गुजरात के भरूच स्थित सदियों पुरानी ऐतिहासिक जामा मस्जिद को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति (आरडीएसएस) नामक एक दक्षिणपंथी संगठन इस सुन्नी मस्जिद को जैन धार्मिक स्थल बताकर इस पर अपना दावा जताने का अभियान चला रहा है। इसके तहत संगठन द्वारा लगातार हस्ताक्षर अभियान और कई सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर 15 जून को इस ऐतिहासिक मस्जिद परिसर में भारी भीड़ जुटाने के आह्वान वाले कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इस स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने गहरी चिंता व्यक्त की है। विभाग ने जिला प्रशासन को अलर्ट करते हुए किसी भी ऐसे जमावड़े को तुरंत रोकने का आग्रह किया है जिससे सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने या इस संरक्षित स्मारक को नुकसान पहुंचने का खतरा हो।
एएसआई वडोदरा सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् ने 10 जून (बुधवार) को भरूच के कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट को एक आधिकारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में राष्ट्रीय धरोहर संरक्षण समिति की प्रस्तावित रैली से पहले केंद्र द्वारा संरक्षित इस स्मारक की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की सख्त मांग की गई है। बता दें कि यह दक्षिणपंथी संगठन 18 मई से ही इस इलाके में अपना यह अभियान चला रहा है।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, भरूच की यह जामा मस्जिद 26 मई 1909 की गजट अधिसूचना के तहत राष्ट्रीय महत्व का एक जीवंत स्मारक है। एएसआई ने जामा मस्जिद के अध्यक्ष मौलाना कुरैशी गुलाम मुस्तफा द्वारा दी गई जानकारी का हवाला देते हुए बताया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोगों से भारी संख्या में स्मारक पर इकट्ठा होने की अपील की जा रही है। जगह की अत्यधिक संवेदनशीलता को देखते हुए किसी भी अप्रिय घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है।
पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि 15 जून की भीड़ स्मारक को भौतिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ क्षेत्र की शांति व्यवस्था को भी भंग कर सकती है। इसके अलावा, एएसआई ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 49 और प्राचीन स्मारक तथा पुरातत्व स्थल और अवशेष (AMASR) अधिनियम, 1958 की धारा 16 का भी जिक्र किया है। ये कानून राज्य और कलेक्टर को राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों को किसी भी तरह के प्रदूषण या अपवित्रीकरण से बचाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करते हैं।
इस बीच, जामा मस्जिद के ट्रस्टियों ने भी गुरुवार को भरूच जिला प्रशासन और पुलिस के समक्ष कई अभ्यावेदन दाखिल किए हैं। उन्होंने 15 जून के कार्यक्रम के मद्देनजर कानून-व्यवस्था बिगड़ने की गंभीर चिंता जताई है। ट्रस्टियों ने स्पष्ट किया है कि यह मस्जिद कई पीढ़ियों से मुसलमानों का एक सक्रिय इबादत स्थल होने के साथ-साथ एक पंजीकृत वक्फ संपत्ति भी है।
ट्रस्टियों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से सोशल मीडिया पर स्मारक के धार्मिक स्वरूप को लेकर जानबूझकर विवाद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने 3 मार्च 2026 की एक विशेष घटना का भी उल्लेख किया, जब परिसर के भीतर कथित तौर पर गैर-मुस्लिम धार्मिक अनुष्ठान करने का प्रयास किया गया था। उस घटना के बाद भी एएसआई ने जिला अधिकारियों से पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और निवारक उपायों की मांग की थी।
इसके साथ ही, एएसआई ने सितंबर 2025 के एक पत्र का हवाला देते हुए मुस्लिम समुदाय की धार्मिक मान्यताओं को जारी रखने के लिए शुक्रवार को स्मारक का निकास द्वार खोलने का भी कलेक्टर से अनुरोध किया है। वहीं, मामले पर भरूच के जिला कलेक्टर एन. के. गव्हाणे ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन सभी संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रहा है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
कलेक्टर ने बताया कि स्मारक का प्रबंधन और संरक्षण पूरी तरह से एएसआई द्वारा किया जाता है और फिलहाल कानून-व्यवस्था की कोई समस्या नहीं है। भरूच के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय, सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट कार्यालय और एएसआई मिलकर इसकी निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने आम जनता से अपील की है कि वे स्मारक के बारे में कोई भी सामान्य टिप्पणी करने या अफवाहों और गलतफहमियों पर विश्वास करने से बचें।
दूसरी तरफ ट्रस्टियों ने प्रशासन से स्मारक के पास सभी रैलियों, सभाओं और जुलूसों पर तुरंत रोक लगाने की कड़ी मांग की है। उन्होंने गुजरात पुलिस अधिनियम के तहत मौजूदा अधिसूचनाओं को लागू करने, पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने और सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया है। अभ्यावेदन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई और कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित प्रशासनिक और पुलिस मशीनरी की होगी।
गौरतलब है कि भरूच शहर के कोटपारसी इलाके में मलबारी दरवाजे के पास स्थित यह ऐतिहासिक जामा मस्जिद 700 से अधिक वर्षों से मजबूती से खड़ी है। अपने धार्मिक महत्व के चलते यह स्थल दैनिक और विशेष रूप से शुक्रवार की नमाज के लिए हजारों मुस्लिम नमाजियों का प्रमुख केंद्र है।










