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चिंचपोकली चा चिंतामणि के दरबार में सपरिवार पहुंचे प्रणव और करण अडाणी, 107 वर्षों से मुंबई की ‘सांस्कृतिक धड़कन’ है यह उत्सव

| Updated: September 14, 2026 14:32

107 साल पुराने ऐतिहासिक 'चिंचपोकली चा चिंतामणि' के दरबार में अडाणी परिवार ने की विशेष पूजा, तिरुपति बालाजी की तर्ज पर सजा है भव्य पंडाल।

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर मुंबई में उत्सव की भव्य शुरुआत हो चुकी है। इसी कड़ी में अडाणी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर प्रणव अडाणी और अडाणी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड (APSEZ) के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडाणी ने अपने परिवार के साथ ऐतिहासिक ‘चिंचपोकली चा चिंतामणि’ पहुंचकर गणपति बप्पा के दर्शन किए और उनकी विशेष पूजा-अर्चना की।

इस अवसर पर अडाणी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर और मैनेजिंग डायरेक्टर (एग्रो, ऑयल एंड गैस) प्रणव अडाणी ने इस भव्य आयोजन का हिस्सा बनने पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल के साथ जुड़ना उनके लिए बड़े सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि अपने 107वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी चिंचपोकली चा चिंतामणि की समृद्ध विरासत मुंबई की भक्ति, एकता और सांस्कृतिक धड़कन का प्रतीक बन चुकी है।

चिंचपोकली चा चिंतामणि मुंबई का दूसरा सबसे पुराना सार्वजनिक गणपति है। इस ऐतिहासिक मंडल की जड़ें शहर के पुराने कपड़ा मिल क्षेत्रों जैसे परेल, गिरगांव और लालबाग से जुड़ी हैं। यह उत्सव स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की उस महान विरासत को आज भी मजबूती से आगे बढ़ा रहा है, जिन्होंने 1890 के दशक में गणेश चतुर्थी को एक घरेलू पूजा से निकालकर विशाल सार्वजनिक उत्सव में बदल दिया था। साल 1939 से यह भव्य आयोजन चिंचपोकली रेलवे स्टेशन के पूर्वी हिस्से में लगातार होता आ रहा है।

अपनी अनूठी थीम के लिए मशहूर इस मंडल ने इस साल दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला की भव्यता को अपने पंडाल में उतारा है। बप्पा की मूर्ति तिरुमाला तिरुपति के भगवान वेंकटेश्वर बालाजी की थीम पर बनाई गई है, जिसमें गरुड़, कीर्तिमुख, शंख, चक्र और कपूर तिलक जैसे पारंपरिक पवित्र प्रतीक शामिल हैं। इसका विशाल पंडाल हैदराबाद और भुवनगिरी के श्री वेंकटेश्वर मंदिर (स्वर्णगिरी) की प्रतिकृति है, जिसमें ऊंचे गोपुरम, पवित्र दीपस्तंभ और नक्काशीदार रक्षक आकृतियां उकेरी गई हैं।

शुरुआती दौर में मुंबई के मिल मजदूर इस उत्सव का एक अहम हिस्सा हुआ करते थे। 1982 की मिल हड़ताल और उसके बाद हुए भारी शहरी बदलावों के बावजूद यह उत्सव कभी फीका नहीं पड़ा और अपने इलाके का एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र बना रहा। वर्तमान में करीब 5,000 सदस्यों और योगदानकर्ताओं के साथ यह चिंचपोकली सार्वजनिक उत्सव मंडल केवल गणेशोत्सव तक ही सीमित नहीं है।

यह संगठन स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा पहलों के जरिए लगातार समाज की निस्वार्थ सेवा कर रहा है। मंडल की ओर से नियमित रूप से रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य पहल और बच्चों के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कोविड-19 महामारी के कठिन समय में भी इस मंडल ने सार्वजनिक समारोहों को सीमित करते हुए समाज सेवा को सर्वोपरि रखा था और परीक्षण शिविर, चिकित्सा सहायता व रक्तदान अभियान जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियां चलाई थीं।

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