मंगलवार को अडानी समूह की कंपनियों के शेयरों में 0.13% से लेकर 2.32% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह तेजी तब देखने को मिली जब ट्रम्प प्रशासन ने अरबपति गौतम अडानी के खिलाफ आपराधिक धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज करने का अहम कदम उठाया। इस बड़े फैसले से इस विशाल व्यापारिक समूह पर मंडरा रहा एक बड़ा कानूनी संकट कम हो गया है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने सोमवार को अडानी और उनके सहयोगियों पर लगे उन आरोपों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की, जिनमें कहा गया था कि उन्होंने भारत में बिजली आपूर्ति अनुबंध हासिल करने के लिए रिश्वत दी थी। इसके अलावा, अडानी एंटरप्राइजेज ने तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) के आयात से जुड़े ईरान प्रतिबंधों के उल्लंघन के कथित मामले को भी अलग से सुलझा लिया है।
समूह की प्रमुख कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों ने प्री-ओपन ट्रेड में 1.67% की बढ़त हासिल की। बाद में यह मुनाफा और बढ़ा और कंपनी के शेयर 2.06% की मजबूती के साथ 2,475.30 रुपये पर कारोबार करते देखे गए।
पिछले साल नवंबर में, अमेरिकी अभियोजकों ने आरोप लगाया था कि गौतम अडानी और उनके करीबियों ने सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए मंजूरी हासिल करने के वास्ते भारतीय अधिकारियों को 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने की सहमति दी थी। उन पर अमेरिकी निवेशकों को समूह की भ्रष्टाचार विरोधी नीतियों के बारे में गुमराह करने का भी आरोप था।
एक अलग घटनाक्रम में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने सोमवार को बताया कि अडानी एंटरप्राइजेज ईरान से एलपीजी आयात से जुड़े प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन के मामले को रफा-दफा करने के लिए 275 मिलियन डॉलर का जुर्माना भरने पर सहमत हो गया है।
कंपनी ने अब भारत में एलपीजी का आयात पूरी तरह से बंद कर दिया है। इसके साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए कंपनी के भीतर एक विशेष अनुपालन नेतृत्व (कम्प्लायंस लीडरशिप) की भूमिका भी बनाई गई है।
इन अमेरिकी मामलों का समाधान तब हुआ है, जब पिछले महीने अडानी के वकील ने एक अहम बयान दिया था। गौरतलब है कि यह वकील अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निजी वकील भी हैं।
मामले के एक जानकार सूत्र के अनुसार, वकील ने बताया था कि अडानी समूह अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है, लेकिन जब तक ये कानूनी मामले नहीं सुलझ जाते, तब तक इस योजना पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता।
पोर्ट्स से लेकर पावर सेक्टर तक में दखल रखने वाले इस समूह को साल 2023 से ही कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं का सामना करना पड़ रहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट में समूह पर स्टॉक में हेरफेर और अपतटीय टैक्स हेवन (offshore tax havens) के अनुचित उपयोग के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, अडानी समूह ने हमेशा इन दावों का पुरजोर खंडन किया है और किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है।
शेयर बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सुबह 9:23 बजे (IST) तक अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर 1.65% चढ़ गए। बता दें कि इस कंपनी का नाम अमेरिकी रिश्वतखोरी के आरोपों से भी जुड़ा था। वहीं, अडानी पोर्ट्स के शेयरों में 0.27% की मामूली बढ़त देखी गई, जबकि अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयरों ने 0.61% का मुनाफा दर्ज किया।
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