HDFC बैंक के बोर्ड रूम में हुए हालिया विवादों के बाद अब स्थिति साफ होती नजर आ रही है। ऐसी प्रबल संभावना है कि बैंक अपने मौजूदा मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शशिधर जगदीशन को लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए अपना पूरा समर्थन दे सकता है।
पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती द्वारा लगाए गए आरोपों की हाल ही में एक स्वतंत्र कानूनी जांच की गई थी। इस विस्तृत जांच में शीर्ष प्रबंधन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे जगदीशन की स्थिति और मजबूत हो गई है।
इस क्लीन चिट के बाद अब सारा दारोमदार भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। हालांकि बैंक का बोर्ड उनके समर्थन में है, लेकिन देश के सबसे बड़े निजी बैंक के प्रमुख की नियुक्ति पर अंतिम मुहर केंद्रीय बैंक को ही लगानी है।
यह पूरा घटनाक्रम HDFC बैंक के लिए बेहद अहम समय पर सामने आया है। साल 2023 में HDFC लिमिटेड के ऐतिहासिक विलय के बाद बैंक अभी भी एकीकरण के दौर से गुजर रहा है। इसके साथ ही, बैंक में एक स्थायी गैर-कार्यकारी चेयरमैन की तलाश भी तेजी से चल रही है।
बता दें कि पूर्व गैर-कार्यकारी चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इसी साल मार्च में बैंक की कुछ कार्यप्रणालियों पर गंभीर चिंता जताते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद प्रबंधन ने जगदीशन की पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया को रोककर मामले की स्वतंत्र कानूनी जांच शुरू कर दी थी।
बैंक ने 26 जून को शेयर बाजार को दी गई एक अहम जानकारी में बताया कि अमेरिकी लॉ फर्म ‘विल्सन सोनसिनी गुद्रिच एंड रोसाती’ और भारतीय लॉ फर्म ‘वाडिया गांधी एंड कंपनी’ ने इस पूरे मामले की गहन समीक्षा की है। इस जांच में चक्रवर्ती के बयानों को साबित करने वाला कोई भी दस्तावेजी या मौखिक सबूत नहीं मिला।
जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि तत्कालीन रिकॉर्ड लगाए गए आरोपों से बिल्कुल मेल नहीं खाते हैं और इन दावों का कोई ठोस आधार नहीं है। इन सकारात्मक नतीजों से बैंक में जगदीशन के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के बादल पूरी तरह छंट गए हैं।
उम्मीद जताई जा रही है कि अब HDFC बैंक का बोर्ड आधिकारिक तौर पर जगदीशन को अगले तीन साल के कार्यकाल के लिए अनुशंसित करने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। उनका मौजूदा कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त होने वाला है।
दिग्गज बैंकर आदित्य पुरी के रिटायर होने के बाद साल 2020 में जगदीशन ने पहली बार बैंक की कमान संभाली थी। उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए साल 2023 में उनके कार्यकाल को एक बार फिर से विस्तार दिया गया था। खुद जगदीशन भी बोर्ड द्वारा चुने जाने पर पद पर बने रहने की इच्छा जता चुके हैं।
मैक्वेरी कैपिटल के वित्तीय सेवा अनुसंधान प्रमुख सुरेश गणपति का मानना है कि लॉ फर्म से मिली इस क्लीन चिट ने जगदीशन के तीसरे कार्यकाल की संभावनाओं को काफी हद तक बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि जांच में यह साबित हुआ है कि बैंक में सही प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।
हालांकि, कुछ वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि RBI कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले हर पहलू की बारीकी से जांच करेगा। आशिका ग्रुप के शोध प्रमुख आशुतोष मिश्रा के अनुसार, बोर्ड की इच्छा के बावजूद अब गेंद पूरी तरह से नियामक के पाले में है कि वह बीते एक साल के घटनाक्रम को किस नजरिए से देखता है।
मिश्रा ने यह भी कहा कि बैंक के पास मौजूदा वक्त में एक बेहद मजबूत लीडरशिप टीम मौजूद है। इनमें डिप्टी CEO कैजाद भरूचा का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है, जिन्हें बैंकिंग सेक्टर में एक सक्षम और अनुभवी नेता के रूप में देखा जाता है।
कॉरपोरेट गवर्नेंस के अलावा, केंद्रीय बैंक विलय के बाद HDFC बैंक के परिचालन और प्रदर्शन का भी बारीकी से आकलन करेगा। मॉर्गेज लेंडर HDFC के साथ विलय से बैंक की लोन बुक में भारी इजाफा तो हुआ है, लेकिन इसका ऋण-जमा अनुपात भी काफी बढ़ गया है।
अधिग्रहीत पोर्टफोलियो को मुख्य रूप से उधारी के माध्यम से वित्त पोषित किया गया था। इस बढ़े हुए अनुपात को कम करना और जमा राशि को बढ़ाना जगदीशन के दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहा है। बैंक इस दिशा में आक्रामक रूप से काम कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह लंबी प्रक्रिया अभी भी जारी है।
CEO के उत्तराधिकार की इस अहम प्रक्रिया के साथ ही बैंक के स्थायी गैर-कार्यकारी चेयरमैन की तलाश भी समानांतर रूप से चल रही है। इसी महीने की शुरुआत में, RBI ने अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन केकी मिस्त्री का कार्यकाल 18 सितंबर तक के लिए तीन महीने और बढ़ा दिया है।
जानकारी के मुताबिक बैंक की नामांकन और पारिश्रमिक समिति ने चेयरमैन पद के लिए पांच योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया है। इनमें भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर राजेश्वर राव का नाम भी शामिल है। उम्मीद है कि बोर्ड अंतिम मंजूरी के लिए तीन प्रमुख नाम केंद्रीय बैंक को भेजेगा।
सूत्रों का मानना है कि बैंक यह भी चाहता है कि उसके नए चेयरमैन को CEO की नियुक्ति प्रक्रिया में अपनी राय रखने का पूरा मौका मिले। बैंक प्रबंधन नहीं चाहता कि नए चेयरमैन पर कोई पहले से लिया गया फैसला थोपा जाए।
अगर शशिधर जगदीशन को तीसरा कार्यकाल मिलता है, तो यह बैंक के लिए लीडरशिप निरंतरता का एक बहुत बड़ा संकेत होगा। यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण है जब बैंक अपनी बैलेंस शीट को संतुलित करने और देश के सबसे बड़े बैंकिंग विलय को पूरी तरह सफल बनाने पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित कर रहा है। फिलहाल, देश के वित्तीय क्षेत्र की नजरें RBI के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
यह भी पढ़ें-








