अहमदाबाद: भारत की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड ट्रांसपोर्ट यूटिलिटी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (APSEZ) की मरीन इकाई एस्ट्रो ऑफशोर ने यूरोप में सब-सी (समुद्र के भीतर) और ऑफशोर विस्तार के लिए अमेरिकी कंपनी ओशनियरिंग इंटरनेशनल इंक के साथ एक महत्वपूर्ण करार किया है। यह समझौता APSEZ के अल्ट्रा-डीपवाटर ऑपरेशंस और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम है।
अपनी क्षमता और बेड़े को बढ़ाते हुए, एस्ट्रो ऑफशोर ने 2021 में निर्मित 97-मीटर लंबे DP2 मल्टीपरपज सपोर्ट वेसल ‘एनर्जी सवाना’ का अधिग्रहण किया है। इस जहाज का नाम बदलकर अब ‘एस्ट्रो एटलस’ रखा जाएगा। यह कंपनी का पहला अल्ट्रा-डीपवाटर जहाज है, जिसे पानी के भीतर निर्माण, केबल बिछाने और पाइपलाइन इंस्टॉलेशन जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यों के लिए डिज़ाइन किया गया है।
क्षमता की बात करें तो एस्ट्रो एटलस 3,000 मीटर से अधिक की गहराई वाले पानी में सुगमता से काम कर सकता है। यह आधुनिक जहाज 150-टन के सब-सी एएचसी (AHC) क्रेन, 25-टन के सेकेंडरी क्रेन, एक मूनपूल और एक साथ 100 कर्मचारियों के ठहरने की सुविधा से लैस है। यह जहाज कंपनी को उच्च मूल्य वाले और बेहद जटिल ऑफशोर प्रोजेक्ट्स तक पहुंच प्रदान करेगा।
इस साझेदारी पर बात करते हुए APSEZ के पूर्णकालिक निदेशक और सीईओ अश्वनी गुप्ता ने कहा कि यह विकास कंपनी को विश्व स्तर पर एक विविध मरीन प्लेटफॉर्म बनाने के लक्ष्य में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि एस्ट्रो के उन्नत बेड़े और ओशनियरिंग की डीपवाटर इंजीनियरिंग व आरओवी (ROV) विशेषज्ञता के साथ आने से यूरोप में कंपनी की जटिल ऑफशोर क्षमताएं काफी मजबूत होंगी।
एस्ट्रो ऑफशोर के सीईओ मार्क हम्फ्रेज़ ने ‘एस्ट्रो एटलस’ को कंपनी का अब तक का सबसे बड़ा और सक्षम जहाज बताया। उनके अनुसार, यह निवेश आधुनिक और उच्च क्षमता वाले बेड़े के निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो अल्ट्रा-डीपवाटर वातावरण में ग्राहकों की बदलती जरूरतों को प्रभावी ढंग से पूरा करने में सक्षम होगा।
सब-सी या अंडरवॉटर गतिविधियों में समुद्र के भीतर की जाने वाली वह विशेष इंजीनियरिंग शामिल होती है, जो ऑफशोर एनर्जी और मरीन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इन कार्यों के लिए अत्याधुनिक जहाजों और रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) सिस्टम की आवश्यकता होती है, जिसमें यह नई साझेदारी अहम भूमिका निभाएगी।
यह पूरा घटनाक्रम APSEZ की उस दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत कंपनी दुनिया के सबसे बड़े इंटीग्रेटेड मरीन प्लेटफॉर्म्स में से एक का निर्माण करना चाहती है।
अपने इसी विजन के साथ, कंपनी ने वित्त वर्ष 2031 (FY31) तक 200 जहाजों का बेड़ा तैयार करने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा कंपनी ने FY31 तक मरीन राजस्व को 6,000 करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यह भी पढ़ें-
पेपर लीक के आरोपों के बाद NEET-UG 2026 रद्द, देश भर में छात्रों का भारी हंगामा
विजय से पहले राजाजी: जब आज़ाद भारत में पहली बार सामने आया था खंडित जनादेश







