सूरत में 7 जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद पिछले तीन दिनों में हाई-राइज इमारतों और व्यावसायिक परिसरों के बेसमेंट से 1.1 अरब (111 करोड़) लीटर से अधिक पानी बाहर निकाला जा चुका है। यह पानी इतना ज्यादा है कि इससे 400 ओलंपिक साइज के स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं।
गौरतलब है कि 7 जुलाई को शहर में 14.5 इंच बारिश दर्ज की गई थी। इसके कारण मीठी और भेड़वाड़ खाड़ियों में भयंकर बाढ़ आ गई, जिससे लोगों को बड़े पैमाने पर सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ा। राहत की बात यह है कि इसके बाद से इलाके में बारिश नहीं हुई है। अब नगर निगम के अधिकारियों ने पूर्वी सूरत के प्रभावित इलाकों, जैसे वराछा, उधना, लिंबायत, सचिन और पुणागाम में सड़कों और बस्तियों की साफ-सफाई का काम तेज कर दिया है।
इस भीषण बारिश के बाद से लापता हुए कम से कम 34 लोगों के शव अब तक बरामद किए जा चुके हैं। बाढ़ के पानी ने दर्जनों बाजारों और आवासीय परिसरों को पूरी तरह से जलमग्न कर दिया था।
सूरत नगर निगम के आंकड़ों के मुताबिक, शहर में 430 अलग-अलग स्थानों पर पानी भर गया था। इनमें 192 आवासीय सोसाइटियां, 117 सार्वजनिक स्थान, 102 हाई-राइज टावर और 19 अन्य संपत्तियां शामिल थीं।
सूरत नगर निगम के अतिरिक्त शहर अभियंता एमडी चावड़ा ने बताया कि पानी निकालने के लिए 254 से ज्यादा पंप और अन्य भारी मशीनरी का इस्तेमाल किया गया। विभिन्न संपत्तियों से लगभग 111.14 करोड़ लीटर पानी निकाला गया है। जलभराव खत्म होने के बाद इन सभी इलाकों की साफ-सफाई भी की गई।
बाढ़ के बाद अब प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य संकट भी गहराने लगा है। नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग ने पिछले चार दिनों में 15 स्वास्थ्य शिविर लगाए हैं। इन मेडिकल टीमों में डॉक्टर, त्वचा रोग विशेषज्ञ, पैरामेडिकल स्टाफ, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट शामिल हैं।
सोमवार शाम तक 4,529 लोगों ने इन शिविरों में अपना इलाज करवाया। जांच के दौरान 991 लोगों में त्वचा रोग की पुष्टि हुई है। इसके अलावा 404 लोग बुखार, 400 लोग सांस की समस्या, 264 लोग सर्दी-खांसी और 82 लोग डायरिया से पीड़ित मिले। वहीं, 2,020 अन्य लोगों ने अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं की शिकायत की, जिनमें से 14 मरीजों की हालत को देखते हुए उन्हें नगर निगम के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
सूरत नगर निगम के चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप उमरीगर ने हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि दूषित पानी के लंबे समय तक संपर्क में रहने के कारण त्वचा रोगों के मामले बढ़े हैं। उधना-ए जोन में त्वचा रोग के सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं। आवासीय सोसाइटियों की बात करें तो कामरूनगर में 190, आजाद नगर में 185 और संजय नगर में 168 सबसे अधिक मामले सामने आए हैं।
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