लोगों की सेहत और जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने वाले एक बेहद गंभीर मामले का खुलासा हुआ है। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने ब्लड प्लाज्मा में मिलावट करने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के रहने वाले मास्टरमाइंड समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह दवा निर्माण के लिए इकट्ठा किए गए असली ब्लड प्लाज्मा को कंपनी तक पहुंचने से पहले ही मिलावटी प्लाज्मा से बदल देता था। इस मिलावटी खेप को चांगोदर इलाके में स्थित एक फार्मास्युटिकल कंपनी को सप्लाई किया जा रहा था।
इस बड़ी कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 1,140 ब्लड प्लाज्मा यूनिट, मिलावट में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और एक परिवहन वाहन को जब्त किया है। बरामद किए गए इस पूरे माल की अनुमानित कीमत 12.06 लाख रुपये बताई जा रही है।
अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि इस जांच की शुरुआत तब हुई जब एसओजी को दिनेशभाई उमाभाई चौधरी के बारे में एक खुफिया जानकारी मिली। दिनेशभाई इससे पहले फार्मास्युटिकल कंपनियों के साथ ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव के तौर पर काम कर चुका था।
जांचकर्ताओं का आरोप है कि चौधरी ने अपने पुराने अनुभव का फायदा उठाते हुए निजी आर्थिक लाभ के लिए ब्लड प्लाज्मा की खेप के साथ छेड़छाड़ की। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने चांगोदर थाना क्षेत्र में संदिग्ध की निगरानी शुरू की और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी व जालसाजी का मामला दर्ज किया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एसओजी को सौंप दी गई। पुलिस टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र से इस पूरे खेल के मुख्य सरगना को भी खोज निकाला और उसे गिरफ्तार कर लिया।
इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम देने के लिए चौधरी ने असली ब्लड प्लाज्मा यूनिट्स को मिलावटी प्लाज्मा से बदलने का एक बहुत ही व्यवस्थित तरीका ईजाद किया था।
पुलिस के मुताबिक, दो सह-आरोपी जितेन्द्रभाई बलदेवभाई सोलंकी और रफीकभाई सलामभाई इस काम में उसकी मदद करते थे। जितेन्द्रभाई ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन वाहन का ड्राइवर था और रफीकभाई उसका सह-चालक था, जिन पर महाराष्ट्र के विभिन्न जिलों से प्लाज्मा लाने की जिम्मेदारी थी।
जब भी यह वाहन असली ब्लड प्लाज्मा की खेप लेकर लौटता था, तो दोनों ड्राइवर पहले ही चौधरी को इसकी सूचना दे देते थे। इसके बाद, फार्मास्युटिकल कंपनी में सीधे माल पहुंचाने के बजाय वे गाड़ी को रास्ते से ही चौधरी के घर ले जाते थे।
वहां असली और उच्च गुणवत्ता वाले प्लाज्मा बैग को निकालकर उनकी जगह पहले से तैयार किए गए मिलावटी प्लाज्मा यूनिट रख दिए जाते थे। इसके बाद मिलावटी बैग कंपनी को सौंप दिए जाते थे, जबकि असली प्लाज्मा को अवैध कमाई के लिए रख लिया जाता था।
ये मिलावटी बैग इतनी चालाकी से तैयार किए जाते थे कि वे दिखने और मात्रा में बिल्कुल असली जैसे लगते थे, जिससे कंपनी की सामान्य जांच में इन्हें पकड़ना बहुत मुश्किल था।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों की आधिकारिक पहचान कर ली गई है। इनमें बनासकांठा जिले के मलोत्रा गांव का निवासी और कथित मास्टरमाइंड दिनेशभाई उमाभाई चौधरी शामिल है। इसके अलावा महाराष्ट्र के वाशिम जिले के दुधाला गांव का रहने वाला मोहन दाजीबा गायकवाड़ भी पुलिस की गिरफ्त में है।
अन्य दो आरोपियों में मूल रूप से अहमदाबाद जिले के बावला स्थित देवदथल का रहने वाला रफीकभाई सलामभाई और ढोलका तालुका के कादीपुर गांव का निवासी जितेन्द्रभाई बलदेवभाई सोलंकी शामिल हैं। रफीकभाई फिलहाल ढोलका में ही निवास कर रहा था।
पुलिस ने अपनी छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में संदिग्ध सामग्री भी बरामद की है। इसमें करीब 11 लाख रुपये की कीमत के 1,140 ब्लड प्लाज्मा यूनिट के साथ-साथ एक डीप फ्रीजर, तीन केमिकल की बोतलें, एक सीलिंग मशीन और चौंतीस खाली प्लाज्मा बैग शामिल हैं।
इसके अलावा अपराध में इस्तेमाल की गई एक महिंद्रा बोलेरो पिक-अप गाड़ी भी जब्त की गई है। इस पूरी जब्ती की कुल कीमत लगभग 12.06 लाख रुपये आंकी गई है।
इस बड़े खुलासे के बाद अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस बात की गहराई से जांच कर रहे हैं कि क्या यह मिलावटी प्लाज्मा पहले ही दवा निर्माण की सप्लाई चेन में पहुंच चुका था। इसके अलावा इस रैकेट में अन्य लोगों के शामिल होने की आशंकाओं को भी तलाशा जा रहा है।
जांच दल यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या कंपनी को भेजी गई पिछली खेपों में भी इसी तरह की मिलावट की गई थी और यह गिरोह कितने लंबे समय से इस नेटवर्क को चला रहा था। पुलिस की सघन पूछताछ और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
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