अहमदाबाद/सेंट पीटर्सबर्ग: ग्लोबल टेक और एआई के क्षेत्र में भारत को एक बड़ी ताकत बनाने के लिए देश के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन एनर्जी समूह ‘अडानी ग्रुप’ और इंजीनियरिंग व मैन्युफैक्चरिंग की दिग्गज वैश्विक कंपनी ‘जाबिल इंक’ ने हाथ मिलाया है। 15 जून 2026 को दोनों कंपनियों ने भारत में विश्व स्तरीय ‘एआई और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफॉर्म’ स्थापित करने के लिए एक रणनीतिक गठबंधन की घोषणा की है।
यह गठबंधन जाबिल की छह दशकों की उन्नत इंजीनियरिंग और डेटा सेंटर विशेषज्ञता को अडानी ग्रुप के विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी पोर्टफोलियो और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के साथ जोड़ेगा। इस शक्तिशाली गठजोड़ का मुख्य उद्देश्य एआई के अनुकूल डेटा सेंटर हार्डवेयर की स्थानीय और वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करना है।
इस नए प्लेटफॉर्म के तहत भारत में गीगावाट-स्केल की हाई-डेंसिटी एआई रैक मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित की जाएगी। इसके जरिए नेक्स्ट-जेनरेशन के लिक्विड-कूल्ड एआई रैक, सर्वर, स्टोरेज और नेटवर्किंग सिस्टम का निर्माण होगा। यह पहल केवल कंप्यूटिंग रैक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें पावर डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट्स (PDUs), कूलेंट डिस्ट्रीब्यूशन यूनिट्स (CDUs), ट्रांसफॉर्मर, स्विचगियर और अत्याधुनिक थर्मल मैनेजमेंट सिस्टम जैसे उपकरणों का संपूर्ण निर्माण भी शामिल होगा। दोनों कंपनियों का लक्ष्य इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डर्स को एक ही जगह पर डिजाइन से लेकर डिप्लॉयमेंट तक का पूरा हार्डवेयर इकोसिस्टम उपलब्ध कराना है।
एआई कंप्यूटिंग में हो रहे ढांचागत निवेश के कारण अगले सात वर्षों में वैश्विक स्तर पर 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का बाजार अवसर पैदा होने का अनुमान है। भारत का डेटा सेंटर बाजार भी एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। एआई की बढ़ती मांग, क्लाउड विस्तार और डेटा लोकलाइजेशन की जरूरतों के चलते 2030 तक इसकी क्षमता 5 से 8 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है।
ग्लोबल हाइपरस्केलर्स भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में 50 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट और केंद्रीय बजट 2026 में डेटा सेंटर्स के लिए 2047 तक घोषित टैक्स हॉलिडे ने भारत में निर्मित हार्डवेयर की मांग और वैश्विक निर्यात प्रतिस्पर्धा को काफी बढ़ा दिया है।
यह पहल अडानी ग्रुप की उस प्रतिबद्धता के बिल्कुल अनुरूप है, जिसके तहत 2035 तक 5 गीगावाट के ग्रीन-एनर्जी आधारित एआई डेटा सेंटर्स विकसित करने के लिए 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया जाना है। वहीं, वित्त वर्ष 2025 में 29.8 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज करने वाली कंपनी जाबिल अपने हालिया अधिग्रहणों (हैनली एनर्जी ग्रुप और माइक्रोस टेक्नोलॉजीज) और विशेषज्ञता के जरिए इस भारतीय प्लेटफॉर्म को सटीक थर्मल और पावर मैनेजमेंट समाधान प्रदान करेगी।
यह रणनीतिक गठबंधन ‘मेक इन इंडिया’ विजन के अगले चरण के लिए एक मील का पत्थर है। यह भारत को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के एक आयातक से बदलकर एआई हार्डवेयर का एक प्रमुख वैश्विक निर्माता और निर्यातक बनाएगा। इस घरेलू मैन्युफैक्चरिंग से ग्लोबल सप्लाई चेन मजबूत होगी और देश में हजारों उच्च कुशल इंजीनियरिंग नौकरियां पैदा होंगी।
इस ऐतिहासिक कदम पर अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी ने कहा कि दुनिया एक ऐसी ‘इंटेलिजेंस क्रांति’ में प्रवेश कर रही है जो पिछली किसी भी औद्योगिक क्रांति से अधिक व्यापक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जाबिल के साथ यह गठबंधन भारत का संपूर्ण एआई इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है, जिससे भारत एआई युग में केवल उपभोक्ता नहीं, बल्कि निर्माता और निर्यातक बनेगा।
वहीं, जाबिल के सीईओ माइक दस्तूर ने कहा कि यह रणनीतिक सहयोग ग्राहकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि जाबिल की इंजीनियरिंग विशेषज्ञता और अडानी के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के संयोजन से भारत और दुनिया भर में बेहतरीन रैक-लेवल समाधान दिए जा सकेंगे। उन्होंने भारत के कुशल कार्यबल और व्यापार के अनुकूल माहौल को इस वैश्विक साझेदारी के लिए बेहद आकर्षक बताया।
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