गुजरात के अरवल्ली जिले से एक बेहद झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक आवासीय विद्यालय के प्रिंसिपल और ट्रस्टी ने 13 साल के एक मासूम छात्र की महज इसलिए बेरहमी से पिटाई कर दी, क्योंकि उन्हें शक था कि उसने आंतरिक परीक्षा का पेपर देख लिया है। इस अमानवीय घटना के बाद बच्चा बुरी तरह घायल हो गया और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है।
पीड़ित छात्र 8वीं कक्षा में पढ़ता है। आरोप है कि स्कूल के प्रिंसिपल और ट्रस्टी ने उसे प्लास्टिक के पाइप से बुरी तरह पीटा और कई थप्पड़ जड़े। छात्र के पिता ने भारी मन से बताया कि उनके बेटे को करीब ढाई घंटे तक एक कमरे में बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। इस दौरान उस मासूम को पीने के लिए पानी तक नहीं दिया गया।
पिटाई के कारण बच्चे के शरीर में तेज दर्द है और उसके कानों में सूजन आ गई है। फिलहाल उसका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पिता ने चिंता जताते हुए कहा कि उनके पास निजी अस्पताल का खर्च उठाने के पैसे नहीं हैं, इसलिए उन्हें जल्द ही अपने बेटे को किसी सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ सकता है।
महिसागर जिले के रहने वाले छात्र के पिता के मुताबिक, उन्हें 18 जुलाई को स्कूल के ट्रस्टी का फोन आया था। ट्रस्टी ने उन्हें बताया कि पेपर देखने के आरोप में उनके बेटे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
सूचना मिलते ही जब घबराए हुए माता-पिता स्कूल पहुंचे, तो ट्रस्टी के कार्यालय के बाहर उनका बेटा उन्हें देखते ही दौड़कर गले लग गया और फूट-फूट कर रोने लगा। उसी वक्त बच्चे ने अपने साथ हुई इस क्रूरता की आपबीती सुनाई।
जब माता-पिता ने स्कूल प्रबंधन से इस घटना का जवाब मांगा, तो उन्हें कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। उल्टे स्कूल अधिकारियों ने उन्हें अपने बच्चे को वहां से ले जाने के लिए कहा और उसे स्कूल से निकालने की धमकी तक दे डाली। इसके कुछ देर बाद ही बच्चे को चक्कर आने लगे, जिसके बाद घबराए माता-पिता ने तुरंत इमरजेंसी हेल्पलाइन पर फोन किया।
पैरामेडिकल स्टाफ बच्चे को मोडासा सिविल अस्पताल ले गया। वहां के अस्पताल प्रबंधन ने इसे मेडिको-लीगल मामला बताते हुए पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद बच्चे को बेहतर इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। पीड़ित परिवार की शिकायत पर मोडासा ग्रामीण पुलिस ने मामले पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
मोडासा ग्रामीण पुलिस ने आरोपी प्रिंसिपल और ट्रस्टी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की स्वेच्छा से चोट पहुंचाने की धाराओं और किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। हालांकि, पीड़ित पिता ने पुलिस प्रशासन के रवैये पर भी गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका आरोप है कि पुलिस उनके परिवार के साथ सहयोग नहीं कर रही है और इतनी गंभीर शिकायत दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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