लखनऊ: अडानी इंटरप्राइजेज लिमिटेड की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी अडानी एग्री फ्रेश लिमिटेड (एएएफएल) ने स्टोन फ्रूट श्रेणी में प्रवेश करने की घोषणा की है। कंपनी अब हिमाचल प्रदेश में चेरी जैसे फलों की खरीद शुरू करने की योजना बना रही है, जिससे फलों की स्टोरेज अवधि बेहतर होगी और किसानों को उनकी उपज का अधिक लाभ मिल सकेगा।
हिमाचल प्रदेश में स्थित कंपनी की छह कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर स्टोरेज सुविधाओं को चेरी के भंडारण और वितरण के अनुकूल बनाने के लिए आधुनिक बनाया गया है। इस पहल के माध्यम से किसानों को बड़े बाजारों तक पहुंच मिलेगी और उनकी आय में सुधार होगा।
लखनऊ में आयोजित ‘फ्रूट होराइजन 2026’ कार्यक्रम के दौरान मनीष अग्रवाल ने जानकारी दी कि आगामी सीजन से चेरी की खरीद शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि भविष्य में कंपनी आड़ू और प्लम जैसे अन्य स्टोन फ्रूट्स के क्षेत्र में भी अपने परिचालन का विस्तार करेगी।
एएएफएल पिछले दो दशकों से हिमाचल प्रदेश में सेब की खरीद और मार्केटिंग के क्षेत्र में सक्रिय रही है। साल 2006 में ‘फार्म-पिक’ ब्रांड के साथ शुरुआत करने वाली यह कंपनी अब तक 17,000 से अधिक किसानों से 3 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा सेब खरीद चुकी है।
कंपनी ने अब तक किसानों को सीधे तौर पर लगभग 1,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। वर्तमान में हिमाचल में कंपनी की कुल स्टोरेज क्षमता 25,000 मीट्रिक टन है, जो फलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और बाजार की मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करती है।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कंपनी स्टैंडर्डाइज्ड ग्रेडिंग और सॉर्टिंग सिस्टम का पालन करती है। इससे फलों की गुणवत्ता के आधार पर सही कीमत तय होती है, जिससे किसानों की पारंपरिक मंडियों पर निर्भरता कम हुई है और उन्हें पारदर्शी मूल्य मिल पा रहा है।
डिजिटल नवाचार के तहत कंपनी अपनी ‘डिजिटल मंडी’ पहल को भी बढ़ावा दे रही है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसान खरीद केंद्रों पर जाए बिना दूर से ही अपनी उपज बेच सकते हैं। इस डिजिटल सेवा का विस्तार अब अन्य फल उत्पादक क्षेत्रों में भी किया जा रहा है।
वर्तमान में एएएफएल हिमाचल प्रदेश के कुल सेब उत्पादन का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा खरीद रही है। कंपनी के नेटवर्क में शामिल 17,000 किसानों में से 90 प्रतिशत से अधिक छोटे और सीमांत किसान हैं, जो 700 अलग-अलग गांवों से ताल्लुक रखते हैं।
व्यापार के साथ-साथ कंपनी सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रही है। अडानी फाउंडेशन के सहयोग से बागवानी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और सामुदायिक विकास के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं ताकि किसानों के जीवन स्तर में सुधार लाया जा सके।
एएएफएल का डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पूरे भारत में 76 थोक विक्रेताओं और लगभग 1,500 रिटेलर्स तक फैला हुआ है। ‘फार्म-पिक’ ब्रांड के तहत कंपनी न केवल भारतीय फलों की मार्केटिंग करती है, बल्कि विभिन्न देशों से उच्च गुणवत्ता वाले फलों का आयात भी करती है।
यह भी पढ़ें-
पश्चिम बंगाल: सुवेंदु अधिकारी ने ली राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ
अमेरिका के नए वीजा नियमों से भारतीयों की मुश्किलें बढ़ीं, शरण लेना हो सकता है कठिन








