भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने नेस्ले इंडिया के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। नियामक ने कंपनी के शिशु पोषण उत्पादों से जुड़े कथित नियम उल्लंघन को लेकर तीन अलग-अलग न्यायिक मामले दर्ज किए हैं। इन विवादित उत्पादों में ‘नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1’ और ‘लैक्टोजेन प्रो 1’ शामिल हैं।
इंस्टाग्राम पर जारी एक नोटिस के अनुसार, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर मौजूद इन उत्पादों और इनकी प्रचार सामग्री की बारीकी से जांच की गई थी। इस दौरान उत्पादों की मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कुछ दावों पर खाद्य नियामक ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
‘नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1’ के मामले में “5 एचएमओ” (5 HMOs) और “व्हे प्रोटीन” (Whey Protein) से जुड़े दावों को आपत्तिजनक माना गया है। वहीं, ‘लैक्टोजेन प्रो 1’ को लेकर किए गए उस दावे पर नियामक ने सवाल उठाया है, जिसमें इसके व्हे प्रोटीन को आसानी से पचने वाला बताया गया था।
इन दावों को लेकर FSSAI ने पहले नेस्ले इंडिया से स्पष्टीकरण मांगा था। विस्तृत जांच के बाद नियामक ने पाया कि ये उत्पाद खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020 के नियम 4(2) का साफ तौर पर उल्लंघन कर रहे हैं। यह खास नियम शिशु आहार की बिक्री बढ़ाने के मकसद से किए जाने वाले किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार पर रोक लगाता है।
इसके अलावा प्राधिकरण ने 1992 के शिशु दुग्ध विकल्प, फीडिंग बोतल और शिशु खाद्य पदार्थ (उत्पादन, आपूर्ति और वितरण का विनियमन) अधिनियम की धारा 3 का भी हवाला दिया है। यह कानून छोटे बच्चों के ऐसे उत्पादों के विज्ञापन और सीधे प्रचार को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है।
प्रचार से जुड़े इन विवादों के अलावा क्वालिटी का भी एक मामला सामने आया है। FSSAI ने बताया कि नेस्ले इंडिया द्वारा बनाए गए एक ‘फॉलो-अप फॉर्मूला’ का सैंपल प्रयोगशाला जांच के दौरान अपने बायोटिन (Biotin) कंटेंट के पैमाने पर सब-स्टैंडर्ड यानी गुणवत्ता से नीचे पाया गया है।
इस सैंपल को जब दोबारा जांच के लिए एक रेफरल लैब में भेजा गया, तो वहां भी नतीजे नहीं बदले। दूसरी जांच में भी यह प्रोडक्ट 2020 के शिशु पोषण नियमों के तहत निर्धारित बायोटिन मानकों पर खरा नहीं उतर सका।
इन्हीं लेबोरेटरी नतीजों और प्रचार संबंधी उल्लंघनों को लेकर नेस्ले पर ये तीन मामले दायर किए गए हैं। हालांकि, नियामक के नोटिस से यह स्पष्ट है कि अभी तक नेस्ले इंडिया पर कोई अंतिम जुर्माना या पेनाल्टी नहीं लगाई गई है और प्रक्रिया जारी है।
इस पूरे विवाद पर नेस्ले इंडिया ने भी अपना आधिकारिक पक्ष रखा है। कंपनी के एक प्रवक्ता ने बचाव करते हुए स्पष्ट किया है कि उनके सभी उत्पाद लागू होने वाले सभी नियमों का पूरी तरह से पालन करते हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि ‘नैन एक्सेला प्रो’ और ‘लैक्टोजेन प्रो’ के लेबलों को स्वयं FSSAI की विशेषज्ञ समिति द्वारा ही मंजूरी दी गई थी। नोटिस मिलने के बाद कंपनी ने अधिकारियों को अपना विस्तृत जवाब सौंप दिया है। नेस्ले का दावा है कि लेबल पर लिखी गई बातें पूरी तरह तथ्यात्मक हैं और वे वैज्ञानिक साहित्य पर आधारित हैं।
कंपनी ने अपने बयान के अंत में भरोसा दिलाया है कि वे सभी लागू कानूनों और लेबलिंग मानकों का सख्ती से पालन करते हैं। साथ ही, उपभोक्ता जागरूकता की दिशा में वे आगे भी FSSAI का समर्थन करते रहेंगे और उनके साथ मिलकर काम करेंगे।
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