नई दिल्ली/अहमदाबाद। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शक्तिसिंह गोहिल ने एक प्रेस वार्ता में केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने गुजरात में डीजल की किल्लत, ओएनजीसी के कुप्रबंधन, और जीएसपीसी में हुए कथित हजारों करोड़ के घोटाले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
गोहिल ने गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के अपने दौरे का जिक्र करते हुए बताया कि ट्रांसपोर्टरों और किसानों को पेट्रोल पंपों पर पर्याप्त डीजल नहीं मिल रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि तेल कंपनियों की ओर से पंप मालिकों पर डीजल की बिक्री कम करने और जबरन इंजन ऑयल बेचने का अघोषित दबाव है। प्रधानमंत्री की कथनी और करनी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी अपनी जनसभाओं में सरकारी बसों का दुरुपयोग करते हैं और सोमनाथ मंदिर के ऊपर से एयर शो करवाकर बेतहाशा ईंधन फूंकते हैं, लेकिन आम जनता को कारपूलिंग का उपदेश देते हैं।
कांग्रेस नेता ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और राजीव गांधी के समय में ओएनजीसी की स्थापना और इसके आत्मनिर्भर बनने के सफर को याद करते हुए मौजूदा सरकार पर इस संस्था के विनाश का आरोप लगाया।
उन्होंने तकनीकी आंकड़े पेश करते हुए बताया कि देश का 59 प्रतिशत तेल उत्पादन करने वाले मुंबई हाई, नीलम और हीरा जैसे प्रमुख ऑयल फील्ड्स में ‘वाटर इंजेक्शन’ की प्रक्रिया को 20 से 70 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तेल के कुओं की सेहत बरकरार रखने वाली इस महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रक्रिया में कटौती से देश को 2014 के बाद से लाखों मेट्रिक टन कच्चे तेल का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
इसके अलावा, गोहिल ने पाइपलाइनों की सफाई की ‘पिगिंग’ प्रक्रिया और पानी के रासायनिक ट्रीटमेंट में भारी कोताही का खुलासा किया। मेंटेनेंस के अभाव में ऑयल फील्ड्स में बैक्टीरिया पनप रहे हैं, जिसे उन्होंने एक अदृश्य भ्रष्टाचार करार दिया।
प्रेस वार्ता के दौरान गोहिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साल 2005 के उस बहुचर्चित दावे की भी हवा निकाल दी, जिसमें गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केजी बेसिन में 20 टीसीएफ (ट्रिलियन क्यूबिक फीट) गैस मिलने की घोषणा की थी। गोहिल ने डीजी हाइड्रोकार्बन से मिली आरटीआई के हवाले से बताया कि वहां व्यावसायिक रूप से रिकवर करने लायक एक बूंद गैस भी नहीं मिली थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस झूठे दावे की आड़ में सरप्लस फंड वाली गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) पर 19,000 करोड़ रुपये का भारी भरकम कर्ज लाद दिया गया। गोहिल के अनुसार, जीएसपीसी का पैसा यमन, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में तेल ब्लॉक खरीदने के नाम पर डुबाया गया और बाद में इस मृतप्राय कंपनी का बोझ ओएनजीसी के गले मढ़ दिया गया।
उन्होंने देश में लगातार बढ़ रहे पेट्रोल-डीजल के दामों और एशिया में रुपये की सबसे कमजोर स्थिति के लिए केंद्र की अस्थिर विदेश नीति और आर्थिक कुप्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर घरेलू उत्पादन को सही तरीके से संभाला गया होता, तो आज महंगे आयात पर देश की निर्भरता इतनी अधिक नहीं होती।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए गोहिल ने असम पुलिस द्वारा कांग्रेस नेताओं को तलब किए जाने को सरकार की तानाशाही बताया। उन्होंने इस कार्रवाई की तुलना अंग्रेजी हुकूमत और कंस के राज से करते हुए कहा कि सच बोलने वालों को जेल में डालने से सत्ता सलामत नहीं रहती।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बकरीद पर सड़कों पर नमाज न पढ़ने देने वाले कथित धमकी भरे बयान पर भी गोहिल ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जब-जब भारतीय जनता पार्टी अपनी नाकामियां छिपाना चाहती है, वह जानबूझकर ऐसे बयान देकर टीवी बहसों को भटकाती है, ताकि बुनियादी और जनहित के मुद्दों पर कोई चर्चा न हो सके।
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