गुजरात: गोधरा परीक्षा केंद्र में नीट-यूजी (NEET-UG) की उत्तर पुस्तिकाओं में हुई हेराफेरी के दो साल बाद भी शिक्षा माफिया पूरी तरह सक्रिय हैं। आज भी जालसाज मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्रों और उनके परिजनों को कई राज्यों के परीक्षा केंद्रों में अपनी मजबूत पैठ होने का दावा कर रहे हैं।
हाल ही में हुई एक गुप्त पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शिक्षा सलाहकार होने का दिखावा करने वाले कुछ लोग छात्रों को गलत तरीकों से एडमिशन दिलाने का लालच दे रहे हैं। ये गिरोह छात्रों को उन परीक्षा केंद्रों का विकल्प चुनने को कहते हैं, जिन्हें आसानी से “मैनेज” किया जा सकता है या जहां धांधली करना उनके लिए सुविधाजनक होता है।
झारखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे कई राज्यों में फैले एक इंस्टीट्यूट चेन से जुड़े एक व्यक्ति ने खुलासा किया कि उनका नेटवर्क परीक्षा से कई महीने पहले ही उम्मीदवारों से संपर्क साधना शुरू कर देता है।
जब एक रिपोर्टर ने मेडिकल छात्र का अभिभावक बनकर इस दलाल से फोन पर बात की, तो उसने बताया कि आवेदन प्रक्रिया शुरू होते ही वे माता-पिता और छात्रों की काउंसलिंग शुरू कर देते हैं। इस प्रक्रिया के तहत वे छात्रों को उन्हीं परीक्षा केंद्रों को चुनने की सलाह देते हैं, जहां इस गिरोह का सीधा प्रभाव होता है।
कॉल करने वाले शख्स ने दावा किया कि परीक्षा के नियमों में सख्ती आने के बाद, उनका नेटवर्क अब छात्रों के लिए नए सिरे से फर्जी निवास प्रमाण पत्र भी तैयार करवाता है। इसके जरिए छात्र उन विशिष्ट इलाकों के केंद्रों के लिए आसानी से पात्र बन जाते हैं, जहां इन ठगों का पूरा नियंत्रण होता है।
उसने बड़ी बेबाकी से यह भी स्वीकार किया कि गोधरा की तरह ही, गुजरात और देश के कुछ अन्य केंद्रों पर अब भी यह अवैध काम चल रहा है। इस समय झारखंड के जमशेदपुर का गोलमुरी इलाका दलालों की पहली पसंद बनकर उभर रहा है। गौरतलब है कि गोलमुरी में हाल के वर्षों में कोचिंग संस्थानों की बाढ़ सी आ गई है और झारखंड पुलिस ने भी इस क्षेत्र को साइबर अपराध के बढ़ते केंद्र के रूप में चिन्हित किया है।
इस दलाल ने आगे बताया कि आवेदन फॉर्म जमा होने के बाद चुनिंदा केंद्रों पर सेटिंग की पूरी व्यवस्था की जाती है। उसने यह बड़ा दावा किया कि उनके लोग परीक्षा हॉल के अंदर खुद छात्रों की ओएमआर (OMR) शीट भरते हैं। अगर किसी तकनीकी समस्या के कारण ऐसा संभव नहीं हो पाता है, तो वे बाद में सीधे रिजल्ट में ही हेरफेर कर देते हैं।
इन अवैध और फर्जी सेवाओं के लिए यह नेटवर्क प्रत्येक उम्मीदवार से 75 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ रुपये तक की भारी भरकम रकम वसूलता है। दलाल ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्र के सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद ही भुगतान से जुड़ी आगे की प्रक्रिया और जानकारी साझा की जाती है।
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