comScore जूस जैसे दिखने वाले टेट्रा पैक में शराब की बिक्री 'बेहद भ्रामक', सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

जूस जैसे दिखने वाले टेट्रा पैक में शराब की बिक्री ‘बेहद भ्रामक’, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से मांगा जवाब

| Updated: May 20, 2026 18:41

जूस के डिब्बे में बिक रही वोदका! भ्रामक पैकेजिंग से युवाओं में बढ़ती लत और खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को जारी किया नोटिस।

सुप्रीम कोर्ट ने फलों के जूस जैसे दिखने वाले टेट्रा पैक और पाउच में शराब की बिक्री पर सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को अदालत ने इस तरह की छिपी हुई पैकेजिंग पर प्रतिबंध लगाने की मांग वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों के आबकारी विभागों को नोटिस जारी किया।

इस मामले की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने की। इन पैकेट्स की भ्रामक प्रकृति को देखते हुए सीजेआई कांत ने टिप्पणी की कि यह बहुत ही धोखा देने वाला कृत्य है और इसी के साथ उन्होंने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया।

यह महत्वपूर्ण याचिका ‘कम्युनिटी अगेंस्ट ड्रंकन ड्राइविंग’ नामक एक संस्था द्वारा दायर की गई है। संस्था की ओर से अदालत में पेश हुए अधिवक्ता विपिन नायर ने दलील दी कि तंबाकू उत्पादों के विपरीत, शराब के इन टेट्रा पैकेट्स पर कोई वैधानिक चेतावनी नहीं छपी होती है।

नायर ने अदालत को बताया कि ये पैक बिल्कुल फलों के जूस के डिब्बे जैसे दिखते हैं। इनमें वोदका भरी होती है लेकिन पैकेट के ऊपर सेब और आम की आकर्षक तस्वीरें छपी होती हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि ‘चिली मैंगो वोदका’ जैसे उत्पादों को देखकर बाहर से यह पता लगाना असंभव हो जाता है कि इसके अंदर शराब है।

गौरतलब है कि इससे पहले नवंबर 2025 में भी शीर्ष अदालत ने टेट्रा पैक में शराब की धड़ल्ले से हो रही बिक्री की कड़ी आलोचना की थी। दो व्हिस्की ब्रांडों के बीच एक ट्रेडमार्क विवाद की सुनवाई के दौरान अदालत ने यह माना था कि इस तरह की कार्टन पैकेजिंग जूस के डिब्बों से काफी मिलती-जुलती है।

वर्तमान याचिका में संस्था ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह केंद्र सरकार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एक समान नीति बनाने का निर्देश दे। संस्था ने इस तरह की अस्पष्ट पैकेजिंग में शराब बेचने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

इसके अलावा, याचिका में ‘बॉटलिंग’ (बोतल में शराब भरने की प्रक्रिया) शब्द की एक स्पष्ट और एकसमान परिभाषा तय करने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बॉटलिंग को केवल कांच के कंटेनरों या स्पष्ट रूप से अलग दिखने वाले पारदर्शी कंटेनरों तक ही सीमित किया जाना चाहिए, ताकि मादक पदार्थों को आसानी से पहचाना जा सके।

इस तरह की पैकेजिंग के गंभीर खतरों को उजागर करते हुए संस्था ने तर्क दिया कि इससे नाबालिगों में शराब पीने की लत आसानी से बढ़ सकती है।

फलों के जूस जैसा दिखने के कारण इसे छिपाना बेहद आसान होता है, जिससे चलती गाड़ियों में शराब पीने, सार्वजनिक स्थानों पर नशा करने और राज्यों की सीमाओं के पार तस्करी को बढ़ावा मिलता है। साथ ही, यह प्लास्टिक पैकेजिंग पर्यावरण के लिए भी बड़ा खतरा है।

याचिका में इस बात पर भी गहरी चिंता जताई गई है कि उपभोक्ताओं को गुमराह करने के लिए बाजार में इन टेट्रा पैक का आक्रामक तरीके से विपणन किया जा रहा है।

याचिका में जिन विवादित ब्रांड लेबलों का विशेष रूप से जिक्र किया गया है, उनमें “बंटी प्रीमियम वोदका”, “चेल्ली मैंगो वोदका” और “प्रीमियम रोमानोव वोदका – एप्पल थ्रिल” शामिल हैं।

याचिका के अंत में यह दावा किया गया है कि जानबूझकर फलों के नामों का उपयोग करना और सेब तथा आम की रंगीन तस्वीरें छापना शराब कंपनियों की एक सोची-समझी मार्केटिंग रणनीति है।

इसका एकमात्र उद्देश्य मादक पेय पदार्थों को सामान्य फलों के जूस के रूप में बेचना, अधिकारियों की जांच से बचना और विशेष रूप से कम उम्र के युवाओं को अपना निशाना बनाना है।

यह भी पढ़ें-

2024 में नीट पेपर लीक के खिलाफ उठाई थी आवाज, आज खुद हैं आरोपी: जानें कौन हैं ‘M Sir’

भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन: पीएम मोदी के ‘संबंध’ शब्द ने जीता आइसलैंड की प्रधानमंत्री का दिल

Your email address will not be published. Required fields are marked *