comScore Re-NEET परीक्षा: ब्लैकलिस्टेड कंपनी को मिला बायोमेट्रिक का ठेका, 60 लाख की डील में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ - Vibes Of India

Gujarat News, Gujarati News, Latest Gujarati News, Gujarat Breaking News, Gujarat Samachar.

Latest Gujarati News, Breaking News in Gujarati, Gujarat Samachar, ગુજરાતી સમાચાર, Gujarati News Live, Gujarati News Channel, Gujarati News Today, National Gujarati News, International Gujarati News, Sports Gujarati News, Exclusive Gujarati News, Coronavirus Gujarati News, Entertainment Gujarati News, Business Gujarati News, Technology Gujarati News, Automobile Gujarati News, Elections 2022 Gujarati News, Viral Social News in Gujarati, Indian Politics News in Gujarati, Gujarati News Headlines, World News In Gujarati, Cricket News In Gujarati

Vibes Of India
Vibes Of India

Re-NEET परीक्षा: ब्लैकलिस्टेड कंपनी को मिला बायोमेट्रिक का ठेका, 60 लाख की डील में सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़

| Updated: June 23, 2026 12:34

लखीसराय में पकड़े गए सॉल्वर गैंग से हुआ चौंकाने वाला खुलासा; 60-60 लाख रुपये में असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे मेडिकल के मेधावी छात्र, बायोमेट्रिक कंपनी की भूमिका भी शक के घेरे में।

री-नीट परीक्षा के समापन के साथ ही इसमें हुए एक व्यापक फर्जीवाड़े ने सबको चौंका दिया है। लखीसराय में एक बड़े सॉल्वर गैंग की गिरफ्तारी और एक गुप्त ईमेल के सामने आने से इस पूरे नेटवर्क की परतें खुल गई हैं। जांच एजेंसियों ने पाया है कि शातिर गैंग ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रणाली में बड़ी सेंधमारी की।

असली परीक्षार्थियों की जगह मेडिकल और अन्य व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के होनहार छात्रों को परीक्षा हॉल में बैठाया गया। इस गंभीर धोखाधड़ी में बायोमेट्रिक जांच के लिए जिम्मेदार एजेंसियों के कर्मचारियों की संलिप्तता भी गहराई से जांची जा रही है।

इस खुलासे का सबसे हैरान करने वाला पहलू बायोमेट्रिक जांच का ठेका है। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने री-नीट के दौरान बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन की जिम्मेदारी पहले ईडीसीआईएल (EDCIL) को सौंपी थी। बाद में ईडीसीआईएल ने यह महत्वपूर्ण कार्य इनोवेटिव व्यू नामक कंपनी को आउटसोर्स कर दिया।

जांच में यह तथ्य सामने आया है कि इनोवेटिव व्यू कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2022 में ही ब्लैकलिस्ट कर दिया था। इसके अलावा साल 2025 में झारखंड और तमिलनाडु सरकार ने भी बायोमेट्रिक कार्यों में गड़बड़ी के चलते इसे काली सूची में डाला था। अब इस दागी कंपनी का पूरा नेटवर्क जांच के घेरे में है।

फर्जीवाड़े का तरीका बेहद शातिराना था। 14 जून को प्रवेश पत्र जारी होते ही शिक्षा माफियाओं ने इनोवेटिव व्यू कंपनी के सुपरवाइजरों से साठगांठ कर ली। असली परीक्षार्थियों के बायोमेट्रिक निशान परीक्षा केंद्र से 100 से 150 मीटर दूर खड़ी कारों के भीतर लिए गए। वहीं परीक्षा देने के लिए केंद्र के भीतर जाने वाले ‘स्कॉलर्स’ के फर्जी बायोमेट्रिक दर्ज किए गए। किसी को शक न हो, इसके लिए डमी अंगूठे के निशानों को जानबूझकर बिगाड़ भी दिया गया था।

इस पूरे भंडाफोड़ की शुरुआत 21 जून को दोपहर 12 बजे आए एक गुप्त ईमेल से हुई। बिहार पुलिस मुख्यालय और एनटीए को मिली इस पुख्ता सूचना में बताया गया कि केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र पर मधु प्रिया नामक अभ्यर्थी की जगह बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की छात्रा पूनम परीक्षा दे रही है।

इसी सुराग पर पुलिस ने जाल बिछाया और गैंग का पर्दाफाश किया। गैंग का मुख्य सेटर पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) का एक छात्र निकला। गिरफ्तारी के वक्त उसने अपना नाम मयंक कश्यप बताया था लेकिन असल में वह हाजीपुर का रहने वाला अश्विनी कुमार है। अश्विनी पीएमसीएच में 2022 बैच के एमबीबीएस तृतीय वर्ष का छात्र है और उसने फर्जी नाम से सिम कार्ड भी खरीद रखा था।

पूछताछ में पता चला है कि मास्टरमाइंड अश्विनी कुमार खुद एक बायोमेट्रिक कर्मचारी के भेष में परीक्षा केंद्र के अंदर दाखिल हुआ था। वह अंदर बैठकर ही फर्जी परीक्षार्थियों की लगातार मदद कर रहा था।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस दिन वह लखीसराय के परीक्षा केंद्र पर इस अपराध को अंजाम दे रहा था, उसी दिन पीएमसीएच के सर्जरी विभाग की एक विशेष कक्षा में उसकी हाजिरी दर्ज पाई गई। अब अस्पताल प्रशासन इस बात की तहकीकात कर रहा है कि आखिर उसकी फर्जी उपस्थिति किसने दर्ज की।

यह पूरा गोरखधंधा करोड़ों रुपयों का था। जांच में सामने आया है कि सॉल्वर गैंग का सरगना किसी भी अभ्यर्थी को परीक्षा पास कराने के एवज में 60 लाख रुपये तक की डील करता था। इस भारी-भरकम राशि में से 25 लाख रुपये सीधे मुख्य सेटर अश्विनी कुमार के हिस्से में जाते थे।

वहीं पुलिस को मिले गुप्त ईमेल में जिस पूनम कुमारी का जिक्र था वह झारखंड के गिरिडीह की निवासी है। पूनम पढ़ने में बेहद तेज है और उसने साल 2021 में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की विज्ञान परीक्षा में राज्य भर में टॉप किया था। वह फिलहाल बीएचयू से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है।

जांच के दौरान पुलिस ने उन सभी असली अभ्यर्थियों और उनकी जगह परीक्षा देने वाले डमी छात्रों (स्कॉलर्स) की पहचान कर ली है। संजीत कुमार के स्थान पर जलपाईगुड़ी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के चौथे साल का छात्र मंतोष कुमार परीक्षा दे रहा था, जबकि प्रभात अमन की जगह एएनएमएमसीएच गया के चतुर्थ वर्ष के छात्र विवेक कुमार को बैठाया गया था।

इसी तरह शुभम वर्मा के बदले मध्य प्रदेश के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज सतना का प्रथम वर्ष का छात्र हिमांशु कुमार और ईशान सिंह की जगह एम्स रायबरेली में एमबीबीएस के चौथे साल का छात्र सौरभ जी झा परीक्षा दे रहा था।

गुप्त सूचना के अनुसार मधु प्रिया की जगह बीएचयू की बीएससी नर्सिंग छात्रा पूनम कुमारी मौजूद थी। वहीं अक्षत दुबे की जगह दिल्ली के शहादरा स्थित यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंस का एमबीबीएस इंटर्न अमन अग्रवाल परीक्षा हॉल में था। निरंजन के बदले एनएमसीएच पटना में बी.फार्मा के चौथे साल का छात्र रौशन कुमार परीक्षा दे रहा था।

इसके अलावा नंदनी राज की जगह उड़ीसा के गवर्नमेंट आयुर्वेदिक कॉलेज की बीएएमएस छात्रा चंचल कुमारी और राहुल कुमार प्रिंस के स्थान पर एनएमसीएच पटना का छात्र जितेंद्र कुमार परीक्षा देते हुए पाया गया।

यह भी पढ़ें-

NEET Re-Exam में बड़ी सेंधमारी विफल: बिहार में ‘सॉल्वर गैंग’ का भंडाफोड़, 40 लाख की डील में 24 गिरफ्तार

अपनी कंपनी 14,110 करोड़ में बेची और 540 कर्मचारियों में बांट दिए 1,992 करोड़ रुपये; रातों-रात सब बने करोड़पति

Your email address will not be published. Required fields are marked *