले सीमित जवाबी अभियानों के विपरीत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का पैमाना काफी बड़ा था। भारतीय सैन्य योजनाकारों ने इसे एक सतत और बहु-आयामी अभियान के रूप में पेश किया। इसका मकसद केवल आतंकी गुटों को सजा देना नहीं था, बल्कि पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान को भी इसकी भारी रणनीतिक कीमत चुकाने पर मजबूर करना था।

प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अभियान में लड़ाकू विमानों, ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलों द्वारा समन्वित हमले किए गए। इसके साथ ही अरब सागर और पश्चिमी सीमा के पास महत्वपूर्ण अग्रिम क्षेत्रों में नौसैनिक तैनाती भी की गई।

सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) के रूप में इस पूरे ऑपरेशन में अहम भूमिका निभाने वाले लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को एक अंत नहीं, बल्कि महज एक शुरुआत करार दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा कि यह हमारे संकल्प, जिम्मेदारी और रणनीतिक संयम का एक कड़ा बयान था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पूरे अभियान के दौरान भारत ने अपनी सैन्य सटीकता और राजनीतिक परिपक्वता दोनों का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

उन्होंने आगे बताया कि भारत की यह कार्रवाई सटीकता, आनुपातिकता और उद्देश्य की पूर्ण स्पष्टता के साथ निष्पादित की गई थी। इसके जरिए नई दिल्ली ने यह साफ संकेत दिया कि वह सजा देने वाले सैन्य परिणाम देने के साथ-साथ तनाव पर नियंत्रण बनाए रखना भी बखूबी जानती है।

घई ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि भारत अपनी संप्रभुता, अपनी सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा पूरी तरह से निर्णायक, पेशेवर और अत्यंत जिम्मेदारी के साथ करेगा।

नौसेना का दबाव और पाकिस्तान की रक्षात्मक मुद्रा

नौसेना के महानिदेशक (संचालन) एएन प्रमोद ने बताया कि अभियान के दौरान भारतीय नौसेना की आक्रामक तैनाती ने पाकिस्तानी नौसेना और हवाई संपत्तियों को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया। इस खौफ के चलते उन्हें अपने समुद्र तट और बंदरगाहों के करीब रक्षात्मक स्थिति में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।

वाइस एडमिरल प्रमोद के अनुसार पाकिस्तान के भीतर गहरे बसे आतंकी ठिकानों पर लंबी दूरी के सटीक हथियारों का इस्तेमाल करके भारत ने इस्लामाबाद की लंबे समय से चली आ रही ‘परमाणु ब्लैकमेल’ की रणनीति की हवा निकाल दी है।

उन्होंने कहा कि लंबी दूरी के सटीक हथियारों से पाकिस्तान के सीने में पल रहे आतंकी ठिकानों पर सीधा प्रहार करके भारत ने उनकी परमाणु धमकियों के खोखलेपन को दुनिया के सामने उजागर कर दिया है।

नौसेना कमांडर ने यह भी जोड़ा कि यह ऐतिहासिक ऑपरेशन भारतीय राजनीतिक नेतृत्व की रणनीतिक स्पष्टता को दर्शाता है। सरकार ने सशस्त्र बलों को परिचालन स्वतंत्रता के साथ-साथ एक सटीक और स्पष्ट जनादेश प्रदान किया था।

सैन्य विश्लेषकों का मानना ​​है कि इन बयानों से भारत यह स्पष्ट संदेश देना चाहता था कि पाकिस्तान की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता अब आतंकी हमलों के खिलाफ भारत की संतुलित पारंपरिक जवाबी कार्रवाई को किसी भी कीमत पर नहीं रोक पाएगी।

रणनीतिक संदेश और क्षेत्रीय प्रभाव

शीर्ष भारतीय कमांडरों द्वारा इतनी विस्तृत जानकारी का खुलासा किया जाना काफी असाधारण है। ऐसा प्रतीत होता है कि इसका उद्देश्य न केवल घरेलू दर्शकों को बल्कि अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समुदाय को भी संदेश देना है।

पाकिस्तानी विमानों और एयरफील्ड्स के विनाश का सार्वजनिक दावा करके भारत ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अपनी बढ़ती सैन्य पहुंच, तकनीकी क्षमता और संयुक्त बल एकीकरण के एक भव्य प्रदर्शन के रूप में पेश कर रहा है।

इस ऑपरेशन ने दक्षिण एशिया में सैन्य समीकरणों को भी काफी हद तक बदल दिया है। भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह संघर्ष के स्तर को प्रबंधित करते हुए दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमले करने की पूरी इच्छाशक्ति रखता है।

भले ही पाकिस्तान इस ऑपरेशन के दौरान हुए भारी नुकसान के भारतीय दावों को लगातार नकारता रहा हो, लेकिन गुरुवार को भारतीय सैन्य अधिकारियों ने साफ कर दिया कि सफल हमलों के सुबूत सैटेलाइट इमेजरी, खुफिया आकलनों और ऑपरेशनल रिकॉर्ड्स के जरिए स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।

यह संयुक्त प्रेस वार्ता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की वर्षगांठ के मौके पर आयोजित की गई है। इसे भारत की विकसित होती राष्ट्रीय सुरक्षा कथा के भीतर इस ऑपरेशन को संस्थागत रूप देने के एक व्यापक प्रयास के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है।

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