गांधीनगर। सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने और सिस्टम के भीतर ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देने के लिए गुजरात सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक सुधार किया है। राज्य ने वन विभाग की अनिवार्य मंजूरियों में लगने वाले समय को खत्म करने के उद्देश्य से कच्छ जिले में 4,900 हेक्टेयर का एक विशाल लैंड बैंक स्थापित किया है। यह कदम विशेष रूप से ‘क्षतिपूरक वनीकरण’ (compensatory afforestation) की जरूरतों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
इस नई व्यवस्था के लागू होने से अब सरकारी विभागों को हर एक नए प्रोजेक्ट के लिए अलग से जमीन खोजने और उसे ट्रांसफर करने की लंबी झंझट से नहीं गुजरना पड़ेगा। पिछले ही हफ्ते वन विभाग को यह जमीन आवंटित की गई है। अनुमान है कि यह लैंड बैंक अगले तीन से पांच साल तक सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए वन भूमि के इस्तेमाल से पैदा होने वाली वनीकरण की आवश्यकताओं को आसानी से पूरा कर देगा।
दरअसल, विकास कार्यों में वन भूमि के इस्तेमाल पर अक्सर उतनी ही वैकल्पिक जमीन वनीकरण के लिए देनी पड़ती है। यह नियम क्लीयरेंस की प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा माना जाता था। लेकिन अब नए तंत्र के तहत, किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जरूरी वैकल्पिक जमीन सीधे तौर पर कच्छ के इस लैंड बैंक से ले ली जाएगी। इससे अलग-अलग विभागों को जमीन तलाशने की प्रक्रिया से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी।
वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव विनोद राव ने इस पहल की सराहना की है। उन्होंने कहा कि लैंड बैंक बनाने के लिए वन विभाग को 4,900 हेक्टेयर सरकारी जमीन सौंपना ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम है। उनके मुताबिक जिन विभागों के प्रोजेक्ट्स में वन भूमि शामिल है, उनके लिए अब क्लीयरेंस की प्रक्रिया काफी तेज हो जाएगी।
इस अहम फैसले के तुरंत बाद, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) ने एक संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी कर दी है। नई प्रणाली को सुचारू रूप से चलाने के लिए पूरे वन विभाग को नए निर्देश भी भेज दिए गए हैं। इसी कड़ी में सोमवार को मुख्य सचिव मनोज दास ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि वे वन विभाग की मंजूरियों को जल्द से जल्द हासिल करने के लिए इस नई सुविधा का भरपूर उपयोग करें।
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस लैंड बैंक में से करीब 1,200 हेक्टेयर जमीन का इस्तेमाल उन लंबित सड़क परियोजनाओं के लिए किया जाएगा जो पहले से ही फॉरेस्ट क्लीयरेंस पोर्टल पर दर्ज हैं। इसके अलावा जल संसाधन जैसे अन्य विभागों की परियोजनाओं के लिए भी लगभग 1,000 हेक्टेयर जमीन आवंटित किए जाने की संभावना है।
एक सरकारी अधिकारी ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के बाद भी इस लैंड बैंक में पर्याप्त जमीन बची रहेगी, जिससे अगले तीन से पांच वर्षों तक भविष्य के सभी सरकारी प्रोजेक्ट्स को बिना किसी देरी के मंजूरी मिल सकेगी।
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