नई दिल्ली में 11 मई को आयोजित सीआईआई (CII) एनुअल बिजनेस समिट को संबोधित करते हुए अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और भारत के भविष्य पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया अब पहले की तरह ‘फ्लैट’ नहीं बल्कि बंटी हुई है, जहां सप्लाई चेन, ऊर्जा और डिजिटल सुरक्षा राष्ट्रीय शक्ति के नए आधार बन गए हैं।
अडानी ने स्पष्ट किया कि जो देश अपनी ऊर्जा और कंप्यूटिंग क्षमता को नियंत्रित करेगा, वही 21वीं सदी को दिशा देगा। अमेरिका और चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे दोनों महाशक्तियां ऊर्जा स्वतंत्रता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) में अपनी संप्रभुता हासिल करने के लिए काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि भारत का रास्ता इन दोनों से अलग होगा क्योंकि भारत अपनी विशाल और बढ़ती घरेलू मांग के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रहा है।
भारत की ऊर्जा प्रगति पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि मार्च 2026 तक भारत ने 500 गीगावाट स्थापित बिजली क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है। इस क्षमता का 53 प्रतिशत हिस्सा पिछले एक दशक में ही जोड़ा गया है। भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी क्षमता को चार गुना बढ़ाकर 2,000 गीगावाट तक ले जाना है।
अडानी ने देश की तेज आर्थिक ग्रोथ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत अब कंपाउंडिंग एक्सीलरेशन के जरिए विकास कर रहा है और हर दशक में अपनी जीडीपी में एक नई यूरोपीय अर्थव्यवस्था के बराबर का हिस्सा जोड़ रहा है।
डेटा सेंटर की क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि 2030 तक 5 गीगावाट तक पहुंचने वाली यह क्षमता 2047 तक 75 गीगावाट तक बढ़ सकती है, जिसके लिए भारत को अभी से तैयारी करनी होगी।
एआई से नौकरियां छिनने के डर को पूरी तरह खारिज करते हुए अडानी ने इसकी तुलना यूपीआई (UPI) की सफलता से की। उन्होंने कहा कि एआई अवसरों को खत्म नहीं करेगा बल्कि उत्पादकता बढ़ाएगा, नए रोजगार पैदा करेगा और छोटे व्यवसायों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने की ताकत देगा।
उन्होंने जोर दिया कि एआई केवल सॉफ्टवेयर नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा, चिप्स, नेटवर्क और डेटा का एक पूरा बुनियादी ढांचा है।
भारतीय आईटी सेक्टर की सफलता को सराहते हुए उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत दूसरों के प्लेटफॉर्म के लिए कोड लिखने की बजाय खुद का डेटा और खुद का एआई मॉडल तैयार करे। अडानी ने कहा कि भारत को अपनी इंटेलिजेंस का भविष्य किराये पर लेने के बजाय उसे अपनी जमीन पर बनाना और नियंत्रित करना होगा।
इस दिशा में अडानी समूह के प्रयासों की जानकारी देते हुए उन्होंने बड़े निवेश की घोषणाएं कीं। समूह ने एनर्जी ट्रांजिशन के लिए 100 बिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। गुजरात के खावड़ा में 30 गीगावाट का दुनिया का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट बन रहा है, जिसका 35 प्रतिशत हिस्सा चालू भी हो चुका है।
डेटा सेंटर बिजनेस के लिए भी समूह ने हालिया एआई समिट में 100 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है। गूगल के साथ मिलकर विशाखापट्टनम में देश का सबसे बड़ा गीगावाट स्केल कैंपस बनाया जा रहा है। इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, फ्लिपकार्ट और उबर जैसी कंपनियों के साथ भी डेटा जरूरतों के लिए साझेदारी की गई है।
मानवीय कौशल के विकास पर जोर देते हुए अडानी ने बताया कि अडानी फाउंडेशन ने शिक्षा, स्वास्थ्य और एआई आधारित स्किलिंग के लिए 60,000 करोड़ रुपये का दीर्घकालिक संकल्प लिया है।
उन्होंने अपना संबोधन यह कहते हुए समाप्त किया कि एआई का विकास भारत के किसानों, नर्सों, शिक्षकों और छोटे निर्माताओं की सेवा के लिए होना चाहिए और अगली आजादी हमारी अपनी क्षमता विकसित करने में निहित होगी।
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