comScore पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी ने ली राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी ने ली राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ

| Updated: May 9, 2026 14:50

ममता बनर्जी के 15 साल के शासन का अंत; सुवेंदु अधिकारी ने पीएम मोदी की मौजूदगी में ली बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री पद की शपथ।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नए युग का सूत्रपात हुआ है। भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया है। यह बदलाव उस राज्य के लिए बेहद अहम माना जा रहा है जहाँ दशकों तक पहले वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस का वर्चस्व रहा।

दिलचस्प बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने के मात्र छह साल के भीतर ही सुवेंदु इस सर्वोच्च पद तक पहुँचने में सफल रहे हैं। ठीक छह साल पहले तक वह तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे करीबी और भरोसेमंद सिपहसालार माने जाते थे।

राजभवन में आयोजित एक बेहद हाई-प्रोफाइल समारोह के दौरान राज्यपाल आर.एन. रवि ने सुवेंदु अधिकारी को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक पल के गवाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कई केंद्रीय मंत्री, एनडीए के दिग्गज नेता और भाजपा शासित विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री बने। सुवेंदु के साथ पांच अन्य भाजपा विधायकों ने भी मंत्री पद की शपथ ली, जिससे राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों में दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, क्षुदिराम टुडू और निसिथ प्रमाणिक शामिल हैं। छह सदस्यीय इस शुरुआती कैबिनेट को राज्य में जातिगत, क्षेत्रीय और सामुदायिक संतुलन साधने की भाजपा की पहली बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल जैसे राजनैतिक रूप से ध्रुवीकृत राज्य में भाजपा ने इस मंत्रिमंडल के जरिए समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है।

सुवेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना ममता बनर्जी और उनके तृणमूल कांग्रेस शासन के 15 वर्षों के अंत का प्रतीक है। हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में भाजपा ने जबरदस्त जीत हासिल करते हुए सत्ता की चाबी अपने नाम की। इस चुनावी जीत को भारतीय राजनीति के सबसे नाटकीय मोड़ों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि 2010 के दशक के अंत तक बंगाल में भाजपा की स्थिति तुलनात्मक रूप से काफी कमजोर थी।

चुनावों के दौरान सुवेंदु अधिकारी भाजपा के अभियान का मुख्य चेहरा बनकर उभरे थे। उन्होंने न केवल नंदीग्राम में अपना दबदबा साबित किया, बल्कि ममता बनर्जी का राजनैतिक गढ़ माने जाने वाले भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र से भी शानदार जीत दर्ज की। भवानीपुर में उनकी 15,000 से अधिक मतों की जीत प्रतीकात्मक रूप से बहुत बड़ी मानी जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र वर्षों से ममता बनर्जी की व्यक्तिगत राजनैतिक सत्ता की पहचान रहा है।

सुवेंदु अधिकारी का राजनैतिक सफर बंगाल की राजनीति में सबसे बड़े बदलावों में से एक है। कभी ममता बनर्जी के संगठन को जमीनी स्तर पर खड़ा करने वाले अधिकारी ने ग्रामीण बंगाल, विशेषकर पूर्वी मेदिनीपुर और आसपास के जिलों में तृणमूल की जड़ें मजबूत की थीं। 2011 में जब ममता बनर्जी ने वामपंथ को उखाड़ फेंका था, तब नंदीग्राम और सिंगूर के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलनों में सुवेंदु के परिवार की भूमिका निर्णायक रही थी।

हालांकि, समय के साथ पार्टी के भीतर शक्ति के केंद्रीकरण और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव के कारण मतभेद गहरे होते गए। आंतरिक सत्ता संघर्ष और उत्तराधिकार की राजनीति के चलते सुवेंदु और तृणमूल नेतृत्व के बीच दरार आ गई। इसके बाद 2020 के अंत में सुवेंदु ने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया, जिसने बंगाल के पूरे राजनैतिक परिदृश्य को बदलकर रख दिया।

यह भी एक रोचक तथ्य है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ सुवेंदु के संबंध हमेशा से सहज नहीं थे। भाजपा में शामिल होने से पहले वह तृणमूल के सबसे आक्रामक नेताओं में से एक थे और अक्सर केंद्र सरकार पर तीखे हमले करते थे। उन्होंने कभी भाजपा पर ‘सांप्रदायिक राजनीति’ को बंगाल में आयात करने का आरोप भी लगाया था और राज्य में भाजपा के विस्तार को रोकने के लिए कई जमीनी संघर्षों का नेतृत्व किया था।

भाजपा में शामिल होने के शुरुआती दिनों में पार्टी के पुराने नेताओं के बीच भी उनकी त्वरित बढ़त को लेकर कुछ असहजता देखी गई थी। कुछ पुराने दिग्गजों का मानना था कि एक बाहरी नेता को बहुत जल्द बड़ी जिम्मेदारी दी जा रही है। टिकट वितरण और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर भी उनके समर्थकों और पुराने भाजपा नेताओं के बीच तनाव की खबरें आती रही थीं।

बावजूद इसके, सुवेंदु अपनी संगठनात्मक क्षमता और जनता के बीच पकड़ के कारण भाजपा के लिए अपरिहार्य बन गए। 2021 में नंदीग्राम में ममता बनर्जी के खिलाफ उनकी ऐतिहासिक जीत ने उन्हें भाजपा का सबसे प्रमुख चेहरा बना दिया और मोदी-शाह के साथ उनके संबंधों को नई मजबूती दी। 2026 के चुनाव अभियान तक वह पूरी तरह से पार्टी के मुख्य रणनीतिकार और जननायक के रूप में स्थापित हो चुके थे।

सत्ता का यह हस्तांतरण हालांकि काफी चुनौतीपूर्ण माहौल में हो रहा है। चुनाव नतीजों के बाद से ही राज्य के विभिन्न जिलों में राजनैतिक हिंसा और झड़पों की खबरें आ रही हैं।

स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब इसी सप्ताह उत्तर 24 परगना के मध्यमग्राम में सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक की हत्या कर दी गई। भाजपा ने इसे लक्षित राजनैतिक हिंसा करार दिया है, जबकि मामले की जांच अभी जारी है।

नई सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बहाल करना और प्रशासनिक मशीनरी को सुचारु रूप से चलाना सबसे बड़ी चुनौती होगी। शपथ लेने वाले मंत्रियों की सूची में बंगाल की भौगोलिक विविधता का पूरा ध्यान रखा गया है।

खड़गपुर सदर से जीतने वाले दिलीप घोष पुराने सांगठनिक चेहरे हैं, वहीं आसनसोल दक्षिण से अग्निमित्रा पॉल ने महिला नेतृत्व के रूप में अपनी जगह बनाई है।

अशोक कीर्तनिया के जरिए भाजपा ने बांग्लादेश सीमा से सटे राजनैतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को साधा है, जबकि क्षुदिराम टुडू का चयन पश्चिमी बंगाल के जनजातीय समुदायों तक पहुँच बनाने की रणनीति का हिस्सा है।

उत्तर बंगाल, जहाँ भाजपा का प्रदर्शन हमेशा से मजबूत रहा है, वहां से कूच बिहार के निसिथ प्रमाणिक को कैबिनेट में जगह दी गई है। जल्द ही मंत्रियों के विभागों की घोषणा और मंत्रिमंडल विस्तार की भी संभावना है।

सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बंगाल एक नए और महत्वपूर्ण राजनैतिक अध्याय में प्रवेश कर रहा है। भाजपा के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष में बैठी ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के सामने सुशासन पेश करने की होगी।

बंगाल की यह जीत भाजपा के लिए न केवल एक चुनावी उपलब्धि है, बल्कि एक वैचारिक विजय भी है जिसने उस राज्य के द्वार खोल दिए हैं जो लंबे समय तक उसके प्रभाव से दूर था।

यह भी पढ़ें-

गृह मंत्रालय ने मोहन भागवत की सुरक्षा पर होने वाले खर्च का खुलासा करने से किया इनकार

अमेरिका के नए वीजा नियमों से भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं, शरण लेना हो सकता है कठिन

Your email address will not be published. Required fields are marked *