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एक परिवार, कई दल: तमिलनाडु और पुडुचेरी की राजनीति में मार्टिन साम्राज्य का बढ़ता वर्चस्व

| Updated: May 11, 2026 13:14

टीवीके सरकार में दामाद कैबिनेट मंत्री, सास AIADMK की विधायक और साला NDA में शामिल। जानिए कैसे 'लॉटरी किंग' सेंटियागो मार्टिन का परिवार दक्षिण भारत की राजनीति के हर बड़े मोर्चे पर अपना दबदबा बना रहा है।

चेन्नई के उस मंच पर जहाँ शनिवार को सी. जोसेफ विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, वहां सबकी निगाहें एक नए चेहरे पर टिकी थीं। यह चेहरा था आधव अर्जुना का, जो अब विजय सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अर्जुना को इस नई सत्ता व्यवस्था का सबसे प्रमुख रणनीतिकार और संचालक माना जा रहा है।

समारोह के दौरान दर्शक दीर्घा में अर्जुना के ससुर और मशहूर कारोबारी सेंटियागो मार्टिन, उनकी सास लीमा रोज़ मार्टिन और पत्नी डेज़ी मौजूद थे। दक्षिण भारत की राजनीति में मार्टिन परिवार की उपस्थिति अब केवल एक दल तक सीमित नहीं रह गई है। यह परिवार वर्तमान में तमिलनाडु और पुडुचेरी के राजनीतिक नक्शे पर अलग-अलग विचारधाराओं और पार्टियों में मजबूती से पैर जमाए हुए है।

मार्टिन परिवार की राजनीतिक विविधता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां आधव अर्जुना टीवीके सरकार में मंत्री हैं, वहीं उनकी सास लीमा रोज़ मार्टिन तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक (AIADMK) की विधायक हैं। दूसरी ओर, उनके साले जोस चार्ल्स मार्टिन पुडुचेरी में भाजपा के सहयोगी दल ‘लक्षिया जननायक काची’ (LJK) के संस्थापक और नवनिर्वाचित विधायक हैं, जिनका जल्द ही वहां मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है।

तमिलनाडु की नई सत्ता संरचना के केंद्र में आधव अर्जुना का उदय काफी चौंकाने वाला रहा है। कभी द्रमुक (DMK) के करीबी रहे और एम.के. स्टालिन के दामाद सबरीसन के सहयोगी के रूप में पहचाने जाने वाले अर्जुना ने बाद में वीसीके (VCK) में महत्वपूर्ण पद संभाला। थोक थिरुमावलवन के साथ हुए मतभेदों के बाद वे विजय की पार्टी में शामिल हुए और चुनाव प्रबंधन से लेकर गठबंधन तक की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।

अर्जुना का राजनीतिक ग्राफ बहुत कम समय में तेजी से ऊपर गया है। एक पूर्व जिम ट्रेनर से लेकर मार्टिन परिवार के दामाद बनने और फिर राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लहर का हिस्सा बनने तक का उनका सफर किसी फिल्मी पटकथा जैसा है। वे अब टीवीके के भीतर बूथ स्तर के संचालन और गठबंधन की पहुंच के मुख्य सूत्रधार बन चुके हैं।

दूसरी तरफ, उनकी सास लीमा रोज़ मार्टिन का राजनीतिक सफर भी कम दिलचस्प नहीं है। आईजेके (IJK) में 14 साल बिताने के बाद उन्होंने हाल ही में अन्नाद्रमुक का दामन थामा था। सरकार गठन के दौरान वे उस वक्त चर्चा में आईं जब उन्होंने टीवीके और अन्नाद्रमुक के बीच संभावित सहयोग की बातचीत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया।

राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अन्नाद्रमुक के भीतर आने वाले समय में बड़ी टूट हो सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि लीमा रोज़ मार्टिन उन विधायकों में शामिल हो सकती हैं जो आने वाले हफ्तों में टीवीके के साथ नजदीकी बढ़ा सकते हैं। यह स्थिति मार्टिन परिवार के प्रभाव को और अधिक विस्तारित करने वाली साबित हो सकती है।

वहीं पुडुचेरी में 37 वर्षीय जोस चार्ल्स मार्टिन ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। एक बिजनेसमैन से राजनेता बने जोस चार्ल्स ने भाजपा समर्थित एनडीए गठबंधन के साथ हाथ मिलाया और अपनी पहली ही विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की। वे राजनीति को एक कॉर्पोरेट रणनीतिकार के नजरिए से देखते हैं और पुडुचेरी को सिंगापुर और दुबई जैसा बनाने की बात करते हैं।

जोस चार्ल्स का मानना है कि जब उनका व्यापारिक नेटवर्क समाज में इतना बड़ा योगदान दे सकता है, तो वे शासन व्यवस्था में बदलाव क्यों नहीं ला सकते। एक साक्षात्कार में उन्होंने उल्लेख किया था कि उनके परिवार के व्यापारिक नेटवर्क का टर्नओवर लगभग 24,000 करोड़ रुपये है। यही आर्थिक शक्ति उनके राजनीतिक रसूख को और भी मजबूत बनाती है।

मार्टिन परिवार का यह राजनीतिक रसूख उनके विशाल व्यापारिक साम्राज्य, विशेष रूप से ‘फ्यूचर गेमिंग एंड होटल सर्विसेज’ से जुड़ा है। सेंटियागो मार्टिन के नेतृत्व में यह समूह भारत के सबसे बड़े लॉटरी ऑपरेशनों में से एक चलाता है। चुनावी बांड के आंकड़ों के अनुसार, यह परिवार 2019 से 2024 के बीच 1,368 करोड़ रुपये के बांड खरीदकर देश का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा था।

इतने बड़े पैमाने पर वित्तीय निवेश ने मार्टिन परिवार के लिए राजनीतिक गलियारों के दरवाजे हमेशा खुले रखे हैं। सालों से सेंटियागो मार्टिन ने जांच एजेंसियों के दबाव और विरोधियों के हमलों के बावजूद सभी विचारधाराओं के दलों के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। अब यह परिवार किसी एक दल के करीब होने के बजाय खुद को सत्ता के कई केंद्रों में स्थापित कर चुका है।

हालांकि, इस राजनीतिक फैलाव के साथ परिवार के भीतर खींचतान भी खुलकर सामने आई है। जोस चार्ल्स मार्टिन ने सार्वजनिक रूप से अपने जीजा आधव अर्जुना की आलोचना की है। उन्होंने अर्जुना पर सत्ता के प्रति अत्यधिक लालसा रखने का आरोप लगाया और कहा कि परिवार ने बहुत पैसा और पावर देखा है, लेकिन अर्जुना का नजरिया काफी अलग है।

विजय के शपथ ग्रहण के कुछ घंटों बाद ही जोस चार्ल्स ने मुख्यमंत्री को आगाह करते हुए कहा कि उन्हें अपने करीबियों के भ्रष्टाचार पर नजर रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट रूप से अर्जुना का नाम लेते हुए कहा कि सरकार में कमीशनखोरी को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। यह आपसी टकराव दर्शाता है कि मार्टिन परिवार की जड़ें भले ही हर तरफ फैली हों, लेकिन उनके भीतर के समीकरण काफी जटिल हैं।

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