comScore शेर, तेंदुआ और अब 'दूल्हा' बाघ: दुनिया के 4 Big Cats का इकलौता घर बनने की राह पर गुजरात - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

शेर, तेंदुआ और अब ‘दूल्हा’ बाघ: दुनिया के 4 Big Cats का इकलौता घर बनने की राह पर गुजरात

| Updated: May 15, 2026 14:44

शेर और तेंदुए के बाद अब गुजरात 33 साल बाद बाघ की वापसी का गवाह बन रहा है, वहीं कच्छ के बन्नी घास के मैदानों में चीतों का 'घर' बसाने की भव्य तैयारी जोरों पर है।

गुजरात तेजी से खुद को दुनिया के एक प्रमुख वन्यजीव संरक्षण केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। एशियाई शेरों की बढ़ती आबादी, 33 साल बाद बाघ की वापसी और कच्छ के बन्नी घास के मैदानों में चीतों के लिए तैयार किए जा रहे आवास इस बात की गवाही दे रहे हैं।

जल्द ही गुजरात वन्यजीव जगत में एक अभूतपूर्व मुकाम हासिल कर सकता है। यह राज्य दुनिया की चार सबसे प्रतिष्ठित बड़ी बिल्लियों (Big Cats) का प्राकृतिक घर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

इस ऐतिहासिक संभावना पर गुरुवार को इंटरनेशनल बिग कैट (IBC) एलायंस समिट 2026 के पहले प्री-इवेंट में विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान गुजरात के नेताओं और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शेरों के आवास विस्तार, गुजरात में बाघों की आमद और चीता संरक्षण के लिए राज्य की तैयारियों पर अपनी बात रखी।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि राज्य को पहले से ही शेर और तेंदुए की मेजबानी करने का गौरव प्राप्त है। अब मध्य गुजरात के रतनमहल वन क्षेत्र में एक अकेले बाघ (ट्रेसिंग आउटसाइड रिजर्व टेरिटरी या TOTR से) के आने के बाद राज्य में बाघों की आबादी बढ़ाने की मजबूत महत्वाकांक्षाएं जन्म ले चुकी हैं।

मोढवाडिया ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से गुजरात में जल्द से जल्द चीते लाने का भी आग्रह किया। इसके अलावा उन्होंने मजाकिया लहजे में केंद्रीय मंत्री से उस अकेले नर बाघ के लिए एक मादा साथी (दुल्हन) लाने की प्रक्रिया को तेज करने की गुजारिश की। इसके लिए राज्य सरकार ने पहले ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) से आधिकारिक अनुरोध किया हुआ है।

मंत्री ने कहा कि ‘दूल्हा’ बाघ तैयार है और हम उसकी ‘दुल्हन’ का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इसके लिए राज्य में पूरी तैयारियां कर ली गई हैं और उसका घर भी बनकर तैयार है।

यह टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब तीन दशकों से अधिक के लंबे इंतजार के बाद गुजरात को आधिकारिक तौर पर “टाइगर स्टेट” के रूप में मान्यता मिली है। इसके अलावा, इसी साल जनवरी में विशाल और शुष्क बन्नी घास के मैदानों के किनारे स्थित छारी-ढंड कंजर्वेशन रिजर्व को ‘रामसर साइट’ घोषित किया गया है।

इससे पहले मार्च में गुजरात विधानसभा में बोलते हुए मोढवाडिया ने घोषणा की थी कि कच्छ के बन्नी में “चीता संरक्षण प्रजनन केंद्र” का काम तेज कर दिया गया है। केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद इस विशेष प्रोजेक्ट के लिए अब तक 14.70 करोड़ रुपये आवंटित किए जा चुके हैं।

गुरुवार को गिर में सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने वैश्विक वन्यजीव संरक्षण में गुजरात के बढ़ते महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने एशियाई शेरों के संरक्षण को पूरी दुनिया के लिए एक बेहद सफल और प्रेरणादायक मॉडल बताया।

यादव ने कहा कि जहां एक तरफ पूरे अफ्रीका में शेरों की संख्या लगातार घट रही है, वहीं गुजरात और गिर में एशियाई शेरों की आबादी निरंतर बढ़ रही है। उन्होंने गुजरात को शेर संरक्षण के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने वाला राज्य करार दिया।

केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि ग्रेटर गिर लैंडस्केप के लिए भारत के नवीनतम 2025 अनुमान के अनुसार एशियाई शेरों की आबादी 891 हो गई है। यह आंकड़ा साल 2020 के मुकाबले लगभग 32 प्रतिशत की शानदार वृद्धि को दर्शाता है।

उन्होंने आगे बताया कि आवास और गुणवत्ता में गिरावट के कारण इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की सूची में शेर को ‘संवेदनशील’ (vulnerable) श्रेणी में रखा गया है। जहां दुनिया भर में शेरों की आबादी में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है, वहीं अकेले गिर में उनकी संख्या में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है।

यादव ने बताया कि शेरों का प्राकृतिक फैलाव अब बरडा तक हो गया है, जहां उनकी संख्या 24 तक पहुंच चुकी है। इस प्रजाति को भारत के वन्यजीव कानूनों और वन्य जीवों व वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर कन्वेंशन (CITES) के परिशिष्ट I के तहत संरक्षण का उच्चतम स्तर प्राप्त है।

केंद्रीय मंत्री ने एक बड़ी घोषणा करते हुए पुष्टि की कि जूनागढ़ में राष्ट्रीय वन्यजीव अनुसंधान केंद्र का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। उन्होंने इसे एक महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय परियोजना बताया जो आने वाले समय में दुनिया के प्रमुख वन्यजीव अनुसंधान केंद्रों में से एक बनकर उभरेगा।

यादव ने बाघों के अपने पारंपरिक क्षेत्रों से बाहर निकलकर गुजरात की तरफ आने को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि गुजरात में शेर और तेंदुए पहले से थे, और अब बाघ भी यहां पहुंच गए हैं। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वन विभाग ने गुजरात में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए एक विशेष गणना (सेंसस) कराने का फैसला किया है।

वन अधिकारियों के अनुसार मध्य जून में होने वाली यह गणना यह निर्धारित करने में मदद करेगी कि क्या मध्य प्रदेश से सटे गुजरात वन गलियारे में और भी बाघ भटककर आ गए हैं। विशेष रूप से रतनमहल और शूलपाणेश्वर क्षेत्रों में वन विभाग ने इन बड़े मार्जारों के लिए शिकार (प्रे बेस) बढ़ाने के सक्रिय प्रयास शुरू कर दिए हैं।

केंद्रीय मंत्री ने गुजरात की भविष्य की वन्यजीव महत्वाकांक्षाओं को कच्छ के बन्नी घास के मैदानों से भी जोड़ा। मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए इन मैदानों को पारिस्थितिक रूप से बहाल किया जा रहा है। भारत के चल रहे चीता और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) संरक्षण प्रयोगों का जिक्र करते हुए यादव ने विश्वास जताया कि इन प्रयोगों की सफलता कच्छ क्षेत्र में भी अपना आकार लेगी।

ये तमाम बातें 1 जून को दिल्ली में होने वाले इंटरनेशनल बिग कैट्स सम्मेलन से ठीक पहले कही गई हैं। यह इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) के तहत आयोजित हो रहा है, जिसे भारत ने प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने पर लॉन्च किया था। इस शिखर सम्मेलन में 400 से अधिक वैश्विक प्रतिनिधि, नीति निर्माता, संरक्षण विशेषज्ञ और वैज्ञानिक भाग लेंगे।

बड़ी बिल्लियों को “प्रकृति का मूक वास्तुकार” बताते हुए यादव ने कहा कि शीर्ष शिकारी पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए बेहद आवश्यक हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जलवायु परिवर्तन इसलिए तेज हुआ है क्योंकि मानवता ने प्रकृति के साथ अपना संतुलन खो दिया है।

यादव ने इस बात पर जोर दिया कि गिर की सफलता केवल प्रजातियों की सुरक्षा में नहीं, बल्कि सामुदायिक भागीदारी में भी निहित है। उन्होंने कहा कि आज गिर का शेर केवल गिर का नहीं है, बल्कि यह सौराष्ट्र और गुजरात के हर निवासी के लिए गौरव और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन चुका है।

कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़ते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि गिर के शेरों के लिए एक विशेष पुनर्वास केंद्र भी स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन विभाग के निरंतर प्रयासों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के कारण शेरों की आबादी लगातार बढ़ रही है। 1990 में शेरों की आबादी 249 थी, जो आज बढ़कर 861 हो गई है। गिर के शेरों ने अब अपने वन क्षेत्र से बाहर निकलकर आसपास के कई जिलों में भी अपना विस्तार कर लिया है।

यह भी पढ़ें-

अमरेली के किसान का अनोखा प्रयोग: एक ही पेड़ पर उगाईं आम की 14 किस्में, होली से दिवाली तक मिलते हैं फल

आखिर प्रधानमंत्री मोदी क्यों चाहते हैं कि आप सोना खरीदना बंद कर दें?

Your email address will not be published. Required fields are marked *