गुजरात के सूरत शहर से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां शेयर बाजार में भारी नुकसान और कर्ज के बोझ तले दबे एक 36 वर्षीय युवक ने अपनी ही मां की हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद भी फांसी का फंदा लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।
यह खौफनाक वारदात अश्विनी कुमार रोड स्थित रूपम सोसाइटी की है। मृतकों की पहचान 63 वर्षीय भानु सोनानी और उनके बेटे जतिन सोनानी (36) के रूप में हुई है। शुक्रवार सुबह जब एक पड़ोसी उनके घर पहुंचा, तो उसने भानु को बिस्तर पर बेसुध पड़ा देखा, जबकि पास ही जतिन का शव फंदे से लटक रहा था।
पड़ोसी ने तुरंत पुलिस को इस घटना की सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए स्मीमेर (SMIMER) अस्पताल भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई कि भानु की मौत तार या धागे से गला घोंटने के कारण हुई है, जबकि जतिन की जान फांसी पर लटकने से गई।
शुरुआती जांच के दौरान पुलिस को घर से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इस खत में जतिन ने अपनी मां से माफी मांगी है। जांचकर्ताओं को पता चला है कि शेयर बाजार में लगातार हो रहे घाटे की वजह से जतिन पर करीब 45 लाख रुपये का भारी-भरकम कर्ज हो गया था।
पुलिस के मुताबिक, जतिन अविवाहित था। एक बेहद भावुक तथ्य यह भी सामने आया है कि जतिन भानु का सगा बेटा नहीं था। जब वह महज छह महीने का था, तब भानु ने उसे एक रिश्तेदार से गोद लिया था और बड़े प्यार से उसकी परवरिश की थी।
सुसाइड नोट और शुरुआती तफ्तीश के आधार पर पुलिस का मानना है कि जतिन को इस बात की गहरी चिंता थी कि उसकी मौत के बाद उसकी बुजुर्ग मां बेसहारा हो जाएगी और उनका ख्याल कौन रखेगा। इसी डर और मानसिक दबाव के चलते उसने खौफनाक कदम उठाया और खुद मरने से पहले अपनी मां को मौत के घाट उतार दिया।
डीसीपी (जोन-1) आलोक कुमार ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को सुबह करीब 10 बजे इस घटना की सूचना मिली थी। प्राथमिक जांच में यही सामने आया है कि शेयर बाजार में हुए भारी नुकसान के कारण यह घटना घटी है। जतिन पर पहले भी कर्ज हुआ था, तब रिश्तेदारों और परिवार के अन्य सदस्यों ने उसकी मदद की थी।
डीसीपी ने आगे स्पष्ट किया कि सुसाइड नोट में जतिन ने कर्ज से परेशान होकर अपनी जान देने और मां की हत्या करने की बात कबूल की है। हालांकि, पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या इस दिल दहला देने वाले कदम के पीछे कोई और अन्य कारण तो नहीं छिपा है।
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